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क्या सीरम इंस्टीट्यूट में आग खुद नहीं लगी.. वैक्सीन को तबाह करने के इरादे से लगाई गई?

आज के वक्त में कोरोनावायरस की वैक्सीन पूरी दुनिया में एक बेहद ही मह्त्वपूर्ण स्थिति रखती है। उन देशों को लोग ज्यादा गंभीरता से ले रहे हैं, जहां वैक्सीन बन चुकी है। कुछ ऐसे दुश्मन देश भी हैं, जो इस मुद्दे पर उस देश को नुकसान पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं। ऐसे में किसी भी अप्रिय घटना को साधारण नहीं माना जा सकता है। हाल ही में भारत की वैक्सीन प्रोडक्शन कंपनी सीरम इंस्टीट्यूट के मंजरी प्लांट में जो आग लगी थी वो ऐसी ही एक अप्रिय घटना थी, क्योंकि इसने कोरोना की तो नहीं, लेकिन दो अन्य रोटा वायरस और टीबी की वैक्सीन के प्रोडक्शन पर बुरा असर डाला है।

सीरम इंस्टीट्यूट के प्लांट में लगी आग दिखने में तो साधारण ही थी, लेकिन उसने एक सवाल खड़ा किया है कि क्या इस आग लगने के पीछे कोई साजिश तो नहीं थी। कंपनी के अधिकारियों ने बताया है कि इस आग में 5 लोगों की मौत हो गई है और करीब 1,000 करोड़ रुपए का कंपनी को नुकसान हुआ है। कंपनी के अधिकारियों का कहना है कि इस आग के कारण कंपनी का मंजरी प्लाट क्षतिगग्रस्त हुआ है। इसके चलते अब कंपनी में रोटा वायरस और टीबी की वैक्सीन का प्रोडक्शन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। कंपनी के अधिकारियों का यही बयान सारे सवालों और आशंकाओं को बल देता है।

सवाल ये ही उठता है कि क्या ये आग किसी साजिश के तहत तो नहीं लगाई गई जिससे भारत में कोरोनावायरस की वैक्सीन कोवीशील्ड का प्रोडक्शन प्रभावित किया जाए। इस आग से जिस तरह से रोटा और टीबी की वैक्सीन के प्रोडक्शन प्रभावित हुआ है, वैसे ही कोवीशील्ड का प्रोडक्शन भी प्रभावित हो सकता था। ऐसे में निष्कर्ष ये ही निकलता है कि जिन लोगों ने इस करोना की वैक्सीन को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की उनकी प्लानिंग में झोल निकला और वो असफल हो गए, लेकिन अगर ये साजिशकर्ता सफल हो जाते तो मुश्किलें चौतरफा भारत को घेर सकती थीं।

एक ऐसी कंपनी जिसके अंतर्गत दुनिया की सबसे महत्वपूर्ण वैक्सीन का उत्पादन हो रहा हो, अगर उसी कंपनी से जुड़े किसी भी प्लांट में कोई अप्रिय घटना होती है, तो वो देश के लिए बेहद ही घातक साबित हो सकती है। इसीलिए सीरम इंस्टिट्यूट के इस आग के प्रकरण ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं क्योंकि कोरोना वैक्सीन सरकार के लिए भी महत्वपूर्ण है, और इससे जुड़े प्रत्येक संस्थान की सुरक्षा का जिम्मा सरकार का ही है।

आज की स्थिति में वैक्सीन को लेकर बात करें तो अमेरिका की फाइजर और मडोर्ना की वैक्सीन साइड इफेक्ट्स का पर्याय बन चुकी हैं। दूसरी ओर चीन की वैक्सीनों पर डेटा में झोल होने के चलते भरोसा करना असंभव है। रूस में बनी वैक्सीन स्पुतनिक की स्थिति भी कुछ ऐसी ही है। इन सभी के बाद दुनिया के पास कोरोना वैक्सीन के लिए केवल एक ही सटीक और बेहतरीन विकल्प बचता है, जो कि भारत है। भारत में कोरोना की दो वैक्सीनों को प्रोडक्शन बड़ी मात्रा में किया जा रहा है। एक ऑक्सफोर्ड की एस्ट्रोजैनिका के फॉर्मूले पर बनी कोविशील्ड, और भारत बायोटेक की स्वदेशी को-वैक्सीन।

वैक्सीन को लेकर भारत की स्थिति इस वक्त सबसे मजबूत है। इसीलिए वो दुनिया के अन्य देशों में भी इसका निर्यात कर रहा है। ऐसे में भारत के दुश्मन कभी-भी भारत को सर्वश्रेष्ठ नहीं देखना चाहेंगे। इसलिए जरूरी नहीं कि सीरम इंस्टिट्यूट में जो आग लगी है, वो  साधारण ही हो वो एक असफल प्लानिंग जरूर हो सकती हैं, लेकिन अगर वो कोविशील्ड को नुकसान पहुंचाने में सफल हो जाती तो ये सुरक्षा व्यवस्था पर एक गंभीर सवाल होता।

इसीलिए ये बेहद जरूरी है कि भारत सरकार को सीरम इंस्टिट्यूट में लगी उस आग को हल्के में नहीं लेना चाहिए और इस मामले की सघन जांच कराने के साथ ही भविष्य में वहां की सुरक्षा व्यवस्था को अधिक चाक चौबंध करना चाहिए जिससे कोई अप्रिय घटना न हो।

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