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सावधान ! चीन की वैक्सीन यानि मौत की गारंटी, कोरोना तो बख्श सकता है लेकिन ये नहीं!

क्या आपको पता है कि चीन के वुहान से निकले वायरस से भी खतरनाक क्या है? चाइनीज वैक्सीन। अब यहाँ ये सवाल उठाता है कि ऐसा कैसे? आपको बता दें कि चीनी वैक्सीन व्यक्ति को ठीक करने के बजाए उनके कंठ से आवाज छीन सकता है, उन्हें लकवा ग्रसित कर सकता है या फिर व्यक्ति को अर्ध-मृत अवस्था में भी पहुंचा सकती है। दुर्भाग्य की बात तो यह है कि आज चीन ही कोरोना वायरस के वैक्सीन बनाने की दौड़ में रेस कर रहा है।

आज चीनी कंपनियों द्वारा निर्मित लगभग पाँच वैक्सीन परीक्षण के दौर में हैं। इन कंपनियों में से एक कंपनी Sinovac Biotech Ltd है जो यह दावा कर रही है कि आने वाले शरद ऋतु तक वह वैक्सीन बना लेगी। Sinovac Biotech Ltd. में Investor Relations के वरिष्ठ निदेशक Helen Yang ने बताया है कि यह वैक्सीन पशुओं पर (बंदरों) पर असर कर रहा है।

परंतु यहां मामला इतना भी सामान्य नहीं है जितना दिखाई दे रहा है। चीन की वैक्सीन इंडस्ट्री किसी स्कैम से कम नहीं है और यहां लगातार फ्रॉड की खबरें आती रहती हैं। वर्ष 2013 से 2016 तक 21 नवजात बच्चों की मौत हुई थी और इन सभी का कारण वैक्सीन स्कैंडल ही था। यहाँ 21 संख्या चीन की आधिकारिक संख्या है, और चीन के अपारदर्शी तंत्र से यह अंदाजा लगाया जा सकता है कि मौत की संख्या 21 से कई गुना अधिक होगा।

इसी तरह नवंबर 2017 में भी एक भयंकर घोटाला हुआ, जब चांगसेंग और वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ बायोलॉजिकल प्रोडक्ट्स ने 652,000 से अधिक अप्रभावी DPT (डिप्थीरिया, खांसी, और टेटनस) वैक्सीन को जिलिन और हुबेई प्रांतों में बेच दिया।

बता दें कि वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ बायोलॉजिकल प्रोडक्ट्स, चीनी सरकार द्वारा संचालित Sinopharm Group की है। यही कंपनी कोरोना के किए वैक्सीन विकसित करने वाली चीनी कंपनियों में से एक होता है। इससे यह स्पष्ट पता चलता है कि चीन विश्व के लोगों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ करने का एक भी मौका नहीं छोड़ता है।

चीन की वैक्सीन इंडस्ट्री अनुसंधान तथा लोगों का स्वस्थ्य सुनिश्चित करने की बजाय वैक्सीन के अधिक से अधिक बिक्री पर ही ध्यान देता है जिससे लोगों के स्वस्थ्य पर खतरा मंडराने लगता है। वास्तव में जब वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ बायोलॉजिकल प्रोडक्ट्स जैसे चीनी सरकार के स्वामित्व वाली कंपनियों की बात होती है तो मामले को दबा दिया जाता है।

चीन के वैक्सीन उद्योग का 40 फीसदी चीन की सरकार के कब्जे या स्वामित्व वाली कंपनियों के हाथों में है, जो जानते हैं कि नियम बनाने वाले अधिकारी उन पर कोई कार्रवाई नहीं कर सकते चाहे वे कितनी भी घटिया वैक्सीन क्यों न बेचें। चीन की सरकार का सिर्फ एक ही मकसद है और वह है पैसे कमाना चाहे उससे लोगों का जितना भी नुकसान हो, उन्हें फर्क नहीं पड़ता। CCP ऐसी कंपनियों को दंड देने के बजाए प्रोत्साहित करती है और उन्हें पुरस्कार देती है।

चीन में सबसे नया वैक्सीन स्कैन्डल वर्ष 2019 में हुआ था जो पोलियो के वैक्सीन के लिए किया गया था। यह घोटाला पूर्वी चीन के Jiangsu प्रांत के Jinhu काउंटी में हुआ था। इस दौरान 145 बच्चों को पोलियो की expired दवा पिलाई गई थी। इस मामले में भी संख्या बीजिंग का आधिकारिक बयान है जो अविश्वसनीय है। वास्तविक संख्या इससे कई गुना अधिक हो सकती है।

हैरानी की बात तो ये है कि बाद में यह बात भी सामने आई कि Jinhu के 20,000 बच्चों के माता-पिता ने पाया कि केवल पोलियो के वैक्सीन ही नहीं, बल्कि डीपीटी, हेपेटाइटिस बी और varicella के वैक्सीन भी नकली थे।

यह अनुमान लगाना भी मुश्किल है कि आखिर कितने बच्चों को चीन ने अपने नकली वैक्सीन से मार डाला है। चीन में इस तरह के स्कैम का खुलासा करने वालों को गायब ही करवा दिया जाता है जिसका पता उनके परिवार वालों को भी नहीं चलता है। 2019 में हुए पोलियो स्कैम के दौरान प्रदर्शन करने वाले माता-पिता को भी बंदी बना लिया गया था, साथ ही सोशल मीडिया से इन स्कैम का नामो-निशान मिटा दिया गया था।

अब चीन कोरोना वायरस के लिए भी पूरे विश्व में वैक्सीन बेचना चाहता है। यही नहीं WHO भी उसके कब्जे में ही है जो चीन के निम्न स्तर के वैक्सीन का समर्थन करेगा। WHO की मुख्य वैज्ञानिक सौम्या स्वामीनाथन ने खुलासा किया है कि संयुक्त राष्ट्र की यह एजेंसी Sinovac सहित कई चीनी निर्माताओं के साथ संभावित वैक्सीनों के संबंध में बातचीत कर रही है।

यह पूरे विश्व के लिए किसी दोहरे झटके से कम नहीं होगा क्योंकि WHO ने पहले चीन को वुहान वायरस फैलाने में मदद की, और अब यह चीन को हानिकारक, दोषपूर्ण वैक्सीन बेचने में मदद कर सकता है। वुहान वायरस के कारण लगभग 5 लाख लोग पहले ही मर चुके हैं और अब चीनी वैक्सीनों के कारण और कई लाख लोग मर सकते हैं।

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