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बाटला हाउस पर फिर फंसेगी कांग्रेस, जांच टीम में शामिल IPS की किताब में सनसनीखेज दावे

बाटला हाउस एनकाउंटर का जिन्न एक बार फिर बाहर निकलने वाला है और कांग्रेस के लिए फिर ये नई मुसीबत लाने वाला है. वैसे तो ये एनकाउंटर कांग्रेस के शासनकाल में ही हुआ था लेकिन इसके बाद कांग्रेस नेताओं के बयानों ने इस एनकाउंटर को विवादित बना दिया था. कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने जहां इस एनकाउंटर को फर्जी बता दिया था तो वहीं सलमान खुर्शिद ने कहा था कि इस एनकाउंटर की खबर सुनकर सोनिया गांधी रात भर रोईं थीं.

आपको बता दें, कि 19 सितम्बर 2008 को दिल्ली के जामिया नगर इलाके में ये एनकाउंटर हुआ था. 13 सितंबर 2008 को दिल्ली में कई जगहों पर सीरियल बम ब्लास्ट हुए थे, जिसके बाद दिल्ली पुलिस सक्रिय हुई और 19 सितंबर को दिल्ली के जामियानगर के बटला हाउस में छिपे आतंकियों को एनकाउंर में मार गिराया था. इस मुठभेड़ में आजमगढ़ के रहने वाले आतिफ और साजिद नाम के दो आतंकी पुलिस की गोली का शिकार हुए. मुठभेड़ के दौरान दिल्ली पुलिस के इंस्पेक्टर मोहनचंद शर्मा शहीद हो गए थे.

मुठभेड़ के दौरान बटला हाउस में छिपे कुछ आतंकी मौके से फरार हो गए थे. इनमें नौ आतंकी आजमगढ़ से ताल्लुक रखते थे जिसमें से कुछ को खुफिया एजेंसिया गिरफ्तार कर चुकी है और कुछ अभी फरार है. इस एनकाउंटर पर तब खूब सियासत हुई थी और सपा समेत कांग्रेस के कई नेताओं ओर मुस्लिमों ने इसे फर्जी बताते हुए इसकी जांच की मांग की थी. जिनकी मांग पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने जांच की और 22 जुलाई 2009 को अपनी रिपोर्ट कोर्ट में जमा कर दिल्ली पुलिस को क्लीन चिट दे दी थी. 26 अगस्त 2009 को हाईकोर्ट ने मानवाधिकार आयोग की रिपोर्ट को सही मानते हुए बाटला हाउस एनकाउंटर की न्यायिक जांच से इनकार कर दिया. इसके बाद कुछ लोग सुप्रीम कोर्ट भी पहुंचे लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने भी सारे पहलुओं को जानने के बाद न्यायिक जांच से मना कर दिया था.

अब घटना के 12 साल बाद 2008 के बम धमाकों की जांच टीम का नेतृत्व करने वाले पुलिस अधिकारी करनैल सिंह की एक किताब आ रही है. किताब का नाम है “बाटला हाउस: एन एनकाउंटर दैट द शॉक द नेशन”. दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल में ज्वाइंट कमिश्नर रहे करनैल सिंह ने इस किताब में बटला हाउस एनकाउंटर से जुड़े कई तथ्यों को खोलकर रख दिया है, जो कांग्रेस की तुष्टीकरण की नीति और वोटों के लिए देश की सुरक्षा से समझौता करने वाली नीति की पोल खोलने के लिए काफी है. किताब में दी गई जानकारी कांग्रेस की सियासी मुश्किलें बढ़ाने वाली है.

क्योंकि इस किताब में करनैल सिंह ने दावा किया है, कि जब जांच की प्रक्रिया आगे बढ़ रही थी तो गृहमंत्रालय की ओर से निर्देश आए कि इस मामले में ज्यादा प्रेस ब्रीफिंग न की जाए. मीडिया को इस जांच की जानकारी न दी जाए. अब सवाल ये कि गृहमंत्रालय ये क्यों चाहता था कि इस जांच की जानकारी मीडिया से छिपाकर रखी जाए.

करनैल सिंह ने इस किताब में लिखा है, कि इंडियन मुजाहिदीन के दो आतंकवादी मारे गए थे. मरने वालों में और अपराध में शामिल लोग अल्पसंख्यक समुदाय से थे. इसलिए कुछ राजनीतिक लोग इससे परेशान थे. वे आगे लिखते हैं, कि मैंने व्यर्थ में तर्क दिया कि आतंकवाद का कोई धर्म नहीं था और पुलिस अधिकारियों के रूप में, ये हमारा कर्तव्य है कि हम चाहे जो भी हों, आतंकवादियों के खिलाफ नेतृत्व करें और उन्हें गिरफ्तार करें. वे कहते हैं कि उन्हें पता था कि “इस तरह के एक महत्वपूर्ण मामले में मीडिया के लिए एक शून्य छोड़ने का नतीजा खतरनाक होगा, क्योंकि ये आधी-अधूरी जानकारी से भरा हो सकता है, या इससे भी बदतर, गलत और मनगढ़ंत” खबर हो सकती है.

बटला हाउस मुठभेड़ के बारे में वे कहते हैं, कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में एक ऐतिहासिक घटना बन गई. इसकी वजह से इंडियन मुजाहिदीन को बड़ा झटका लगा. भारत में नेटवर्क की रीढ़ तोड़ दी. लेकिन हमने सबसे बुद्धिमान और बहादुर अधिकारियों में से एक को खो दिया. उन्होंने किताब में लिखा है, कि इस मामले ने एक राजनीतिक तूफान ला दिया था, स्पेशल सेल के अधिकारियों के खिलाफ माहौल बनाकर जनता की राय को भी बांट दिया गया था. मीडिया में एक विवादास्पद विषय बन गया जो आज तक जारी है. मुठभेड़ के बाद , सभी मोर्चों से सरकार पर दबाव बढ़ रहा था. कुछ दिनों पहले, दिल्ली में सीरियल ब्लास्ट हुए थे. सरकार पर आरोप लगाया जा रहा था कि वो आतंकवाद के प्रति नरम है. विपक्ष आतंकवादियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई और आतंकवाद निरोध में काम करने वाले पुलिस बल का समर्थन करने की वकालत कर रहा था.

सरकार ने दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल के साथ मौजूद सबूतों का जायजा लेने का फैसला किया. इसके बाद सिंह को दिल्ली के तत्कालीन एलजी तेजेंद्र खन्ना का फोन आया और उन्होंने कहा कि कपिल सिब्बल, जो उस वक्त केंद्रीय मंत्री थे, वे मुठभेड़ पर चर्चा करना चाहते हैं. खन्ना ने तैयार होकर आने की सलाह दी थी. इसके बाद करनैल सिंह पूरी तैयारी के साथ पहुंचे और सिब्बल ने उनसे जो सवाल जवाब किए उसके सारे तथ्यों के साथ उन्होंने सबूत पेश किए, जिके बाद सिब्बल को भी मानना पड़ा कि मुठभेड़ की सही थी और अभियुक्त आतंकवादी गतिविधियों में लिप्त थे. इसकी जानकारी सिब्बल ने तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को दी.

जाहिर है ये किताब के कुछ अंश है, जब पूरी किताब आएगी तो कांग्रेस की पोल खुलनी तय है और कांग्रेस पर नए सवाल उठने भी जिसके जवाब देना पार्टी के लिए मुश्किल होने वाला है. तो इंतज़ार कीजिए उस किताब का जो भारत सियासत में नया तूफान लाने के लिए आने वाली है.

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