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चीनी कंपनी को रैपिड रेल में टनल बनाने का ठेका, क्या सिर्फ टिकटॉक बंद करने से होता है बहिष्कार?

लद्दाख की गलवान घाटी में चीनी और भारतीय सैनिकों के बीच हुई हिंसक झड़प के बाद दोनों देशों के रिश्तों में तनाव आ गया है। दूसरी तरफ से चीन से शुरू हुई कोरोना महामारी ने भी भारत और चीन के संबंधों पर बुरा प्रभाव डाला है।

इसी बीच मोदी सरकार द्वारा चीन को सबक सिखाने से संबंधित कई बयान जारी किए गए थे। यहां तक कि चीनी सामान को भी बॉयकॉट करने की बात कही गई थी।

इसी बीच खबर सामने आई है कि एक बार फिर से भारत ने चीनी कंपनी को एक बड़ा कॉन्ट्रैक्ट दे दिया है। खबर के मुताबिक, दिल्ली मेरठ रैपिड रेल प्रोजेक्ट के लिए नेशनल कैपिटल रीजन ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन ने एक चीनी कंपनी को कॉन्ट्रैक्ट दिया है।

दरअसल रैपिड रेल प्रोजेक्ट के लिए अशोक नगर और साहिबाबाद के बीच 5 किलोमीटर लंबा एक अंडरग्राउंड टनल बनने जा रहा है। एनसीआरटीसी द्वारा जिस चीनी कंपनी को ये कॉन्ट्रैक्ट दिया गया है। उसका नाम है शांघाई टनल इंजीनियरिंग कंपनी।

आपको बता दें कि यह फैसला चीनी कंपनी और चीनी सामान के बॉयकॉट की मुहीम के बीच लिया गया है। इस मामले में एनसीआरटीसी के प्रवक्ता का कहना है कि यह कॉन्ट्रैक्ट चीनी कंपनी को दिशा निर्देशों का पालन करते हुए दिया गया है।

एनसीआरटीसी का कहना है कि अब इस दिल्ली-गाजियाबाद-मेरठ प्रोजेक्ट का काम तेजी से चलेगा। जल्द ही ये प्रोजेक्ट पूरा हो सकता है।

इस रैपिड रेल प्रोजेक्ट को फंडिंग एशियन डेवेलपमेंट बैंक कर रहा है। यह प्रोजेक्ट एडीबी की गाइडलाइंस पर ही चल रहा है।

बता दें, चीन भी एडीबी का सदस्य देश है। जिसके तहत भारत किसी भी चीनी कंपनी को किसी प्रोजेक्ट से इस आधार पर बाहर नहीं कर सकते, क्यूंकि वे एक चीन से संबंधित है।

खबर साभार- बोलता हिंदुस्तान

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