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लद्दाख में भारत पर दबाव बनाना चाहता था ड्रैगन, इसीलिए नगरोटा साजिश में पाकिस्‍तान से की मिलीभगत!

नई दिल्‍ली
भारत और चीन के बीच पूर्वी लद्दाख में तनाव का असर नियंत्रण रेखा (LoC) पर साफ नजर आ रहा है। चीन नहीं चाहता कि भयंकर ठंड में उसके सैनिक वास्‍तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर भारतीय जवानों के मुकाबले खड़े रहें। ऐसे में उसने साजिश का सहारा लेना शुरू कर दिया है। सुरक्षा एजेंसियों के इनपुट्स इसी ओर इशारा करते हैं। पिछले दिनों जम्‍मू और कश्‍मीर के नगरोटा में जैश-ए-मोहम्मद की आतंकी साजिश का भांडाफोड़ हुआ। इसके पीछे चीन और पाकिस्‍तान, दोनों की साझा रणनीति होने की बात सामने आई है। सूत्रों के मुताबिक, चीन का गणित ये हो सकता है कि आतंकी हमले की वजह से भारत पर लद्दाख में पीछे हटने के लिए उसकी शर्तों को मानने का दबाव बढ़ेगा।

पाक से सीधा कनेक्‍शन, चीन इस वजह से बना साजिश का हिस्‍सा
जैश के जो आतंकी ढेर किए गए, उनके हैंडलर्स के टेक्‍स्‍ट मेसेजेस यह साफ करते हैं कि पूरी साजिश को इस्‍लामाबाद से बैकअप मिल रहा था। हालांकि शीर्ष सूत्रों का दावा है कि इसमें चीन ने उसका साथ दिया। पाकिस्‍तान और चीन, दोनों ने ही जम्‍मू और कश्‍मीर का विशेष दर्जा वापस लेने के कदम का विरोध किया था। पाकिस्‍तानी सेना और उसकी खुफिया एजेंसी आईएसआई पिछले साल 5 अगस्‍त को हुए इस फैसले के बाद से ही घाटी में ‘कुछ बड़ा’ करने की साजिश रच रहे थे। चीन इस साजिश का हिस्‍सा अपने फायदे के लिए बना। उसकी सोच ये है कि एक आतंकी हमला भारत को बैकफुट पर ला देगा और वह सीमा से सैनिकों को पीछे हटाने की उसकी शर्तों को मानने पर मजबूर हो जाएगा।

एक तीर से दो शिकार करने की ताक में पाकिस्‍तान
पूर्व उप राष्‍ट्रीय सुरक्षा सलाहकार एसडी प्रधान ने मीडिया से बातचीत में कहा, “पाकिस्‍तान की खुफिया एजेंसियां बार-बार लोकल नेताओं और भारतीय सुरक्षा बलों को निशाना बनाने की कोशिश में रही हैं ताकि पाकिस्‍तान में विपक्षी दलों से अटेंशन हट सके। साथ ही साथ जम्‍मू और कश्‍मीर का मुद्दा दूसरे देशों की नजर में आए, खासतौर से इस्‍लामिक देशों की नजर में।” पाकिस्‍तान में प्रधानमंत्री इमरान खान भारी द बाव में हैं। विपक्षी दलों ने उन्‍हें चारों तरफ से घेर रखा है। ऐसे में भारत के भीतर आतंकी हमला कराके वे ध्‍यान भटकाने की कोशिश हो सकती है। अमेरिका के चुनावी नतीजों ने भी पाकिस्‍तान का मन थोड़ा बढ़ा दिया है।

प्रधान ने कहा, “डीडीसी चुनावों की घोषणा से शायद वे बौखला गए हैं। उन्‍होंने यह भी गुणा-गणित लगाया होगा कि अमेरिका में जो बाइडेन और कमला हैरिस के होते हुए, जम्‍मू और कश्‍मीर में आतंकवाद का स्‍तर बढ़ाकर वे भारत को मानवाधिकार के मुद्दे पर दबा सकते हैं। अमेरिका को लुभाने और FATF में बने रहने के लिए पाकिस्‍तान ने हाफिज सईद और उसके कुछ साथियों के खिलाफ दिखावे की कार्रवाई की है। इस घटना (नगरोटा) में पाकिस्‍तान का हाथ होने के साफ सबूत हैं जो FATF की अगली बैठक में उसके लिए चिंता का सबब बन सकते हैं।”

बॉर्डर पर कहां-कहां ऐसी सुरंगें, पता लगा रही सेना
गुरुवार को तीन घंटे चले एनकाउंटर में चारों आतंकी मार गिराए गए थे। गृह मंत्रालय के अनुसार, आतंकियों के मूवमेंट का इनपुट मिला था। उनके पास से 11 एके-47 राइफलों समेत 3 पिस्‍टल, 29 ग्रेनेड, 6 UBGLs और मोबाइल फोन्‍स बरामद हुए थे। इन आतंकियों ने सीमा पार करने के लिए एक सुरंग का इस्‍तेमाल किया। यह सुरंग सांबा जिले में निकलती है। अब सीमा पर सेना ने एक बड़ा अभियान शुरू कर दिया है ताकि ऐसी सुरंगों की पहचान की जा सके।

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