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सऊदी अरब ने पाकिस्तान को दी ये नई टेंशन, अब समझो इमरान का खेल खत्म!

पाकिस्‍तान की इमरान सरकार के बुरे दिन चल रहे हैं. सऊदी अरब से पंगे लेना अब उसके लिए इतना भारी पड़ रहा है कि इमरान खान की सरकार खतरे में पड़ गई है. इमरान खान को इस बात का अंदाजा हो गया था कि सऊदी अरब के खिलाफ लामबंदी उन पर घातक साबित हो सकती है. तभी पाकिस्तानी आर्मी चीफ बाजवा क्राउन प्रिंस को मनाने सऊदी जा पहुंचे. क्राउन प्रिंस नें बाजवा से मिलना तो दूर उन्हे बिना कोई सम्मान दिये चलता कर दिया. बात इतने में भी सिमट जाती तो कोई बात नहीं थी लेकिन उसके बाद अब जो हो रहा है, उससे इमरान खान के तोतो उड़े हुए हैं. तो आइए जानते हैं कि पाकिस्तान की राजनीति में ऐसा क्या होने जा रहा है, जिससे इमरान खान की सरकार के लिए खतरा पैदा हो गया है.

सऊदी अरब के समर्थक खाड़ी के कई देश पूर्व आर्मी चीफ जनरल (सेवानिवृत्त) राहिल शरीफ को पाकिस्‍तान की राजनीति में उतरने के लिए मनाने में जुट गए हैं. राहील शरीफ पाकिस्‍तान के सबसे लोकप्रिय सेना प्रमुखों में से हैं और उनको पाकिस्‍तान में काफी सम्‍मान की नजर से देखा जाता है. विशेष बात ये है कि राहील शरीफ का सऊदी अरब से खास कनेक्शन है.

विश्‍लेषकों का मानना है कि अगर जनरल राहील शरीफ पाकिस्‍तान की राजनीति में कदम रखते हैं तो इमरान खान की कुर्सी जानी तय है. मीडिया रिपोर्ट्स में कहा जा रहा है कि पाकिस्‍तान के राजनयिक हलकों में ऐसी चर्चा है कि कई अरब देश पूर्व सेना प्रमुख जनरल राहील शरीफ को राजनीति में उतरने के लिए उत्‍साहित कर रहे हैं. इस रिपोर्ट के आने के बाद पाकिस्‍तानी सोशल मीडिया में अटकलों का बाजार गरम हो चुका है.

कुरैशी की धमकी के बाद इमरान सरकार फंसी
जनरल राहील शरीफ के नाम की चर्चा ऐसे समय पर हो रही है जब पाकिस्‍तानी पीएम इमरान खान और उनके आका सेना प्रमुख जनरल कमर जावेद बाजवा के बीच पिछले काफी समय से तनाव काफी बढ़ता जा रहा है. यही नहीं पिछले दिनों सेना प्रमुख बाजवा ने राहिल शरीफ से मुलाकात भी की थी. पाकिस्‍तानी मीडिया में आई खबरों के मुताबिक इमरान खान के लिए अब कुछ ही दिन बचे हुए हैं. इस तनाव के बीच पाकिस्‍तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने सऊदी अरब से पंगा ले लिया. उन्‍होंने सऊदी अरब और ओआईसी को धमकी दे डाली. इससे दोनों ही देशों के बीच संबंध और ज्‍यादा खराब हो गए.

कुरैशी की इसी धमकी और कतर तथा तुर्की से दोस्‍ती का असर था कि सऊदी अरब के प्रिंस मोहम्‍मद बिन सलमान ने पाकिस्‍तानी सेना प्रमुख कमर जावेद बाजवा से मिलने से इनकार कर दिया. बाजवा और आईएसआई चीफ को खाली हाथ सऊदी अरब से लौटना पड़ा. पाकिस्‍तानी न्‍यूज चैनल एआरवाई को दिए साक्षात्‍कार में कुरैशी ने धमकी देते हुए कहा था, ‘मैं एक बार फिर से पूरे सम्‍मान के साथ ओआईसी से कहना चाहता हूं कि विदेश मंत्रियों की परिषद की बैठक हमारी अपेक्षा है. यदि आप इसे बुला नहीं सकते हैं तो मैं प्रधानमंत्री इमरान खान से यह कहने के लिए बाध्‍य हो जाऊंगा कि वह ऐसे इस्‍लामिक देशों की बैठक बुलाएं जो कश्‍मीर के मुद्दे पर हमारे साथ खड़े होने के लिए तैयार हैं.’

जनरल राहिल शरीफ का सऊदी अरब कनेक्‍शन
पाकिस्‍तान की राजनीति में इस तेज हो रही हलचल के पीछे सबसे हाथ सऊदी अरब का है. सऊदी अरब ने जनरल (सेवानिवृत्त) राहील शरीफ के नेतृत्व में आतंकवाद के खिलाफ वर्ष 2017 में इस्लामी सैन्य गठबंधन बनाया है. यह गठबंधन हूती विद्रोहियों के खिलाफ जंग लड़ रहा है. इसके बदले में सऊदी अरब राहिल शरीफ को मोटा पैसा दे रहा है. अब पाकिस्‍तान की इमरान खान सरकार के तुर्की, मलेश‍िया और चीन से बढ़ती नजदीकी के बाद सऊदी अरब तथा उसके सहयोगी अन्‍य अरब देश इससे खफा है. माना जा रहा है कि इमरान खान सरकार को सबक सिखाने के लिए अरब देश राहिल शरीफ को राजनीति में उतारना चाहते हैं.

पाकिस्‍तान में बेहद लोकप्रिय हैं जनरल राहील शरीफ
वर्ष 2016 में सेना से रिटायर होने वाले जनरल राहील शरीफ पाकिस्‍तान में काफी लोकप्रिय हैं. जनरल राहील का पूरा परिवार पाकिस्‍तान में सम्‍मान की दृष्टि से देखा जाता है. राहील के पिता सेना में मेजर थे और उनके दिवंगत भाई मेजर शब्‍बीर शरीफ को पाकिस्‍तान का सर्वोच्‍च वीरता सम्‍मान मिला था. सेना प्रमुख का पद संभालते ही जनरल राहील शरीफ ने वजीरिस्‍तान में उग्रवादियों पर जोरदार हमला बोला था. इसके बाद उत्‍तरी पाकिस्‍तान में हमले काफी कम हो गए थे. इससे उनकी लोकप्रियता काफी बढ़ गई थी.

राहील शरीफ ने सत्‍ता पर कब्‍जा करने की बजाय सेवानिवृत्‍त होना बेहतर समझा इस वजह से भी पाकिस्‍तान में उन्‍हें काफी इज्‍जत की नजर से देखा जाता है. जब वह रिटायर हुए तब सड़कों से लेकर सोशल मीडिया तक में उन्‍हें फेयरवेल दिया गया था. वर्ष 2014 में उन्‍होंने आईएसआई चीफ जहिरुल इस्‍लाम के सरकार के खिलाफ एक विद्रोह को कुचल दिया था. माना जा रहा है कि अरब देश अब जनरल राहील शरीफ की इसी लोकप्रियता का फायदा उठाने के लिए उन्‍हें राजनीति में उतरने के लिए आगे आए हैं.

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