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EXCLUSIVE : जंग पर उतारू हैं जिनपिंग, पूरी तरह रेडी हुई PLA, एशिया में अब होगी WAR !

खबर है कि चीन के राष्ट्रपति शी जिनफिंग ने अपनी सेना को युद्ध के लिए तैयार रहने को कहा है। शी चीन के गुआंगडोंग प्रांत के एक सैन्य बेस का दौरा करने गए थे। वहां उन्होंने सैनिकों से देश के प्रति एकनिष्ठ, शुद्ध और भरोसेमंद बने रहने को कहा और साथ ही उनको हिदायत देते हुए कहा कि वे दिल-दिमाग से युद्ध के लिए तैयार रहें। उन्होंने पीपुल्स लिबरेशन आर्मी, पीएलए को युद्ध के लिए हाई लेवल एलर्ट की तैयारी बनाए रखने को कहा है। सवाल है कि क्या शी जिनफिंग ने हाई लेवल एलर्ट की तैयारी भारत के संदर्भ में कही है और इस भाषण के बाद भारत को एलर्ट हो जाना चाहिए? भारत को यह मान कर अपनी तैयारियां करनी चाहिए कि इन सर्दियों में चीन के साथ युद्ध हो सकता है?

हो सकता है कि चीन के राष्ट्रपति ताइवान के साथ बढ़ते तनाव के संदर्भ में यह बात कह रहे हों। क्योंकि ताइवान के साथ चीन का टकराव बढ़ा है और गुआंगडोंग में शी के भाषण से पहले चीन के विदेश मंत्रालय ने मीडिया में आ रही खबरों के हवाले से कहा था कि अमेरिका की ओर से ताइवान को अत्याधुनिक हथियार दिए जाएंगे। चीनी विदेश मंत्रालय ने कहा था कि अमेरिकी कांग्रेस ताइवान को अत्याधुनिक हथियार देने के तीन सौदों की समीक्षा कर रही है। चीन इसका जवाब देने की तैयारी कर रहा है।

सो, संभव है शी अपने सैनिकों को ताइवान की सीमा पर युद्ध की तैयारी के लिए कह रहे हों। परंतु इसे एक इशारा मान कर भारत को भी अपनी तैयारियां करनी होंगी। ध्यान रहे चीन ने पिछली बार भी धोखे में रख कर भारत पर हमला किया था। उसका इरादा भारत को नुकसान पहुंचाने का है। वह सिर्फ सैन्य टकराव में भारत को परेशान नहीं करना चाहता है, बल्कि युद्ध के खर्च से भारत की आर्थिकी का भट्ठा बैठाने की भी उसकी सोच होगी। क्योंकि उसे पता है कि आर्थिक रूप से मजबूत भारत उसके लिए ज्यादा बड़ा खतरा है। इस समय कोरोना वायरस को रोकने के लिए भारत में लागू की गई गलत नीतियों के कारण भारत की अर्थव्यवस्था बुरी दशा में हैं। पिछले दिनों अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ने भारत में पूरे साल में देश की जीडीपी में 10 फीसदी से ज्यादा गिरावट का अनुमान जताया है। इसी समीक्षा में पूरी दुनिया की बड़ा अर्थव्यवस्थाओं में चीन इकलौता देश है, जिसकी अर्थव्यवस्था सकारात्मक रहनी है। तभी हो सकता है कि भारत की बिगड़ती आर्थिक हालत को चीन और झटका देने का प्रयास करे।

