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जापान के Five Eyes ग्रुप का सदस्य बनने की आशंका से ही चीन की हवा टाइट, आखिर क्यों?

इन दिनों चीन का धुर प्रतिद्वंदी जापान चीन विरोधी गतिविधियों में बढ़चढ़कर हिस्सा ले रहा है, और धीरे-धीरे चीन की बेचैनी भी बढ़ती जा रही है। इन दिनों अटकलें भी लगाई जा रही है कि जापान चर्चित इंटेलिजेंस समूह – Five Eyes का हिस्सा बन सकता है, और इसकी संभावना मात्र से चीनी प्रशासन के चेहरों पर हवाइयाँ उड़ रही है।

पर ये फाइव Eyes है क्या? दरअसल, यह एक इंटेलिजेंस समूह है, जिसकी स्थापना मुख्य रूप से चीन के विरुद्ध आवश्यक जानकारी जुटाने के लिए हुई थी। इसमें पहले पाँच सदस्य थे – अमेरिका, यूके, कनाडा, न्यूज़ीलैंड और ऑस्ट्रेलिया। लेकिन कनाडा और न्यूज़ीलैंड के प्रशासकों के रवैये को देखते हुए Five Eyes के बाकी सदस्य अब असरदार विकल्प तलाशने में जुट गए हैं।

हालांकि, जापान अभी Five Eyes से जुड़ा नहीं है, पर चीन इस संभावना से कितना भयभीत है, ये आप ग्लोबल टाइम्स के हाल ही में लिखे गए एक लेख से समझ सकते हैं। अपने एक संपादकीय में ग्लोबल टाइम्स ने चीन की घबराहट को जगजाहिर किया है, क्योंकि यदि जापान वाकई में Five Eyes समूह से जुड़ गया, तो चीन के ऊपर शामत आनी तय है।

ग्लोबल टाइम्स के अनुसार, “जापान ने अमेरिका और यूके को चीन द्वारा शिंजियांग में हो रहे उइगर मुसलमानों पर कथित अत्याचार के बारे में काफी जानकारी साझा की है, जिसके कारण अमेरिका और यूके दोनों में चीन की नीतियों की जमकर आलोचना भी की गई।” चीनी प्रशासन ने आगे ये भी लिखा, “जापान द्वारा इकट्ठा की गई इस जानकारी से कई विशेषज्ञों का मानना है कि जापान Five Eyes इंटेलिजेंस समूह का एक अहम हिस्सा बन सकता है”।

यही नहीं, ग्लोबल टाइम्स ने अपने रिपोर्ट में ये भी बताया कि कैसे अमेरिकी थिंक टैंक Center for Strategic and International Studies ने हाल ही में एक रिपोर्ट प्रकाशित की थी, जिसमें ये सुझाव दिया गया था कि वाशिंगटन और टोक्यो को Six Eyes Network बनाने की ओर ध्यान देना चाहिए। अब कहने को जापान इंटेलिजेंस इकट्ठा में विकसित देशों की भांति ज्यादा सक्षम नहीं है, क्योंकि वर्षों तक उसकी नीति शांति को बढ़ावा देती थी। काफी हद तक पुराने कानून गुप्तचर प्रणाली का विरोध भी करती थी।

इसके अलावा जापान अंग्रेजी भाषी भी नहीं है, जो Five Eyes से साझेदारी के लिहाज में काफी प्रतिकूल माना जाएगा। परंतु समय के साथ साथ समीकरण भी बदलते हैं और स्थिति भी, और आज जापान के साथ साझेदारी वैश्विक ताकतों के लिए प्रमुख आवश्यकता भी बन चुका है। यदि जापान Five Eyes का हिस्सा नहीं भी बनता है, परंतु Five Eyes को बाहरी समर्थन और सहायता देता रहता है, तो भी चीन के लिए वह उतना ही खतरनाक है। इसके अलावा जापान का अमेरिका, भारत और ऑस्ट्रेलिया की सदस्यता वाले QUAD समूह का हिस्सा होना चीन के लिए और भी चिंताजनक है।

ऐसे में चीन भली भांति जानता है कि यदि जापान Five Eyes से किसी भी प्रकार से जुड़ा, तो यह चीन के लिए किसी दुस्वप्न से कम नहीं होगा। लेकिन चीन इसे रोकने के लिए भी कुछ विशेष कदम नहीं उठा सकता, क्योंकि सेंकाकू द्वीप समूह से लेके इंडो पेसिफिक क्षेत्र में उसकी आक्रामकता ने चीन के लिए सुलह के सभी दरवाजे बंद कर दिए हैं।

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