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वकील बनकर आया विकास दुबे का साथी और कर गया सरेंडर, लोग पूछ रहे- पुलिस थी कहां ?

कानपुर
बिकरू हत्याकांड के बाद एसटीएफ और पुलिस की टीमों ने आठ दिन में विकास दुबे समेत 6 बदमाशों को एनकाउंटर में मार गिराया था। हिस्ट्रीशीटर विकास दुबे को एनकाउंटर में मार गिराए जाने के बाद कानपुर पुलिस पुराने ढर्रे पर लौट आई है। इसका सीधा फायदा हिस्ट्रीशीटर विकास दुबे के खूंखार गुर्गे उठा रहे हैं। मंगलवार को बिकरू हत्याकांड में फरार चल रहे धीरेंद्र उर्फ धीरू दुबे ने वकील की पोशाक में पुलिस को चकमा देते हुए माती कोर्ट में सरेंडर कर दिया। दो दिनों में दो शातिर बदमाशों ने जिस तरह से सरेंडर किया है, उससे पुलिस की भूमिका पर भी सवाल उठने लगे हैं।

बिकरू हत्याकांड में फरार चल रहे बदमाश पुलिस से ज्यादा ऐक्टिव दिखाई दे रहे हैं। बीते सोमवार को बिकरू हत्याकांड में फरार चल रहे 50 हजार के इनामी बदमाश गोविंद सैनी ने पुलिस को चकमा देते हुए माती कोर्ट में सरेंडर किया था। इसके बाद मंगलवार को विकास दुबे के करीबी धीरेंद्र उर्फ धीरू दुबे ने वकील की पोशाक में माती कोर्ट में सरेंडर कर दिया। जानकारी के मुताबिक पुलिस ने कोर्ट के बाहर सरेंडर करने वाले बदमाशों के लिए जाल बिछाया था।

बिकरू हत्याकांड में नामजद आरोपी धीरेंद्र उर्फ धीरू दुबे हिस्ट्रीशीटर विकास दुबे के सबसे खास गुर्गों में था। धीरू दुबे ने विकास दुबे के साथ मिलकर पुलिस कर्मियों पर गोलियां बरसाई थीं। वारदात को अंजाम देने के बाद से धीरू फरार चल रहा था। एसटीएफ और पुलिस को धीरू दुबे की तलाश थी।

धीरू दुबे ने बदमाशों की छतों पर की तैनाती

सूत्रों के मुताबिक धीरू दुब हिस्ट्रीशीटर विकास दुबे और अतुल दुबे का बेहद करीबी था। बीते 2 जुलाई की रात विकास के कहने पर धीरू ने बदमाशों की लिस्ट तैयार की थी और यह तय किया था कि कौन बदमाश किसकी छत पर मौजूद रहेगा। किस बदमाश के पास कौन सा असलहा रहेगा। पुलिस कर्मियों की घेराबंदी का खाका धीरू दुबे ने खींचा था।

असलहे कहां छिपाए धीरू से मिल सकता है सुराग
बिकरू हत्याकांड में बदमाशों ने जिन असलहों को इस्तेमाल किया, पुलिस उन्हें बरामद नहीं कर सकी है। पुलिस ने असलहों की तलाश में बिकरू गांव के तालाबों और कुएं में भी सर्च ऑपरेशन चलवाया था, लेकिन सफलता नहीं मिल सकी। यदि पुलिस धीरू दुबे को रिमांड में लेकर असलहों के संबध में पूछताछ करती है तो निश्चित सफलता मिल सकती है।

सरेंडर करने वाले अपराधी
बिकरू हत्याकांड में फरार चल रहे बदमाश एक-एक कर के कोर्ट में सरेंडर कर रहे है। सबसे पहले बीते 29 जुलाई को गोपाल सैनी ने माती कोर्ट में सरेंडर किया था। इसके बाद बीते 17 अगस्त को गोपाल सैनी के बड़े भाई गोविंद सैनी ने कोर्ट में सरेंडर किया था। 18 अगस्त को विकास के करीबी धीरू दुबे ने भी कोर्ट में सरेंडर कर दिया। वहीं बीते 8 अगस्त को उमाकांत शुक्ला गले में रहम की तख्ती डालकर चौबेपुर थाने मे सरेंडर करने की लिए पहुंचा था।

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