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सरकार के लिए चीन-पाकिस्तान में अब कोई फर्क नहीं, भारत में घुसना भी होगा मुश्किल

आज की स्थिति में भारत के लिए बड़ा दुश्मन कौन है? चीन या पाकिस्तान? हाल ही में भारत सरकार द्वारा लिए गए एक फैसले से अब यह साफ हो चुका है कि भारत सरकार ने अब इन दोनों देशों को एक ही श्रेणी में रखने का फैसला लिया है। दरअसल, भारत के विदेश मंत्रालय ने अब चीनी नागरिकों के लिए भी वही वीज़ा पॉलिसी अपनाने का फैसला लिया है, जो वीज़ा पॉलिसी भारत पाकिस्तान के लिए अपनाता है। इसके तहत चीनी थिंक टैंक, व्यापारिक मंचों और वकालत जैसे रणनीतिक क्षेत्रों से जुड़े किसी भी चीनी नागरिक को भारतीय वीज़ा प्राप्त करने से पहले स्क्रीनिंग और सेक्यूरिटी क्लियरेंस की प्रक्रिया से गुजरना होगा। ऐसे में भारत में अब चीनी नागरिकों का प्रवेश बेहद मुश्किल होने वाला है। स्पष्ट है कि, अब केंद्र सरकार भारत-चीन विवाद के कारण “People to People ties” पर हथोड़ा चलाने वाली है।

Media Reports और विदेश मंत्रालय को मिले एक नोट के मुताबिक, चीन ने भारत के रणनीतिक क्षेत्रों से जुड़े लोगों और संस्थाओं जैसे राजनेताओं, अधिकारियों, व्यवसायों और शैक्षणिक संस्थानों में अपना प्रभाव बढ़ाने के लिए एक योजना को तैयार की है। इसके तहत चीन भारत में अपने खास लोगों को भेजकर यहाँ अपना प्रभुत्व बढ़ाने की कोशिश करेगा। विदेश मंत्रालय ने इनके लिए अलग से “Entities of Concern” नामक श्रेणी बनाई है। आसान भाषा में कहा जाए, तो अगर अब कोई भी चीनी नागरिक Entities of Concern से जुड़ा होगा और वह भारत के वीज़ा के लिए आवेदन करेगा, तो उसे पहले पूरी जांच से गुजरना होगा। यह जांच केवल नई दिल्ली में ही की जाएगी।

इस वर्ष मई से ही भारत-चीन के बीच बॉर्डर विवाद चल रहा है, जिसके बाद भारत सरकार ने कई क्षेत्रों में चीन के खिलाफ आर्थिक युद्ध छेड़ा हुआ है। अब लगता है कि, चीन के सांस्कृतिक संबंध भी भारत सरकार के निशाने पर आ गए हैं। हाल ही में जारी की गयी नई शिक्षा नीति से “चीनी भाषा” को बाहर कर दिया गया है। इसी के साथ, सरकार देश के कॉलेजों में कन्फ्यूशियस इंस्टीट्यूट्स के तहत चीनी संस्कृति को बढ़ावा देने वाले कार्यक्रमों पर पुनर्विचार करने का फैसला भी ले चुकी है। बता दें कि, कन्फ्यूशियस इंस्टीट्यूट्स को सीधे चीनी गणराज्य और चीनी संस्कृति को बढ़ावा देने के उद्देश्य से पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना के शिक्षा मंत्रालय द्वारा वित्त पोषित किया जाता है। हालांकि, दुनियाभर में चीन पर इन कन्फ्यूशियस इंस्टीट्यूट्स के जरिये जासूसी को बढ़ावा देने के आरोप भी लग चुके हैं। साथ ही साथ देश के शिक्षा मंत्रालय ने आईआईटी, बीएचयू, जेएनयू और एनआईटी जैसे प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थानों और चीनी संस्थानों के बीच हुए 54 समझौतों (एमओयू) की समीक्षा करने की भी योजना बनाई है।

भारत सरकार के इन फैसलों से साफ हो गया है कि, भारत अब चीन को भी पाकिस्तान जितने बड़े खतरे के तौर पर देखता है। हाल ही की घटनाओं से साफ हो गया है कि, चीन ना सिर्फ बॉर्डर पर भारत के खिलाफ आक्रामकता दिखाता है, बल्कि भारत के अंदर अपने जासूसों को भेजकर भारत से खूफिया सूचना जुटाता है, जो कि भारत की आंतरिक सुरक्षा के साथ समझौता है! भारत के आयकर विभाग ने हाल ही में यह शक जताया था कि, चीन का एक नागरिक चार्ली पेंग उर्फ लुओ सांग, तिब्बती बौद्ध धर्मगुरु दलाई लामा की जासूसी कर रहा था। आईटी डिपार्टमेंट को पता चला है कि, पेंग दिल्ली में कुछ निर्वासित तिब्बतियों को रिश्वत दे रहा था। बताया गया है कि आरोपी ने दिल्ली की तिब्बती रिफ्यूजी कॉलोनी के नजदीक मजनू का टीला में कुछ लोगों को 2 से 3 लाख रुपए कैश भी दिया था।

भारत सरकार अब चीन के साथ किसी भी प्रकार का संबंध कायम रखने के पक्ष में नहीं दिखाई देती। मोदी सरकार ने अपने पहले कार्यकाल में संबंध की बेहतरी के लिए चीन को कई मौके दिये। Wuhan Informal Summit और चेन्नई में मुलाक़ात के जरिये पीएम मोदी ने चीन को अपनी हरकतों से बाज़ आने के पूरे अवसर भी प्रदान किए। हालांकि, गलवान में भारतीय सैनिकों पर चीन के कायरतापूर्ण हमले ने भारत सरकार के रुख को हमेशा के लिए बदल दिया है। भारत ने अब आधिकारिक तौर पर चीन को अपनी Hit list में डाल दिया है।

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