भारत को भी चीन की नीयत का अंदाजा हो गया है। उसके साथ सैन्य और कूटनीतिक स्तर पर जितनी वार्ता हो रही है उससे कोई नतीजा नहीं निकल रहा है। इसलिए भारत को यह अहसास हो रहा है कि चीन मामले को उलझाए रखना चाहता है। जून में गलवान घाटी में दोनों देशों के सैनिकों के बीच टकराव हुआ था। उसके बाद से दोनों देशों के बीच सात दौर की वार्ता हो चुकी है। पिछले दो वार्ताओं में तो भारत के सैन्य कमांडर के साथ विदेश मंत्रालय के संयुक्त सचिव स्तर के अधिकारी भी शामिल हो रहे हैं। परंतु जून में बात जहां से शुरू हुई थी वहीं अटकी है। भारत बार-बार चीन को कह रहा है कि वह विवाद की जगह पीछे हटे परंतु वह पीछे हटने को राजी नहीं हो रहा है। उलटे उसने विवाद का नया मोर्चा खोला है। उसने लद्दाख को केंद्र शासित प्रदेश बनाने के भारत सरकार के फैसले को मानने से इनकार कर दिया है। उसने कहा है कि भारत ने अवैध तरीके से लद्दाख को केंद्र शासित प्रदेश बनाया है। वह पूर्वी लद्दाख के कई ऐसे हिस्सों पर दावा कर रहा है, जहां इतिहास में कभी भी चीन का कब्जा नहीं रहा है। वह हर तरह की संधियों और ऐतिहासिक साक्ष्यों में स्वीकृत भारतीय हिस्से पर अपना दावा कर रहा है। उसने अरुणाचल प्रदेश को दक्षिण तिब्बत का हिस्सा बता कर उस पर दावा किया है कि अरुणाचल प्रदेश के दूसरी ओर स्थिति भूटान के पूर्वी हिस्से पर भी अपना दावा किया है। कहां तो उसे पूर्वी लद्दाख में पैंगोंग झील के दक्षिण किनारे, गोगरा हॉट स्प्रिंग्स और देपसांग के मैदानी इलाकों में पीछे हटना था तो वह उलटे नहीं हिस्सों पर कब्जे का दावा करने लगा है।

यह मामूली बात नहीं है कि अमेरिका के विदेश मंत्री माइक पोम्पियो ने बताया कि चीन ने भारत के साथ लगती वास्तविक नियंत्रण रेखा पर 60 हजार सैनिक तैनात किए हैं। जाहिर है सर्दियां शुरू होने से पहले 60 हजार सैनिक तैनात करने का मकसद सिर्फ अपनी सीमा की रक्षा करना नहीं है। चीन को पता है कि भारत किसी भी देश की सीमा का अतिक्रमण नहीं करता है। तभी ऐसा लग रहा है कि चीन युद्ध की तैयारी कर रहा है। अमेरिका के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार रॉबर्ट ओ ब्रायन कह चुके हैं कि चीन के साथ बातचीत से काम नहीं चलेगा। इसका मतलब है कि भारत को युद्ध के लिए तैयार रहना होगा। भारत की तैयारियों में कमी नहीं है। वायु सेना में राफेल को शामिल कर लिया गया है और लेह के एयर बेस से भारत के लड़ाकू विमान उड़ान भर रहे हैं। सैनिकों की तैनाती भी बढ़ाई गई है और भारत ने टी-72 व टी-90 टैंक भी तैनात किए हैं। इन तैयारियों के साथ साथ भारत को चीन की मंशा के प्रति भी सतर्क रहना होगा और उसकी तैयारियों के बारे में खुफिया सूचने देने वाले तंत्र को मजबूत करना होगा।

भारत और चीन के बीच टकराव की संभावनाओं पर कई दूसरी चीजों का असर भी हो सकता है। जैसे अमेरिका में नवंबर के पहले हफ्ते में चुनाव है। उसके नतीजों का असर भी भारत-चीन के रिश्तों को प्रभावित करेगा। भारत और अमेरिका के रिश्तों में आई करीबी ने चीन को सबसे ज्यादा परेशान किया था। अमेरिका के नए राष्ट्रपति का चीन और भारत के प्रति क्या रुख रहता है, इससे भी सीमा के हालात पर असर होगा। कोरोना वायरस की वैश्विक स्थिति, उसे संभालने में भारत की सफलता और आर्थिकी को पैरों पर खड़ा किए जा रहे प्रयासों के असर पर भी चीन की नजर होगी। सीमा पर के हालात इनसे भी प्रभावित होंगे।

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