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धरी रह गई दुष्यंत की चाबी, न बन सके किंग और न बन सके किंगमेकर

गुरुवार को लंबे-चौड़े डील-डौल वाले जेजेपी के दुष्यंत चौटाला बड़े चौड़े होकर घूम रहे थे. जीत की खुमारी के बाद यह स्वभाविक भी था. देश के उप-प्रधानमंत्री से लेकर राज्य के मुख्यमंत्री तक की राजनीतिक विरासत जिसे मिली हो, जिसके पास सबसे युवा सांसद का तमगा रहा हो, उसके लिए यह जीत तब और ज्यादा मायने रखती है, जब पिता और दादा जेल में हों. खुद की बनाई पार्टी नई हो. लेकिन 10 सीटों पर जीत लगभग पक्की कर चुके दुष्यंत राजनीति की सबसे पुरानी लाइन भूल गए थे – कुछ भी संभव है यहाँ.

हरियाणा चुनाव में BJP 46 के मैजिक आँकड़े से पीछे रह गई है. पीछे तो कॉन्ग्रेस भी रह गई है. लेकिन मामला अंतर का है, मामला गणित का है. गणित कहता है BJP की 40 जबकि कॉन्ग्रेस की 30 सीट. मतलब मैजिक आँकड़े तक पहुँचने के लिए BJP को चाहिए 6 विधायक जबकि कॉन्ग्रेस को चाहिए 16 विधायक.

अब बात दुष्यंत चौटाला के किंग मेकर बनने की और उस गणित की, जो उनके सपने पर पानी फेर दिया. जेजेपी के 10 विधायक आए. मतलब यह हुआ कि दुष्यंत चौटाला पूरी पार्टी के साथ कॉन्ग्रेस से गठजोड़ कर भी लेते तो भी मैजिक नंबर से 6 पीछे ही रह जाएँगे. फिर इस 6 की जुगाड़ उन्हीं 9 अन्य विधायकों में से करनी होगी, जिन पर BJP की भी निगाहें हैं.

बीजेपी के साथ जाने का मन बना लिया तो… तो क्या BJP भी आपके साथ सत्ता में रहने का मन बना सकती है? शायद हाँ, शायद ना! लेकिन आँकड़े और राजनीतिक गणित ‘ना’ की ओर इशारा कर रहे हैं. कैसे?

वो ऐसे क्योंकि राज्य में राजनीतिक वर्चस्व वाली पार्टी के साथ सबसे बड़ी पार्टी तब तक समझौता करने से बचेगी, जब तक कोई और विकल्प उपलब्ध न हो. क्योंकि बड़ी और नामी पार्टी के अपने नखरे होंगे, पद की लालसा होगी, चुनाव बाद जनता के सामने मुद्दे उठाने का प्रेशर होगा… आदि-इत्यादि.

मैजिक आँकड़ों तक पहुँचने के लिए अगर निर्दलीय या अन्य छोटे-मोटे दलों के विधायक मौजूद हों तो सबसे बड़ी पार्टी क्या करेगी? क्या अगले 5 साल तक वो बड़े दल के नखरे झेलेगी? या फिर निर्दलीय विधायकों को सत्ता में रखने की लॉलीपॉप दिखा उनके दम पर सरकार चलाएगी?

ऐसा नहीं है कि इसमें रिस्क नहीं है, क्योंकि निर्दलीय बिना पेंदी के लोटे की तरह होते हैं, कभी भी, किसी के भी साथ पासा पलट लेते हैं. लेकिन यह समस्या आजकल हर दल के साथ हो गई है. इसलिए वर्तमान राजनीतिक परिस्थिति में सरकार बनाने के लिए भारतीय जनता पार्टी निर्दलीय विधायकों पर ही दाँव खेलने जा रही है.

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