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हाथरस में गैंगरेप: रीढ़ की हड्डी तोड़ी और काट दी जुबान, 15 दिन इशारे से बात की वो बेटी और अब मौत से गई हार

हाथरस :  यूपी के हाथरस में गैंगरेप की शिकार हुई बेटी की 15 दिन बाद दिल्ली के एम्स में मौत हो गई। बच्ची के साथ हैवानियत का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि दबंगों ने बारी-बारी से उसे अपनी हवस का शिकार बनाया। बेटी अपनी जुबान न खोल पाए इसलिए उसकी जुबान काट दी। चलकर अपने घर तक न जाए तो उसके रीढ़ की हड्डी तोड़ दी। इतनी हैवानियत के बाद भी वह आखिरी सांस तक जिंदगी के लिए जंग लड़ती रही। इस मामले में पुलिस पर भी लापरवाही का आरोप लगा है। सियासत तेज होने पर पुलिस ऐक्शन में आई।

गैंगरेप की घटना के बाद अस्पताल में भर्ती बेटी को 9 दिन बाद होश आया। होश में आने के बाद उसकी कटी जुबान से वह कुछ बोल न सकी। इशारों में अपने साथ हुई दरिंदगी बयां की। बयान लेने पहुंचे सीओ ने बेटी के बयान को दो पन्नों में लिखा।

गैंगरेप के बाद काटी थी जीभ
बता दें कि यूपी के हाथरस के थाना चंदपा इलाके के गांव में 14 सितंबर को एक 19 साल की दलित युवती के साथ गांव के रहने वाले चार दबंग युवकों पर गैंगरेप का आरोप था। पीड़िता के साथ हैवानियत की गई थी। पुलिस के अनुसार, रेप के बाद उसकी जीभ भी काट दी गई थी। जिसके बाद पीड़िता को अलीगढ़ के जेएन मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया था।

आरोपियों की पहचान हुई

आरोपियों की पहचान गांव के ही रहने वाले संदीप, लवकुश, रामू और रवि के रूप में हुई थी। हाथरस पुलिस अधीक्षक ने बताया कि संदीप को 14 सितंबर को ही गिरफ्तार कर लिया गया था। घटना के कई दिन बीत जाने के बाद पुलिस ने रामू और लवकुश को गिरफ्तार किया। वहीं फरार चल रहे चौथे आरोपी रवि को 26 सितंबर को पुलिस ने गिरफ्तार करते हुए जेल भेज दिया था।

पुलिस पर लापरवाही का आरोप
हाथरस के थाना चंदपा इलाके के गांव में 14 सितंबर को चार दबंग युवकों ने 19 साल की दलित लड़की के साथ बाजरे के खेत में गैंगरेप किया था। इस मामले में पुलिस ने लापरवाही भरा रवैया अपनाया। रेप की धाराओं में केस ना दर्ज करते हुए छेड़खानी के आरोप में एक युवक को हिरासत में लिया। इसके बाद उसके खिलाफ धारा 307 (हत्या की कोशिश) में मुकदमा दर्ज किया गया था।

घटना के 9 दिन बीत जाने के बाद पीड़िता होश में आई तो अपने साथ हुई आपबीती अपने परिजनों को बताई। बेटी की आपबीती सुनकर हर कोई दहल गया। बात बाहर आई तो सियासत तेज हुई। भीम आर्मी से लेकर बहुजन समाज पार्टी की मुखिया मायावती ने सरकार को निशाने पर लिया।

14 सितंबर को हुआ क्या था?

परिवार के मुताबिक, 14 सितंबर को सुबह-सुबह पीड़िता, उसका बड़ा भाई और मां गांव के जंगल में घास काटने गए थे। जब घास की एक गठरी बंध गई तो बड़ा भाई उसे लेकर घर चला आया। मां और बेटी खेत में अकेले रह गए। मां आगे घास काट रही थी। बेटी पीछे कुछ दूर उसे इकट्ठा कर रही थी। इसी दौरान चारों अभियुक्तों ने पीड़िता के गले में पड़े दुपट्टे से उसे बाजरे के खेत में खींच कर उसके साथ गैंगरेप किया।

