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वैक्सीन को लेकर अफवाह फैलाने वालों पर होगी कानूनी कार्रवाई, केंद्र का आदेश

देश में कोरोना वायरस महामारी के खिलाफ निर्णायक जंग जारी है. इसके लिए दो कोरोना वैक्सीन को मंजूरी दी जा चुकी है. जिसमें भारत की स्वदेशी कोवैक्सीन और ऑक्सफोर्ड का कोविशील्ड शामिल है. कोरोना टीकाकरण अभियान में अभी तक लाखों लोगों को टीका लगाया जा चुका है. वहीं, इस अभियान में कुछ देश विरोधी ताकतें रोड़ा अटकाने के काम में जुटे हैं. ऐसे लोग दोनों वैक्सीनों को लेकर झूठ फैला रहे हैं. वैक्सीन की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर लोगों को भड़काने में जुटे हैं. इस पर मोदी सरकार ने सख्त फैसला लिया है.

केंद्रीय गृह सचिव अजय भल्ला ने राज्यों व केंद्रशासित प्रदेशों को इस बाबत पत्र लिखा है. इसमें राज्यों को बताया गया है कि आपदा प्रबंधन कानून और आईपीसी की धाराओं के तहत ऐसे लोगों पर कार्रवाई की जा सकती है, जो कोरोना वैक्सीनेशन को लेकर अफवाह उड़ा रहे हैं या किसी तरह की अफवाह में शामिल पाए जाते हैं.

अपने पत्र में गृह सचिव ने कहा है कि अफवाह और झूठी खबरों पर रोक के लिए ऐसे लोगों पर कार्रवाई जरूरी है. इसके साथ ही वास्तविक तथ्यों के आधार पर विश्वसनीय सूचनाओं के प्रसार की सलाह भी राज्यों को दी गई है. अफवाह फैलाने वाले संगठनों और किसी व्यक्ति पर कानूनी प्रावधानों के तहत दंडात्मक कार्रवाई की जा सकती है.

अजय भल्ला ने इस बात पर भी जोर दिया कि देश में नेशनल रेगुलेटरी अथॉरिटी ने पाया है कि भारत के सीरम इंस्टीट्यूट द्वारा निर्मित और भारत बायोटेक लिमिटेड द्वारा विकसित और निर्मित किए गए दो टीके – कोविशिल्ड और कोवैक्सीन सुरक्षित और इम्युनोजेनिक हैं.

दरअसल, देशभर में कोरोना वैक्सीनेशन प्रोग्राम की शुरुआत हो चुकी है. वैक्सीनेशन के बाद कुछ लोगों की मौत को लेकर सोशल मीडिया पर कई तरह की अफवाह सामने आई है. हालांकि इन मौतों का टीकाकरण से कोई संबंध नहीं पाया गया है. इन अफवाहों में लोगों से वैक्सीनेशन न कराने और इससे जानलेवा खतरे जैसी बाते कही जा रही हैं.

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