Monday , July 13 2020
Breaking News
Home / क्राइम / Art of WAR : चीन के सबसे बड़े ‘चाणक्य’ ने दिया था जो मंत्र, वो चीन पर ही आज़माए भारत

Art of WAR : चीन के सबसे बड़े ‘चाणक्य’ ने दिया था जो मंत्र, वो चीन पर ही आज़माए भारत

चीन में करीब 25 सौ साल पहले एक युद्ध रणनीतिकार हुए, सुन जू। उन्होंने युद्ध को लेकर ‘द आर्ट ऑफ वॉर’ नाम से किताब लिखी। इसके 13 चैप्टर जंग में फतह पाने के तरीकों से भरे पड़े हैं। समय के साथ ये सूत्र बिजनेस जगत को सीख देने और जीवन की परेशानियों से निपटने का नुस्ख़ा भी बन चुके हैं। चीन के साथ 50 साल के सबसे कटु दौर से गुजर रहा भारत भी इन सूत्रों से कुछ सबक ले सकता है;

1.सबसे बड़ी जीत वो होती है, जिसमें लड़ने की ही जरूरत न पड़े।
जीतने के लिए लड़ना ज़रूरी नहीं। भारत को वो रास्ते तलाश करने चाहिए, जिससे चीन को सबक सिखाया जा सके। फिलहाल यह रास्ता व्यापार से होकर जाता दिखता है। गलवान वैली में हुई खूनी झड़प के बाद सरकार ने चीन से आयातित माल को लेकर कड़ा रुख दिखाया। बताया जा रहा है कि चीन से आने वाले घटिया सामानों की लिस्ट मांगी गई है। मकसद है आत्मनिर्भर भारत बनाना। अगर इस दिशा में हम एक कदम भी बढ़ते हैं, तो ड्रैगन के लिए बड़ा झटका होगा और हमारी वह जीत, जो बिना लड़े मिलेगी। सुन जू कहते भी हैं कि एक बुद्धिमान योद्धा युद्ध टालता है।

2. अपना युद्ध चुनें। जीतने वाला जानता है कि उसे कब लड़ना है और कब नहीं। टाइमिंग महत्वपूर्ण है। निर्णय लेने की क्षमता बाज़ के उस गोते की तरह होनी चाहिए, जो अपने शिकार पर झपटता है।
भारत को इस समय कई मोर्चे पर लड़ना पड़ रहा है। देश में कोरोना के मरीज बढ़ते जा रहे हैं और मौतों का आंकड़ा भी। ऊपर से लॉकडाउन ने अर्थव्यवस्था की कमर तोड़ दी है। छोटे-बड़े हज़ारों उद्योग-धंधे बंद हो गए और करोड़ों लोग बेरोज़गार हुए हैं। आशंका है कि विकास दर माइनस में रह सकती है। यह तो हुई अर्थव्यवस्था की बात। सीमाओं पर देखें तो पुराने दोस्त नेपाल के साथ भी तनाव चल रहा है। पाकिस्तान की तरफ से सीमापार आतंकवाद का ख़तरा बना ही हुआ है। जम्मू-कश्मीर में हमारे सुरक्षाबल रोज़ाना ऐसे ख़तरों से निपट रहे हैं। ऐसे में अगर एक मोर्चा और खुलता है, तो उसे संभालना मुश्किल हो जाएगा।

3.विजेता योद्धा पहले जीतते हैं और फिर युद्ध के मैदान में जाते हैं, जबकि हारे हुए लड़ाके पहले लड़ने जाते हैं और फिर जीत की तलाश करते हैं।
लड़ाई केवल मैदान में नहीं होती। उससे पहले भी एक जंग लड़ी जाती है, जिसे कहते हैं कूटनीति और राजनीति। चीन आज अगर अपने सभी पड़ोसियों से एक साथ पंगा लिए बैठा है और अमेरिका को भी आंखें दिखा रहा है तो इसके पीछे है उसकी आर्थिक ताकत। वन बेल्ट वन रोड प्रोजेक्ट के नाम पर उसने कई देशों में निवेश किया है। भारत के पड़ोस में भी सस्ते दर पर कर्ज़ बांटा है। ग्लोबल सप्लाई चेन उसकी मुट्ठी में है। पहले इस वर्चस्व को तोड़ना होगा और यह काम होगा कूटनीति से।

4.अगर आप अपने दुश्मन को जानते हैं और ख़ुद को भी, तो फिर सौ युद्धों के परिणाम से भी डरने की ज़रूरत नहीं है। यदि आप केवल अपने को जानते हैं, दुश्मन को नहीं, तब हर जीत के साथ एक हार भी मिलेगी। लेकिन अगर आप किसी को नहीं जानते तो हर लड़ाई हारेंगे।
क्या हम चीन को पूरी तरह जानते हैं? जो लोग युद्ध के लिए शोर मचा रहे हैं, क्यों उन्होंने हमारे पड़ोसी की ताकत का आकलन किया है? बार-बार यह बात उठ रही है कि भारत अब 60 के दशक वाला देश नहीं रहा। लेकिन यह सचाई कोई नहीं बोल रहा कि चीन में भी 60 बसंत बीते हैं और इस दरम्यान उसने हमसे कुछ तेज़ ही दौड़ लगाई। आज हमारा हर दूसरा प्रोडक्ट चीनी है। हम बाहर से जो सामान मंगाते हैं, उसमें से करीब 18 फ़ीसदी चीन से आता है। एक मीडिया रिपोर्ट कहती है कि हमारे टॉप 30 स्टार्टअप्स में से 18 में चीनियों का पैसा लगा है। मोबाइल फोन, टेलिविजन, माइक्रोवेव से लेकर दूसरे इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और खिलौनों से लेकर दवाओं तक- उस पार से हमारे देश तक आने वाले सामानों की फेहरिश्त बहुत लंबी है। लड़ना है तो पहले इन आंकड़ों को कम कीजिए।

