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‘लेडी दबंग’ से बहस करने वाले ‘दक्षिणपंथी’ अकाउंट को सस्पेंड किया ट्विटर, डी रूपा करने लगीं ट्रेंड

नई दिल्ली
सीनियर आईपीएस अधिकारी और अब कर्नाटक की प्रमुख सचिव गृह बन चुकीं डी. रूपा (D. Roopa) एक बार से सुर्खियों में हैं। सोशल मीडिया पर काफी ऐक्टिव रहने वाली रूपा को लेकर ट्विटर पर #Roopa भी ट्रेंड कर रहा है। ट्विटर पर हुई रूपा की बहस के बाद से True Indology नामक अकाउंट को सस्पेंड कर दिया गया, जिस वजह से संग्राम छिड़ा हुआ है।

ट्विटर पर डी. रूपा और True Indology के बीच डिबेट शुरू हुई। यह डिबेट दीपावली पर पटाखों पर लगे प्रतिबंध को लेकर शुरू हुई। वार-पलटवार के बाद True Indology को ट्विटर ने सस्पेंड कर दिया। रूपा ने पेज पर आधे-अधूरे ज्ञान से लोगों को भ्रमित करने, अभद्र भाषा का इस्तेमाल करने के साथ ही सरकार और NGT के आदेशों की अवहेलना का आरोप लगाया।

रूपा ने ट्विट कर लिखा, ‘किसी काल्पनिक उत्पीड़न पर पीड़ित बनने का नाटक करना। बिना किसी नाम या चेहरे के गाली-गलौच करना काम है। चोरी ऊपर से सीना जोरी, वाह। फैक्ट्स के साथ बातें रखने वाले कई लोगों को तुम्हारे फॉलोअर ट्रोल करते हैं। अब तुम्हारा समय खत्म हुआ।’ उनके इसी ट्वीट का स्क्रीनशॉट ट्विटर पर वायरल हो रहा है। आरोप लगाया गया है कि ऑफिसर ने अपनी शक्तियों का उपयोग करते हुए अकाउंट को सस्पेंड करा दिया है।

कंगना और कपिल ने उठाई आवाज
बॉलिवुड ऐक्ट्रेस कंगना रणौत और बीजेपी नेता कपिल मिश्रा ने भी अकाउंट सस्पेंड किए जाने को लेकर आवाज उठाई है। कंगना ने कहा कि अयोग्यता और फ्रस्टेशन की वजह से ऐसा कदम उठाया गया है। उन्होंने कहा कि इस लड़ाई में हम साथ हैं। वहीं कई यूजर्स ने इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का हनन करार दिया है।

वहीं दिल्ली बीजेपी नेता और पूर्व विधायक कपिल मिश्रा ने ट्विटर इंडिया को टैग करते हुए लिखा कि यह दूसरी बार है, जब सबसे अधिक सूचनाप्रद पेज को बिना किसी वजह के बंद कर दिया गया है। ट्विटर यूजर्स का कहना है कि True Indology को आईपीएस रूपा से बहस करने की कीमत चुकानी पड़ रही है।

कौन हैं डी. रूपा
तीन महीने पहले ही अगस्त में डी. रूपा को बेंगलुरु आईजी पुलिस से प्रमुख सचिव गृह बनाया गया है। वह कर्नाटक की पहली ऐसी महिला आईपीएस हैं, जिन्हें इस पद पर तैनात किया गया है। 2000 बैच की आईपीएस ऑफिसर रूपा की इमेज निडर और बेबाक अधिकारी की रही है। सिस्टम से टकराव और कई नेताओं पर ऐक्शन की वजह से रूपा का 41 बार ट्रांसफर हो चुका है। पहली बार इनका नाम सुर्खियों में 2004 में आया, जब दंगे के एक पुराने मामले में मध्य प्रदेश की तत्कालीन सीएम उमा भारती को गिरफ्तार करने पहुंची थीं।

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