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1 अक्टूबर से नए नियम : ड्राइविंग करते हुए यूज कर सकते हैं मोबाइल, लेकिन सिर्फ एक काम के लिए

सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने शनिवार को कहा कि ड्राइविंग करते समय मोबाइल या अन्य हैंड हेल्ड डिवाइस का इस्तेमाल किया जा सकता है। लेकिन इसका इस्तेमाल केवल रूट देखने के लिए किया जाए। साथ ही इस बात का भी ध्यान रखा जाए कि मोबाइल के इस्तेमाल से ड्राइविंग करते समय ड्राइवर का ध्यान भंग ना हो। हालांकि, ड्राइविंग करते समय मोबाइल से बात करने पर 1 हजार से 5 हजार रुपए तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।

कागजातों के रखरखाव के लिए बनाया जाएगा नया वेब पोर्टल

मंत्रालय ने कहा कि मोटर व्हीकल रूल्स में बदलाव किया गया है। नए नियमों के तहत लाइसेंस, रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट, फिटनेस सर्टिफिकेट, परमिट जैसे वाहन से जुड़े कागजातों के रखरखाव के लिए सरकार एक वेब पोर्टल की स्थापना करेगी। इस पोर्टल का संचालन और रखरखाव सरकार करेगी। इस वेब पोर्टल पर लाइसेंस और रजिस्ट्रेशन के सस्पेंशन, कंपाउंडिंग और रिवोकेशन समेत ई-चालान जैसे अपराधों का रिकॉर्ड भी उपलब्ध होगा।

1 अक्टूबर से लागू होंगे नए नियम

मंत्रालय की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि नए नियम 1 अक्टूबर 2020 से लागू हो जाएंगे। यह नियम पिछले साल मोटर व्हीकल एक्ट में किए गए बदलाव से जुड़े हैं। एक्ट के कुछ नियम पिछले साल लागू हो गए थे। बयान के मुताबिक, आईटी सर्विस और इलेक्ट्रॉनिक मॉनिटरिंग के इस्तेमाल से देश में ट्रैफिक से जुड़े नियम बेहतर तरीके से लागू होंगे। साथ ही ड्राइवरों के उत्पीड़न पर रोक लगेगी।

कागजात की मांग नहीं कर सकेंगे पुलिस अधिकारी

बयान के मुताबिक, वेब पोर्टल पर रिवोक्ड और डिस्क्वालीफाई किए गए ड्राइविंग लाइसेंस की जानकारी क्रोनोलॉजिकली अपडेट की जाएगी। इससे अथॉरिटीज को ड्राइवर्स के व्यवहार की मॉनिटरिंग में मदद मिलेगी। नियमों के मुताबिक, यदि वाहन से जुड़े कागजात की वैधता इलेक्ट्रॉनिक तरीके से हो जाती है तो पुलिस अधिकारी फिजिकल तौर पर कागजात की मांग नहीं कर सकेंगे।

पोर्टल पर मिलेगी सीज कागजात की जानकारी

ड्राइवर की ओर से कोई अपराध किए जाने पर पुलिस अधिकारी सीज करने के लिए कागजात की मांग कर सकते हैं। सीज करने की यह कार्रवाई वेब पोर्टल पर इलेक्ट्रॉनिक तरीके से की जाएगी। सीज किए गए कागजात की जानकारी क्रोनोलॉजिकली वेब पोर्टल पर अपडेट की जाएगी। रेग्युलर आधार पर यह रिकॉर्ड वेब पोर्टल पर उपलब्ध रहेगा। कागजातों का परीक्षण किए जाने वाले पुलिस अधिकारी और तारीख की जानकारी भी वेब पोर्टल पर उपलब्ध होगी। इससे गैर-जरूरी परीक्षण पर रोक लगेगी और ड्राइवरों का उत्पीड़न खत्म होगा।

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