5.अराजकता के बीच भी एक मौका होता है।
पहले महामारी और फिर सीमा पर तनाव ने एक बात हमें बहुत अच्छे ढंग से समझा दी, आज ही तारीख में चीन की अहमियत। कोरोना के कारण जब ग्लोबल सप्लाई चेन टूटी तो दुनियाभर में इसी तरह की लोकल चेन बनाने की बात हुई। एक ऐसी कड़ी, जिसमें चीन का दबदबा कम से कम हो। भारत में भी पीएम नरेंद्र मोदी ने लोकल के लिए वोकल होने की बात कही। स्वदेशी की यह अहमियत फिर समझ आने लगी है। जैसा कि जाने-माने शिक्षाविद, वैज्ञानिक और इंजीनियर सोनम वांगचुक ने कहा है कि सॉफ्टवेयर इन अ वीक एंड हार्डवेयर इन अ ईयर यानी चीनी सॉफ्टवेयर एक हफ्ते और हार्डवेयर एक साल में अपने जीवन से दूर करें। शुरुआत करने का मौका यही है।

6. हर युद्ध छल-कपट पर आधारित होता है। अपने प्लान को छुपाएं। जब हमला करने की क्षमता रखते हों, तब दिखना चाहिए कि अक्षम हैं। जब अपनी फोर्स का इस्तेमाल करें, उस समय लगना चाहिए कि सक्रिय नहीं हैं। जब पास हों, तब दुश्मन को भरोसा कराएं कि दूर हैं और जब दूर हों, तब दुश्मन को यह यक़ीन दिलाना चाहिए कि हम उसके पास हैं।
युद्ध की रणनीतियां टीवी स्क्रीन पर नहीं बनतीं और न ही उनके बारे में सार्वजनिक बयानबाजी की जाती है। इस सूत्र को समझने के लिए सुन जू की भी ज़रूरत नहीं। हमारे सामने जो सबसे बड़ा दुश्मन खड़ा है यानी चीन, उसी को देख लीजिए। उसने हमेशा अपने प्लान को भारत से छुपाकर रखा। फिर चाहें 1962 की लड़ाई हो, डोकलाम का मसला या अब गलवान वैली। चीन ने कभी जाहिर नहीं होने दिया कि वह आक्रामक तेवर अपनाने जा रहा है। गलवान में तो उसने हद कर दी। उसके शीर्ष स्तर पर कहा जाता रहा कि चीनी सैनिक पीछे हटेंगे और फिर धोखे से वार किया। इसे आप कायराना हरकत कह सकते हैं, लेकिन यह भी युद्ध नीति का हिस्सा है। आर्ट ऑफ वार कहता है कि पूरा रहस्य दुश्मन को भ्रमित करने में छुपा है, ताकि वो हमारे असली इरादों का पता न लगा सके। और एक बार जिस रणनीति से जीत मिल जाए, उसे फिर न दोहराएं।

7. जो लड़ना चाहता है, उसे पहले युद्ध की कीमत का अंदाज़ा लगा लेना चाहिए।
मोदी सरकार ने पिछले साल देश के सामने एक लक्ष्य रखा, पांच ट्रिलियन इकनॉमी का। कोरोना के पहले तक एक मोटा अंदाज़ा था कि इसके लिए अगले पांच बरसों में जीडीपी आठ प्रतिशत होना चाहिए। महंगाई काबू में रहे और निवेश बढ़े। अगर युद्ध होता है तो इन सारी चीज़ों को भूल जाइए। दुनिया की कोई कंपनी एक अशांत क्षेत्र में पैसा नहीं लगाती। नया निवेश नहीं तो नया काम नहीं। मतलब नई नौकरियां नहीं। मतलब हुआ कि हाथ में पैसा नहीं और बाज़ार भी नहीं। लड़ाई की यह वो कीमत है, जिसका अनुमान हमें पहले से लगाकर रखना होगा।

8. लंबे युद्ध से किसी को फायदा नहीं होता।
अफगानिस्तान में अमेरिका करीब 20 साल से मौजूद है। अब तक जिनसे लड़ता रहा, आख़िर में उन्हीं के साथ बातचीत की मेज़ पर आना पड़ा। दूसरी ताकत रूस पिछले पांच साल से सीरिया में उलझा है। सुन जू की बातों पर भरोसा न हो तो ये दोनों उदाहरण देख लीजिए। लंबा युद्ध एक अंतहीन कहानी बन जाता है। भारत और चीन के भरोसे ही दुनिया कहती है कि आने वाली सदी एशिया की होगी। अब इन दोनों को देखना है कि उन्हें यह चमकदार सपना पूरा करना है या लिखनी है एक और अंतहीन कहानी।

Check Also

बिहार में ‘काला’ रविवार : हर रिकॉर्ड तोड़ दिया कोरोना, अबतक का सबसे बड़ा आंकड़ा

बिहार में कोरोना वायरस (CoronaVirus) का रविवार को बड़ा ‘विस्‍फोट’ हुआ है। आज राज्य के ...