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CM फेस के बगैर दिल्ली में उतरी बीजेपी, जानिए इसके पीछे की ऐतिहासिक कहानी

CM FACE को लेकर दिल्ली में बीजेपी का अनुभव बेहद कटु रहा है. दरअसल, दिल्ली में 1993 से लेकर 2015 तक 6 विधानसभा चुनाव हुए हैं. बीजेपी इनमें से 5 बार मुख्यमंत्री के चेहरे के साथ साथ मैदान में उतरी थी और उसे हर बार हार का सामना करना पड़ा पड़ा. दिल्ली में महज एक बार बीजेपी ने सीएम फेस की घोषणा नहीं की थी और तब दिल्ली में सरकार बनाने में कामयाब रही थी. गौरतलब है कि 1993 के चुनाव में बीजेपी ने किसी को भी सीएम का चेहरा घोषित नहीं किया था. ऐसे में बीजेपी ने दिल्ली में मुख्यमंत्री के चेहरे के बजाय सामूहिक और केंद्रीय नेतृत्व के सहारे चुनावी मैदान में उतरने का फैसला किया है. केंद्रीय गृहमंत्री और बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में चुनाव लड़ने का संकेत देकर कमोबेश यही बात कही है.

1993 का चुनाव बीजेपी, मदनलाल खुराना की अगुवाई में लड़ा था, इसके बावजूद आलाकमान ने उन्हें मुख्यमंत्री पद का चेहरा घोषित नहीं किया था. हालांकि उस वक्त दिल्ली में बीजेपी की सियासत में मदनलाल खुराना, विजय कुमार मल्होत्रा और केदारनाथ साहनी की तिकड़ी की तूती बोलती थी. बीजेपी दिल्ली की सियासी जंग फतह करने में कामयाब रही तो मदनलाल खुराना के भाग्य से छींका टूटा और वह मुख्यमंत्री बनने में कामयाब रहे. लेकिन 5 साल के कार्यकाल में बीजेपी को अपने 3 मुख्यमंत्री मदनलाल खुराना, साहिब सिंह वर्मा और सुषमा स्वराज बदलने पड़े थे. ये तीनों अब इस दुनिया में नहीं हैं.

1998 से बीजेपी दिल्ली की सत्ता पर काबिज नहीं हो सकी. जबकि हर बार बीजेपी सीएम फेस के साथ उतरी थी. 1998 से लेकर 2015 तक 5 विधानसभा चुनाव हुए और पार्टी ने हर बार सीएम पद का चेहरा बनाया. 1998 के चुनाव से ऐन पहले बीजेपी ने सुषमा स्वराज को दिल्ली का सीएम बनाया था. बीजेपी सुषमा स्वराज के नेतृत्व में ही चुनाव लड़ी और पार्टी को बुरी तरह हार का मुंह देखना पड़ा. बीजेपी महज 15 सीटें जीतने में कामयाब रही थी.

2003 के चुनाव में बीजेपी मदनलाल खुराना को कांग्रेस की शीला दीक्षित के सामने सीएम फेस बनाकर मैदान में उतरी थी और इस बार खुराना का जादू फीका रहा था. बीजेपी को महज 20 सीटें ही मिल सकी थीं. इसके बाद 2008 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने विजय कुमार मल्होत्रा को मुख्यमंत्री पद का चेहरा घोषित किया था. बीजेपी का यह दांव भी पूरी तरह से फेल रहा और विजय कुमार मल्होत्रा पार्टी को महज 23 सीटें ही दिला सके.

2013 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी डॉ हर्षवर्धन को सीएम फेस बनाकर मैदान में उतरी थी. हर्षवर्धन बीजेपी को दिल्ली में 31 सीटें जिताकर सबसे बड़ी पार्टी बनाने में कामयाब रहे थे, लेकिन बहुमत से 5 सीटें कम होने के कारण बीजेपी सरकार नहीं बना सकी. इसके बाद आम आदमी पार्टी ने कांग्रेस के समर्थन से सरकार बनाई थी. हालांकि यह सरकार महज 52 दिन ही चल सकी.

2015 में विधानसभा चुनाव हुए और बीजेपी इस बार पूर्व आईपीएस किरण बेदी को सीएम फेस घोषित कर मैदान में उतरी थी. अरविंद केजरीवाल के सामने बीजेपी का यह दांव भी नहीं चल सका. किरण बेदी खुद भी हारीं और पार्टी को महज 3 सीटें ही मिल सकीं.

इसीलिए लगातार हार से सबक लेते हुए पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने दिल्ली में किसी भी चेहरे को आगे नहीं करके मैदान में उतरने का मन बनाया है.

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