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स्पेशल रिपोर्ट : कोरोना वायरस की शिकार क्यों बन रही है युवा आबादी?

पिछले कुछ समय से दुनियाभर में जवान लोग तेजी से कोरोना वायरस की चपेट में आ रहे हैं। अलग-अलग देशों द्वारा लॉकडाउन और दूसरी पाबंदियां हटाने के बाद संक्रमण पूरी रफ्तार से फैल रहा है और कई जगहों पर कलस्टर बन रहे हैं। इसी बीच युवा आबादी भी इस वायरस की शिकार बन रही है, जिसके बारे में पहले कहा जा रहा था कि इसे वायरस से खास खतरा नहीं है। आइये, जानते हैं कि आखिर इसकी वजह क्या है।

फरवरी से जुलाई के बीच कोरोना वायरस से संक्रमित होने वाले 5-24 साल के लोगों के अनुपात में काफी बढ़ोतरी देखी गई है। इसके लिए अलग-अलग देशों के 60 लाख मामलों का विश्लेषण किया गया है। इसमें एक तिहाई मामले अमेरिका के थे।

ऐसे बढता गया संक्रमितों में युवाओं का अनुपात

विश्लेषण में पता चला की फरवरी से जुलाई आते-आते कोरोना संक्रमित होने वाले 5-14 साल के बच्चों का अनुपात 0.8 प्रतिशत से बढ़कर 4.6 प्रतिशत पहुंच गया। इसी तरह 15-24 साल के युवाओं में संक्रमण का अनुपात 4.5 प्रतिशत से बढ़कर 15 प्रतिशत हो गया था। विशेषज्ञों ने इसे लेकर चिंता व्यक्त की है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की कोरोना वायरस पर तकनीकी प्रमुख मारिया वेन केरखोव ने कहा कि महामारी का युवाओं की तरफ शिफ्ट होना चिंताजनक है।

“बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकते हैं संक्रमित युवा”

अल जजीरा से बात करते हुए मारिया ने कहा, “युवा लोगों में कम या बिल्कुल लक्षण नहीं होते हैं, जो उनके लिए अच्छा है, लेकिन उनमें से अधिकतर बुजुर्ग या कमजोर लोगों के साथ रहते हैं। अगर ज्यादा युवा लोग संक्रमित होंगे तो डर है कि वे दूसरों को भी संक्रमित कर सकते हैं। ये दूसरे लोग बुजुर्ग या किसी दूसरी बीमारियों से पीड़ित हो सकते हैं और हम जानते हैं कि ऐसे लोगों के लिए यह बड़ा खतरा होगा।”

युवाओं में संक्रमण फैलने की वजह क्या है?

युवाओं में संक्रमण बढ़ने के कारणों के बारे में बात करते हुए मारिया ने कहा कि कई हफ्तों के बाद लॉकडाउन और दूसरे प्रतिबंध हटे हैं इसलिए लोग अपने सामान्य रूटीन की तरफ लौट रहे हैं। उन्होंने कहा कि समाज फिर से खुल रहे हैं। अब ज्यादा लोग बाहर जा रहे हैं। वो काम पर जा रहे हैं, कार्यक्रमों में शामिल हो रहे हैं। इस वजह से युवा इस खतरनाक कोरोना वायरस की चपेट में आ रहे हैं।

बढ़ते संक्रमण की एक वजह यह भी

इसके अलावा वो जांच और निगरानी की नीति में आए बदलाव को भी इसकी एक वजह मानती हैं। कोरोना वायरस समेत किसी भी नई बीमारी की शुरुआत में पूरा ध्यान गंभीर मामलों पर रहता है और ऐसे ही मामलों के टेस्ट और इलाज को प्राथमिकता दी जाती है। चूंकि कोरोना वायरस को काफी समय बीत गया है इसलिए लगभग सभी देशों ने टेस्टिंग बढ़ाई है और वो गंभीर मामलों के अलावा बाकियों पर भी ध्यान दे रहे हैं।

कोरोना की चपेट से सुरक्षित नहीं है युवा आबादी

भले ही बुजुर्ग या लंबे समय से बीमारियों से पीड़ित लोगों को कोरोना वायरस से ज्यादा खतरा माना जा रहा है, लेकिन विश्व स्वास्थ्य संगठन ने बार-बार दोहराया है कि युवा आबादी भी इससे पूरी तरह सुरक्षित नहीं है। बीते महीने संगठन के प्रमुख ने कहा कि कुछ देशों में फिर से बढ़े संक्रमण के मामलों के पीछे युवाओं का हाथ है क्योंकि वो संक्रमण से बचाव के लिए बरती जाने वाली सावधानियों में लापरवाही कर रहे हैं।

युवाओं को क्या करना चाहिए?

मारिया कहती हैं कि महामारी को नियंत्रण में करने के लिए युवाओं का अपने कामों, बातों और नेतृत्व का योगदान बहुत जरूरी है। वो कहती हैं कि सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करने, बार-बार हाथ धोने, मास्क लगाने और बाहर जाने से पहले खतरे का अंदाजा लगाने जैसी सावधानियां बहुत जरूरी हैं। युवाओं को भीड़भाड़ वाले स्थानों के साथ-साथ बंद स्थानों पर जाने और संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आनेे से बचना चाहिए। दुनिया में क्या है संक्रमण की स्थिति?

जॉन्स हॉपकिन्स यूनिवर्सिटी के मुताबिक, दुनियाभर में अब तक 2.50 करोड़ लोग कोरोना वायरस से संक्रमित हो चुके हैं और 8.43 लाख लोगों की मौत हुई है।  सबसे अधिक प्रभावित अमेरिका में लगभग 59.62 लाख लोग संक्रमित हुए हैं और 1.83 लाख लोगों की मौत हुई है। वहीं ब्राजील में 38.46 लाख संक्रमितों में से 1.20 लाख मरीजों की मौत हुई है। भारत संक्रमितों की संख्या के मामले में तीसरे और मौतों के मामले में चौथे स्थान पर है।

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