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Exit Polls की बात : तेजस्वी की लहर में जेडीयू हो गई बर्बाद, कांग्रेस से भी कम पर नीतीश कुमार?

पटना :  एग्जिट पोल के अनुमान इस बार नीतीश कुमार के लिए सही नहीं हैं। तमाम एजेंसियों की रिपोर्ट देखें तो बिहार में जेडीयू की हालात कांग्रेस जैसी होने वाली है। आजतक-एक्सिस माई इंडिया के एग्जिट पोल के अनुसार एनडीए के खाते में सिर्फ 69-91 में सीटें जाती दिख रही हैं। ये सीटें बीजेपी और जेडीयू की हैं। ऐसे में सवाल है कि क्या जेडीयू बिहार में कांग्रेस की तरह हो जाएगी। हालांकि 2015 के चुनाव में कांग्रेस ने अपनी प्रदर्शन में सुधार किया था।

ऐसे में सवाल यह है कि क्या एग्जिट पोल के अनुसार ही नीतीश कुमार के लिए जमीन पर भी हालात थे। बिहार में चुनावी सभाओं के दौरान नीतीश कुमार को कई जगहों पर विरोध का सामना करना पड़ा था। साथ ही नीतीश के प्रति ग्राउंड लेवल पर नाराजगी कहीं ज्यादा थी। ये नाराजगी नीतीश से उम्मीदों को लेकर थीं। लोग सीधे तौर पर मान रहे थे कि शुरुआत में नीतीश ने काफी अच्छा काम किया है। बिहार में सड़क और बिजली की स्थिति में सुधार हुई है।

यहां से उलझने लगे नीतीश
जून 2013 के बाद से नीतीश कुमार पर सवाल उठने लगे हैं। नरेंद्र मोदी के नाम पर उन्होंने जून 2013 के चुनाव में एनडीए से नाता तोड़ लिया था। इसके बाद से नीतीश कुमार कुर्सी बचाने की जुगत में लगे रहे हैं। 2014 के लोकसभा चुनाव में नीतीश अकेले मैदान में उतरे लेकिन मोदी लहर में करिश्मा नहीं कर पाए। उनकी पार्टी की करारी हार हुई। उसके बाद हार की जिम्मेदारी नीतीश ने खुद लेते हुए सीएम पद से इस्तीफा दे दिया था। उसके बाद जीतनराम मांझी की ताजपोशी हुई थी। लेकिन नीतीश के सामने सियासी वजूद को बनाए रखने की सबसे बड़ी चुनौती थी।

महागठबंधन में हुए शामिल
2015 के विधानसभा चुनाव से पहले अपने धुर विरोधी रहे लालू प्रसाद यादव से नीतीश ने हाथ मिला लिया। उसके बाद मांझी के हाथ से कुर्सी चली गई। नीतीश कुमार फिर से गद्दी पर काबिज हो गए। 2015 के विधानसभा चुनाव में महागठबंधन को आपार सफलता मिली थी। लेकिन नीतीश कुमार 2 साल भी महागठबंधन में नहीं रह पाए। लालू परिवार पर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों के बाद उन्होंने सीएम पद से इस्तीफा दे दिया और बीजेपी के साथ उन्होंने फिर से सरकार बना ली है। उसके बाद से ही नीतीश के इकबाल पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

क्यों है नाराजगी
नीतीश कुमार ने अपने कार्यकाल के दौरान सात निश्चय योजना को धरातल पर उतारने की कोशिश की है। लेकिन भ्रष्टाचार की वजह से इन योजनाओं में पलीता लग रहा है। इसके साथ ही कोरोना काल में बिहार लौटे मजदूरों में नीतीश के प्रति काफी नाराजगी है। ऐसे में लोग बदलाव की मांग कर रहे थे। बिहार के विभिन्न जिलों के मजदूरों का कहना है कि बिहार लौटने के बाद हमारे पास काम नहीं है और करने के लिए भी कुछ नहीं है। एग्जिट पोलों के अनुसार बिहार में बेरोजगारों ने भी इस बार नीतीश का खेल बिगाड़ दिया है।

कितनी सीटें मिल रही हैं कांग्रेस को
आजतक-एक्सिस माई इंडिया के एग्जिट पोल के अनुसार बिहार में कांग्रेस 70 में से 35 सीटें जीत रही हैं। यानी की कांग्रेस का स्ट्राइक रेट 50 फीसदी रहेगा। जबकि जेडीयू राज्य में 115 सीटों पर चुनाव लड़ रही है। एग्जिट पोल अनुमान के अनुसार जेडीयू को 24 से 34 सीटें मिलती दिख रही हैं। अगर एग्जिट पोल की तरह ही चुनाव परिणा रहें तो जेडीयू की हालत कांग्रेस से भी बिहार में खराब हो जाएगी। साथ ही जेडीयू के पास नीतीश कुमार के बाद कोई चेहरा भी नहीं है। 2015 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस 41 में से 27 सीटें जीतने में कामयाब रही थी। जबकि जेडीयू 101 में से 71 सीटों पर जीत हासिल की थी।

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