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वीडियो : ऐसी होगी देश की पहली रैपिड रेल, सिर्फ 60 मिनट में तय होगा 4 घंटे का सफर

नई दिल्ली। कोरोना काल में भी देश बुलंदियों के शिखर को छूने की कोशिश कर रहा है। इसी के चलते सबसे आधुनिक तकनीक से भारत रैपिड रेल को तैयार किया जा रहा है। इस प्रोजेक्ट को साल 2025 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। रैपिड रेल (Rapid Rail) दिल्ली से मेरठ (Delhi To Meerut) के बीच चलेगी। इससे 3 से 4 घंटे का सफर महज 60 मिनट का रह जाएगा। केंद्रीय आवास एवं शहरी विकास मंत्रालय के सचिव दुर्गाशंकर मिश्रा ने रैपिड रेल का पहला लुक जारी किया है।

रैपिड रेल के कोच का निर्माण गुजरात से सावली में ‘मेक इन इंडिया’ के तहत किया जा रहा है। इससे ट्रेन 180 किलोमीटर प्रतिघंटे की रफ़्तार से चल सकेगी। 82 किलोमीटर लंबा दिल्ली-गाजियाबाद-मेरठ कॉरिडोर भारत में लागू होने वाला पहला आरआरटीएस कॉरिडोर है। रैपिड रेल के चलने से दूरी महज एक घंटे में तय हो सकेगी। रेल चलाने के लिए साहिबाबाद से शताब्दी नगर (मेरठ) के बीच लगभग 50 किलोमीटर लंबे खंड पर सिविल निर्माण कार्य शुरू कर दिया गया है। इसके अलावा गाजियाबाद, साहिबाबाद, गुलधर और दुहाई आरआरटीएस स्टेशन का निर्माण कार्य भी पूरे जोरों पर है।

लोटस टेंपल की तरह हवा और तापमान को रखेंगे नियंत्रित
रैपिड रेल को डिजाइन करने की प्रेरणा दिल्ली के लोटस टेंपल से ली गई है। मंदिर का डिजाइन इस तरह से है जिसके चलते प्रकाश और वायु का प्राकृतिक प्रवाह बना रहे। टेम्पल की इसी खासियत को ध्यान में रखकर, आरआरटीएस ट्रेन तैयार की गई है। इसमें प्रकाश और तापमान नियंत्रण प्रणाली होगी जो ऊर्जा के कम खपत के बावजूद यात्रियों को आरामदायक अनुभव देगी।

ट्रेन में ये चीजें भी होंगी खास
—इन ट्रेनों में 272 ट्रांसवर्स बैठने की व्यवस्था होगी। खड़े यात्रियों के लिए अधिक जगह, सामान रखने का रैक, मोबाइल/लैपटॉप चार्जिंग सॉकेट दिए होंगे।
—ट्रेन में वाईफाई की सुविधा होगी। साथ ही इंफोटेनमेंट डिस्प्ले और संचार सुविधाएं मौजूद रहेंगी।
—रेल में सीसीटीवी, फायरएंड स्मोक डिटेक्टर, अग्निशामक यंत्र और डोर इंडिकेटर लगे होंगे।
— ट्रेन में पुश बटन भी होगाजो जरूरत होने पर दरवाजों को खोलने के काम आएगा।
—दिव्यांगजनों के अनुकूल: ट्रेन के दरवाजों के पास व्हीलचेयर के लिए जगह दी गई होगी।
—पैसेंजर्स बाहर के खूबसूरत नजारे अच्छे से देख सके इसके लिए डबल ग्लेज्ड, टेम्पर्ड प्रूफ बड़ी शीशे की खिड़कियां होंगी।
—प्लैटफ़ार्म पर बिजनेस क्लास लाउंज के क्षेत्र में एक ऑटोमैटिक वेंडिंग मशीन भी लगाई जाएगी।
—प्रत्येक स्टेशन पर ट्रेन के सभी दरवाजों को खोलने की जरूरत नहीं होगी। सिर्फ वही दरवाजें खुलेंगे जहाँ किसी को चढ़ना हो या उतरना हो। इससे ऊर्जा की भारी बचत होगी।

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