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यूपी वालों के लिए बड़ी खुशखबरी, योगी सरकार देगी 3 लाख नई नौकरियां, जानें पूरी प्रक्रिया

लखनऊ
राज्य सरकार अलग-अलग विभागों में बड़े पैमाने पर सरकारी नौकरियां देने की तैयारी कर रही है। अगले कुछ महीनों में करीब 3 लाख सरकारी नौकरियां निकलेंगी। सीएम योगी ने शनिवार को कहा कि जल्द ही नई भर्तियों की प्रक्रिया शुरू करेगी। मुख्यमंत्री शनिवार को सरकारी आवास पर डॉ. भीमराव आंबेडकर पुलिस अकादमी, मुरादाबाद के आधारभूत प्रशिक्षण के बाद डीएसपी और सहायक अभियोजन अधिकारियों के दीक्षांत समारोह को वर्चुअल माध्यम से संबोधित किया। सभी विभागों से रिक्तियों का ब्योरा ले लिया गया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि रिक्त पदों पर भर्ती को लेकर विभिन्न चयन आयोगों और बोर्डों के अध्यक्षों के साथ बैठक भी की गई है। अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि रिक्त पदों पर चयन प्रक्रिया शुरू किए जाने के 6 महीने के भीतर चयनित अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र प्रदान कर दिए जाएं। उन्होंने कहा कि पिछले 3 साल में राज्य सरकार ने 3 लाख से अधिक अभ्यर्थियों को नौकरी दी है। वर्ष 2017 से अब तक पुलिस विभाग में रिक्त पदों पर 1 लाख 37 हजार 253 भर्तियां की गईं हैं। जो 2007 से 2017 तक की गई भर्तियों से कई गुना अधिक हैं।

‘सबको न्याय दिलाने को संकल्पबद्ध’
दीक्षांत समारोह में सीएम ने कहा कि यूपी सरकार अंतिम पीड़ित व्यक्ति को न्याय दिलाने के लिए संकल्पबद्ध है। सुशासन की नींव मजबूत करने, अपराधों की रोकथाम व कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए दक्ष और संवेदनशील पुलिसिंग जरूरी है। यूपी पुलिस कोरोना जैसी गंभीर और वैश्विक महामारी में मजबूत स्तंभ की तरह काम कर रही है।

उन्होंने अधिकारियों को बधाई दी और उनके उज्ज्वल भविष्य की मंगल कामना की। सीएम ने कहा कि पुलिस न्याय प्रणाली का एक जरूरी अंग है। अपराधों की रोकथाम, अनावरण, अपराधियों को सजा करवाना, कानून व्यवस्था व सुरक्षा यह सभी पुलिस की जिम्मेदारी है। अकादमी में पुलिस उपाधीक्षक पद के 30 अधिकारियों व सहायक अभियोजन अधिकारी पद के 30 अधिकारियों ने प्रशिक्षण पूरा किया है।

ग्रामीण क्षेत्रों में जिस तरह से मनरेगा के तहत रोजगार की गारंटी है, ठीक उसी तरह अब हर घर में कम से कम एक युवा को नौकरीशुदा होने का अधिकार दिया जा सकता है। लॉकडाउन के बाद की स्थितियों को देखते हुए सरकार ने जो रोजगार आयोग के गठन की बात कही थी, उसे अब स्थायी रूप दिए जाने पर विचार किया जा रहा है। सूत्र बताते हैं कि रोजगार आयोग यह प्रावधान रख सकता है कि हर घर में कम से कम एक युवा नौकरीशुदा हो।

कोरोना के फैलते संक्रमण को रोकने के लिए हुए लॉकडाउन का विपरीत असर नौकरियों पर पड़ा है। तमाम प्रवासी श्रमिक बेरोजगार होकर वापस प्रदेश लौट आए। वहीं तमाम रोजगार धंधे बंद होने या उनमें कमी आने की वजह से भी लोगों की नौकरी जाने की खबरें हैं। इस स्थिति को देखते हुए सरकार ने रोजगार आयोग बनाने की बात कही थी। इसको लेकर तेज गति से विचार चल रहा है।

डेप्युटी सीएम हो सकते हैं आयोग के अध्यक्ष
सूत्र बताते हैं कि आयोग यह तय करना चाहता है कि प्रदेश में हर परिवार से कम से कम एक व्यक्ति को नौकरी जरूर मिले ताकि हर परिवार का गुजारा आसानी से चलता रहे। दावा यह भी किया जा रहा है कि डेप्युटी सीएम को आयोग का अध्यक्ष बनाया जा सकता है। वहीं, रोजगार आयुक्त का कद मुख्य सचिव के बराबर का होगा। रोजगार व प्रशिक्षण, उद्यमिता विकास, कौशल सुधार आदि विभागों को आयोग के अधीन रखा जाएगा और युवाओं को कुशल बनाया जाएगा।

उनके प्रशिक्षण का इंतजाम कराया जाएगा और यह सुनिश्चित किया जाएगा कि कम से कम एक युवक हर परिवार से नौकरीशुदा हो। सूत्र दावा तो यह भी कर रहे हैं कि सरकारी विभाग, निजी संस्था, उद्योग या कंपनी में नौकरी का प्रबंध रोजगार आयोग कर सकेगा।

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