उस दिन की घटना के बारे में पीड़िता का भाई बताता है, ‘मां ने बहन को आवाजें दी तो उसका कोई जवाब नहीं आया। पहले उन्हें पानी देने के लिए बनाई गई मेढ़ में उसके चप्पल दिखे, फिर बाजरे के टूटे पौधे दिखे तो वो खेत में अंदर गईं जहां बीस मीटर भीतर वो बहुत ही बुरी हालत में बेहोश पड़ी हुई थी। मां चिल्लाई तो कुछ बच्चे आए, उन्होंने उन्हें तुरंत लोगों को बुलाने और पानी लाने भेजा। बच्चे मेढ़ में भरा पानी पॉलीथीन में भरकर लाए। वो उसके मुंह पर डाला लेकिन उसे होश नहीं आया।’

वो बताते हैं, मेरी मां और भाई उसे तुरंत थाने गए और तहरीर दी। तब तक ये नहीं पता था कि किसने हमला किया है। कितने लोग थे और उसके साथ क्या हुआ है। पीड़िता के पिता बताते हैं, ‘वो दरिंदे खेत के चक्कर लगा रहे थे। लेकिन मेरी बेटी और पत्नी उनके इरादे को भांप नहीं पाए। उन्होंने मेरी बेटी को घात लगाकर शिकार बनाया। उन्हें किसी का डर नहीं था।

पुलिस की भूमिका पर उठ रहे हैं सवाल

हाथरस पुलिस ने अब तक इस मामले में संदीप, रामकुमार, लवकुश और रवि नाम के चार अभियुक्तों को गिरफ्तार किया है। चारों ही तथाकथित उच्च जाति के है। हालांकि दलित संगठनों का आरोप है कि पुलिस ने इस मामले में लीपापोती करने की कोशिश की।

पहले सिर्फ हत्या की कोशिश का मामला दर्ज किया। एक ही व्यक्ति को अभियुक्त बनाया गया। दस दिनों तक किसी को गिरफ्तार नहीं किया। जब दलित नेता चंद्रशेखर ने ट्वीट किया और अलीगढ़ जाने का ऐलान किया तब अभियुक्तों को गिरफ्तार किया गया। गैंगरेप की धारा भी बाद में जोड़ी गई। हालांकि पुलिस का कहना है कि परिवार ने जो शिकायत दी थी उसी के आधार पर पहला मुकदमा दर्ज किया गया था और बाद में पीड़िता के बयान के आधार पर गैंगरेप का मुकदमा दर्ज किया गया।

पीड़िता को अलीगढ़ मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया था। जहां पुलिस 19 सितंबर को उसका बयान लेने के लिए पहुंची थी। यानी घटना के पांच दिन बाद। उस दिन पीड़िता की हालत गंभीर थी और वो अपना बयान दर्ज नहीं करा सकी थी। फिर 21 और 22 सितंबर को सर्किल ऑफिसर और महिला पुलिस कर्मी पीड़िता का बयान लेने पहुंचे थे।

डर का माहौल

गिरफ्तार किए गए अभियुक्त पीड़िता के गांव के ही हैं और उनका घर उसके घर से बहुत दूर नहीं है। परिवार का आरोप है कि वो पहले से ही दबंगई करते रहे हैं। पीड़िता का भाई और पिता कहते हैं कि घटना के बाद अभियुक्तों की ओर से उन्हें अंजाम भुगतने की धमकियां भी दी गईं। अब गांव में पीएसी तैनात की गई है।

वो कहता है, “हम बहुत कमजोर हैं। हम उनका क्या कर पाएंगे? बहन की ये हालत देखकर गुस्सा तो बहुत आता है। बेबसी भी महसूस होती है कि हम उन दरिंदों का कुछ नहीं कर पाएंगे। शासन को हमारा साथ देना चाहिए। उन सबको फांसी होनी चाहिए ताकि किसी और की बहन-बेटी के साथ ऐसा ना हो।”

वो कहता है, ‘हमारे भीतर तक डर बैठ गया है। कई बार लगता है कि अब हम गांव में कैसे रह पाएंगे। बदला हम नहीं ले सकते क्योंकि हमारा परिवार छोटा है। ये लोग शुरू से ही दबंग रहे हैं। ये पहले से ही हमें जीने नहीं देते हैं। हमारे पास उनसे लड़ने के लिए ना ही पैसा है और ना ही आदमी। अब हम सोचते हैं कि यहां से पलायन ही कर जाएं। ये लोग हमें यहां रहने नहीं देंगे। बहन ठीक हो जाए, फिर देखेंगे कहां ठिकाना मिलता है।’

इस घटना का पीड़ित परिवार के दिलों दिमाग पर भी गहरा असर हुआ है। पीड़िता का भाई कहता है, मेरी मां उस दिन से ही बीमार और बदहवास है। पिता की भी हालत खराब है। वो इस हालत में बहन को देखते हैं तो टूट जाते हैं।

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