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हाथरस गैंगरेपः यूपी सरकार को NHRC का नोटिस, पुलिस की कार्रवाई पर उठाए सवाल

हाथरस में 19 साल की एक युवती के साथ गैंगरेप होने के बाद, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक को नोटिस जारी किया है।गौरतलब है कि 14 सितंबर को उत्तर प्रदेश के हाथरस जिले के चंदपा थाना क्षेत्र स्थित गांव में एक युवती के साथ सामूहिक दुष्कर्म की वारदात हुई थी जिसके बाद मंगलवार को उसकी दिल्ली के सफ़दरजंग अस्पताल में मौत हो गई। पुलिस ने चार आरोपियों – संदीप, रामू, लवकुश और रवि को ‘हत्या के प्रयास’ और ‘सामूहिक बलात्कार’ के आरोप में गिरफ्तार किया है।

आयोग ने नोटिस में राज्य सरकार को मृत पीड़िता के परिवार को गवाह संरक्षण के हिस्से के रूप में पर्याप्त सुरक्षा देने के लिए कहा है और चिंता जताई है कि उन्हें दूसरे समुदाय से खतरा हो सकता है।

NHRC ने कहा- “यूपी के डीजीपी से व्यक्तिगत रूप से मामले को देखने की उम्मीद की जाती है ताकि बिना किसी देरी के जल्द से जल्द दोषियों को सजा मिल सके। वर्तमान परिदृश्य में, ये जरूरी है कि मृत पीड़िता के परिवार और गांव में रहने वाले एससी समुदाय के बाकि लोगों को पुलिस द्वारा पर्याप्त सुरक्षा दी जाए। दोनों अधिकारियों से उम्मीद की जाती है कि वे निर्धारित समय के अंदर अपनी रिपोर्ट देंगे।”

साथ ही आयोग ने कहा कि उसने घटना के बारे में ‘बहुत दर्दनाक’ मीडिया रिपोर्ट पढ़ी हैं और कहा है कि “यह स्पष्ट है कि यूपी पुलिस पीड़ित लड़की का पता लगाने और उसे बचाने के लिए समय पर कार्रवाई नहीं कर पाई जिसकी वजह से युवती को घोर क्रूरता का शिकार होने से बचाया नहीं जा सका। जिस तरह से अपराधियों ने काम किया है, उससे पता चलता है कि उनके मन में कानून का कोई डर नहीं था।”

इसके साथ ही आयोग ने पीड़िता के परिवार द्वारा पुलिस पर ‘जबरन अंतिम संस्कार’ का आरोप लगाने पर भी अपने नोटिस में बात की है।

उसने कहा-“उत्तर प्रदेश राज्य में ऐसी कई घटनाएं घटी हैं जहां अनुसूचित समुदाय के सदस्यों के साथ ऊंची जाति के लोगों द्वारा भेदभाव और उत्पीड़न किया गया है। पुलिस अधिकारियों के खिलाफ निष्क्रियता के आरोप लगने के कई उदाहरण सामने आए हैं। यह मानवाधिकारों के उल्लंघन का एक गंभीर मुद्दा है।” आयोग ने राज्य प्रशासन से चार हफ्तों के अंदर जवाब मांगा है।”

बता दें कि मृत पीड़िता के परिवार ने आरोप लगाया है कि ‘पुलिस ने उनकी सहमति के बिना ही आधी रात को उनके शव का अंतिम संस्कार कर दिया।’ गांववालों ने भी दावा किया कि ‘परिवार को अपने घर से निकलने नहीं दिया गया और पुलिस ने किसी को भी एंबुलेंस और चिता के पास नहीं आने दिया।’ हालांकि, पुलिस ने इन आरोपों को खारिज कर दिया है। एडीजी प्रशांत कुमार ने कहा कि ‘अंतिम संस्कार परिवार की अनुमति और मौजूदगी के साथ किया गया था क्योंकि शव खराब हो रहा था।’

मामले के लिए SIT का गठन

उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को कहा कि हाथरस गैंगरेप की घटना की जांच के लिए तीन सदस्यीय SIT का गठन किया गया है। सीएम ने कहा कि टीम 7 दिनों के भीतर एक रिपोर्ट सौंपेगी और उन्होंने मामले की सुनवाई फास्ट-ट्रैक अदालत में कराने का भी निर्देश दिया है।

मुख्यमंत्री द्वारा गठित SIT में गृह सचिव भगवान स्वरूप, डीआईजी चंद्र प्रकाश और कमांडेंट पीएसी आगरा और पूनम सदस्य होंगे। पैनल में महिला सदस्यों के साथ दलित समुदाय के सदस्य भी शामिल होंगे। सीएम ने मामले में पीएम नरेंद्र मोदी से भी बात की है। पीएम मोदी ने कहा है कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।

पीड़ित परिवार को 25 लाख रुपये की आर्थिक मदद, कनिष्ठ सहायक के पद पर परिवार के एक सदस्य को नौकरी और हाथरस शहर में एक घर दिया जाएगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मृत पीड़िता के परिजनों के साथ बुधवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बात की। इस दौरान सीएम योगी ने परिवार को हर संभव मदद का भरोसा दिया।

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