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सड़क से लेकर फैल्कन सिस्टम तक.. लद्दाख में ऐसा जाल बिछाए मोदी.. अब चोंच तक नहीं घुसा सकता चीन

गलवान घाटी की हिंसा के बाद इतना तय हो गया है कि, आने वाले समय में लद्दाख और एलएसी पर भी एलओसी की तरह ही तनाव जारी रहेगा। ऐसे में भारत सरकार ने निर्णय लिया है कि, वह हर प्रकार के द्विपक्षीय संघर्ष के लिए हमेशा तैयार रहेगी। साथ ही भारत सरकार की तैयारी है कि, एलएसी तक रोड कनेक्टिविटी बढ़ाई जाए जिससे भविष्य में चीन के साथ किसी स्टैंडऑफ की स्थिति में सैन्य जमावड़े को तत्काल सीमा पर बढ़ाया जा सके।

अब भारत ने निर्णय लिया है कि वह इजराइल में निर्मित 2 फैल्कन एयरबोर्न वार्निंग एंड कंट्रोल सिस्टम (AEW&C) खरीदेगा। AEW&C का उपयोग हवा, समुद्र और जमीन पर मौजूद टारगेट को ट्रैक करने के लिए किया जाता है। यह सिस्टम विरोधी सेना की सैन्य तैयारियों, जैसे उनके एयरक्राफ्ट, logistics या सैन्य जमावड़े किस स्थिति में है उसे पता करके बैटल मैनेजमेंट में मदद करता है। अभी भारत इजराइल में ही निर्मित 360 डिग्री घूमने वाले AEW&C एयर सपोर्ट सिस्टम का इस्तेमाल कर रहा है जबकि 240 डिग्री घूमने वाले डीआरडीओ द्वारा निर्मित ऐसे दो और सिस्टम का भी भारतीय सेना द्वारा इस्तेमाल किया जा रहा है।

बता दें कि, चीन के पास ऐसे 28 जबकि पाकिस्तान के पास स्वीडन में निर्मित ऐसे 7 एयरबोर्न वार्निंग एंड कंट्रोल सिस्टम मौजूद हैं। इस सिस्टम की मौजूदगी ना होने के कारण ही बालाकोट एयर स्ट्राइक के बाद जब पाकिस्तानी विमान भारतीय सीमा में घुसे थे तो उन्हें ट्रैक करने में भारतीय एयरक्राफ्ट को दिक्कत महसूस हुई थी। लेकिन मोदी सरकार द्वारा इस समझौते को सफलतापूर्वक कर लेने के बाद भारत Two Front War जैसी स्थिति में भी सुरक्षित रहेगा। भविष्य में गलवान घाटी जैसे किसी स्टैंड ऑफ में यह सिस्टम पहले ही भारतीय सेनाओं को इस बात की सूचना दे देगा कि, चीनी सेना की तैयारियां कैसी हैं।

1 बिलियन डॉलर की रकम यह सिस्टम खरीदने में तथा अन्य 1 बिलियन डॉलर को रूस से A50 एयरक्राफ्ट खरीदने में इस्तेमाल किया जाएगा, जिसके साथ इस सिस्टम को अटैच किया जाएगा।

वहीं भारत सरकार की तैयारी हिमाचल प्रदेश से लद्दाख तक नई रोड बनाने की भी है। इस सड़क की मदद से हिमाचल और लद्दाख के पहाड़ी इलाकों में 12 महीने रोड कनेक्टिविटी बनी रहेगी। अभी हिमाचल प्रदेश से लेह तक पहुंचने के लिए केवल एक ही सड़क है जो सर्दियों के मौसम में बर्फ गिरने के कारण बंद हो जाती है। इसीलिए भारत सरकार ने यह फैसला किया है कि, हिमाचल के दारसा से लेह तक 290 किलोमीटर लंबी सड़क बनाई जाएगी। यह रोड कारगिल और लद्दाख सेक्टर में ट्रूप्स को पहुंचाने तथा भारी टैंक और आर्टिलरी को डिप्लॉय करने में बेहद सहायक होगी।

बता दें कि, 2014 के पहले भारत सरकार की आधिकारिक योजना यह होती थी कि चीन से सटे इलाकों में रोड कनेक्टिविटी को कम से कम रखा जाए जिससे किसी संघर्ष की स्थिति में चीन की सेनाओं को भारत के अंदरूनी इलाकों में पहुंचने में कठिनाई हो। लेकिन 2014 के बाद मोदी सरकार ने इस रक्षात्मक नीति में बदलाव किया और चीन से सटी सीमा पर तेजी से रोड कनेक्टिविटी बढ़ाई गई। इस वक्त लद्दाख में तीन महत्वपूर्ण सड़कें हैं। यह लेह को मनाली और श्रीनगर से जोड़ती हैं। इसके अतिरिक्त दौलत बेग ओल्डी के लिए बनने वाली सड़क भी पूरी हो चुकी है और इसे दर्बुक से श्योक तक बढ़ाने का कार्य भी इस साल के अंत तक पूरा हो जाएगा।

जिस प्रकार से मोदी सरकार चीन के खिलाफ आर्थिक मोर्चे पर लड़ाई लड़ रही है और कूटनीतिक स्तर पर चीन विरोधी धड़े का निर्माण कर रही है उससे यह साफ जाहिर होता है कि आने वाले समय में चीन और भारत के संबंध जल्दी नहीं सुधरने वाले। ऐसी स्थिति में भारत सरकार किसी भी संघर्ष के लिए तैयार रहना चाहती है। यही कारण है कि भारत ने अपनी सैन्य तैयारियां तेज़ कर दी हैं।

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