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सऊदी के शाह ने पाक को दिखाई औकात, भीख देना तो दूर.. आर्मी चीफ से मिले तक नहीं

पाकिस्तान का असली चेहरा सबके सामने आ चुका है. ये मुस्लिम देशों को इस्लामियत के नाम पर भारत के खिलाफ भड़काता आ रहा है. ऐसा नहीं कि इसकी शुरुआत इमरान सरकार के आने के बाद हुई हो बल्कि इसके पहले के भी हुक्मरान इसी तरह का काम करके हायतौबा मचाते आए हैं. वहीं भारत में भी मोदी सरकार से पहले की सरकारें मुस्लिम तुष्टीकरण के चलते इस मामले को दुनिया के सामने मजबूती से नहीं रखते थे लेकिन अब जबसे मोदी सरकार आई है, तो उसने देश का मान-सम्मान बरकरार रखने के लिए दुनिया के सामने अपनी बात मजबूती से रखी. नतीजा सामने है.

अब पाकिस्तान मजहब के नाम पर मुस्लिम देशों को भारत के खिलाफ नहीं भड़का पा रहा है. इसका सबसे बड़ा उदाहरण है जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 का हटाया जाना और उसके बाद पाकिस्तान की भारत के खिलाफ दूसरे देशों को लामबंद करने की तमाम कोशिशों का नाकाम होना. मोदी सरकार की विदेश नीति का ही कमाल है कि सऊदी अरब ने पाकिस्तान से सारे रिश्ते तोड़ लिए हैं. अब पाकिस्तान पूरी कोशिश में लगा हुआ है कि किसी तरह से दोबारा सऊदी से रिश्ते जुड़ जाएं लेकिन ऐसा नहीं हो पा रहा है. इस कड़ी में सऊदी अरब को मनाने रियाद पाकिस्तान आर्मी चीफ जनरल कमर जावेद बाजवा पहुंचे थे और क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान से मिलने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा दिया लेकिन सऊदी क्राउन प्रिंस ने दो टूक लहजे में पाक आर्मी चीफ से मिलने से इनकार कर दिया. अब बाजवा बेज्जत होकर वापस पाकिस्तान लौट आए हैं.

सऊदी ने बाजवा को सम्मानित करने से किया मना
इतना ही नहीं, सऊदी ने पहले पाकिस्तानी सेना प्रमुख जनरल बाजवा को सम्मानित करने का ऐलान किया था. रियाद प्रशासन ने उसे भी कैंसल कर दिया. थक हारकर जनरल बाजवा सऊदी अरब के सेना प्रमुख फय्यद बिन हामिद अल-रूवैली से मुलाकात की. इस दौरान उन्होंने सऊदी अरब को और अधिक सैन्य मदद देने की इच्छा भी जाहिर की.

इसलिए टूटे दोनों देशों के रिश्ते
दरअसल सऊदी अरब पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी के बयानों को लेकर गुस्सा है. कुरैशी ने कश्मीर मामले को लेकर सऊदी अरब के रुख की सार्वजनिक निंदा की थी. उन्होंने सऊदी को धमकी देते हुए कश्मीर पर अकेले बैठक बुलाने का ऐलान भी किया था. इसी से तमतमाए सऊदी ने पाकिस्तान को दी जाने वाली 6.2 बिलियन डॉलर की फाइनेंशियल डील को रद्द कर दिया और उधार तेल-गैस देने पर भी रोक लगा दी. माना जा रहा है कि इस मामले को लेकर कुरैशी की कुर्सी भी जा सकती है.

पाकिस्तान में भी कुरैशी के बयान की सार्वजनिक निंदा की जा रही है. नौबत यहां तक आ गई है कि कुरैशी को मीडिया से भागना पड़ रहा है. वहीं, पाकिस्‍तानी विदेश मंत्रालय ने कुरैशी के बयान पर सफाई देते हुए कहा कि उनका बयान देश के लोगों की ओआईसी से कश्‍मीर के मुद्दे को अंतरराष्‍ट्रीय स्‍तर पर उठाने की इच्‍छा और आकांक्षा को दर्शाता है. पाकिस्‍तानी व‍िदेश मंत्रालय की प्रवक्‍ता आइशा फारुकी ने कहा कि देश के लोगों की ओआईसी से काफी अपेक्षा है. वे चाहते हैं कि ओआईसी कश्‍मीर के मुद्दे को दुनियाभर में उठाए. उन्‍होंने कहा कि इस संबंध में हमारा प्रयास आगे भी जारी रहेगा.

सऊदी को क्या कहा था कुरैशी ने
कुरैशी ने कहा था कि सऊदी OIC को (ऑर्गनाइजेशन ऑफ इस्लामिक कोऑपरेशन) में जम्मू-कश्मीर के मुद्दे पर भारत के खिलाफ खड़ा नहीं होने दे रहा है. कुरैशी ने कहा था कि ओआईसी कश्‍मीर पर अपने विदेश मंत्रियों की परिषद की बैठक बुलाने में हीलाहवाली बंद करे. पाकिस्‍तान कश्‍मीर से अनुच्‍छेद 370 के खात्‍मे के बाद से ही 57 मुस्लिम देशों के संगठन ओआईसी के विदेश मंत्रियों की बैठक बुलाने के लिए लगातार सऊदी अरब पर दबाव डाल रहा है. एक अन्‍य सवाल के जवाब में कुरैशी ने कहा कि पाकिस्‍तान और ज्‍यादा इंतजार नहीं कर सकता है.

माना जा रहा है कश्मीर पर अंतरराष्ट्रीय समर्थन नहीं मिलने से कुंठित कुरैशी ने यह बयान दिया था. यह भी कहा जा रहा है कि देश में कड़ी पकड़ रखने वाली सेना के कहने पर उन्हें यह बयान दिया, खासकर इसलिए ताकि सऊदी के रुख को भांपा जा सके. इसके अलावा इस्लामाबाद में यह खबरें भी हैं कि वह खुद को पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान के बराबर का दिखाना चाहते हैं.

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