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मॉब लिंचिंग में अगर मरता है सिर्फ गरीब, तो कानून क्यों नहीं बनाती सरकार ?

केंद्रीय गृहमंत्री और भारतीय जनता पार्टी अध्यक्ष अमित शाह ने मॉब लिंचिंग पर बड़ा बयान दिया है। अमित शाह ने कहा है कि लिंचिंग गरीब के साथ होती है, किसी खास जाति के खिलाफ नहीं। एक इंटरव्यू में उन्होंने बीजेपी के राज में लिंचिंग बढ़ने की बात को खारिज कर दिया और कहा कि यह पहले भी होती थी। गृह मंत्री ने कहा कि आज लिंचिंग को एक रंग दिया जाता है।

आश्चर्य है जो पार्टी जुर्म को ख़त्म करने के बड़े- बड़े दावे करती है आखिर वह इस जघन्य अपराध पर कोई विशेष पहल क्यों नहीं करती है ? इस मामले पर गृह मंत्री ने कहा कि जागरूकता से इसे खत्म किया जा सकता है। आज देश मॉब लिंचिंग सबसे बड़ा मुद्दा है, भीड़ केवल एक ही व्यक्ति को नहीं मारती है बल्कि उस व्यक्ति से जुड़े हुए सभी सदस्यों की हत्या होती है जिस घर का मुखिया उन्हें सड़क पर छोड़ के जा चुका होता है।

पिछले कुछ समय में देश के अलग-अलग हिस्सों में कई लोग भीड़ की हिंसा का शिकार हुए हैं। कुछ समय पहले ही झारखंड में चोरी के आरोप में भीड़ ने तबरेज अंसारी नाम के युवक की पीट-पीटकर हत्या कर दी थी। इसके अलावा राजस्थान के अलवर में कथित गो तस्करी को लेकर भीड़ ने पहलू खान को अपना निशाना बनाया था। इस घटना में पहलू खान की मौत हो गई थी।

2019 में हुए भीड़ हत्या के चंद मामले

26 जून,2019 , गुजरात : अहमदाबाद में लगभग 30 लोगों की भीड़ द्वारा एक 40 वर्षीय महिला की पीट-पीटकर हत्या कर दी गई थी

एक अन्य घटना में, सूरत में एक 45 वर्षीय महिला पर हमला किया गया था

22 जून, 2019 छत्तीसगढ़ : छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले में एक अज्ञात व्यक्ति की कथित तौर पर भीड़ द्वारा पीट-पीटकर हत्या कर दी गई।

19 जून, 2019 उत्तर प्रदेश : उत्तर प्रदेश के हापुड़ जिले में गोहत्या की अफवाह के चलते एक व्यक्ति को मौत के घाट उतार दिया गया।

13 जून 2019 , पश्चिम बंगाल : पश्चिम बंगाल के मालदा जिले में बाल-बाल बचे होने के संदेह में एक व्यक्ति को मौत के घाट उतार दिया गया।

8 जून 2019 , असम : 8 जून को असम के कार्बी आंगलोंग जिले में दो लोगों को मौत के घाट उतार दिया गया था। पीड़ितों की पहचान नीलोत्पल दास के रूप में हुई थी

8 जून 2019 , महाराष्ट्र : महाराष्ट्र के औरंगाबाद जिले में भीड़ द्वारा दो लोगों की पीट-पीटकर हत्या कर दी गई। पुलिस ने कहा कि व्हाट्सएप पर प्रचलन में नकली संदेशों के माध्यम से लिंचिंग शुरू की गई थी।

28 मई, 2019 आंध्र प्रदेश : एक ट्रांसजेंडर को एक बच्चे को उठाने वाले गिरोह का हिस्सा होने के संदेह में 500 से अधिक लोगों की भीड़ द्वारा पाला गया था।

25 मई 2019 , कर्नाटक: एक बच्चे को उठाने के संदेह पर एक भीड़ ने एक 26 वर्षीय व्यक्ति को मौत के घाट उतार दिया। लिंचिंग के वीडियो वायरल

24 मई, 2019 तेलंगाना : 24 मई को तेलंगाना से भीड़ के अलग-अलग होने की दो अलग-अलग घटनाएं दर्ज की गईं –  निज़ामाबाद और यादाद्री जिले में हत्या हुयी।

10-11 मई 2019 , तमिलनाडु: तमिलनाडु में 24 घंटे की अवधि में लिंचिंग के दो मामले सामने आए। पहली घटना में, एक आदमी था और दूसरी 60 वर्षीय महिला को तिरुवन्नमलाई में बच्चों को “विदेशी चॉकलेट” देने के लिए लताड़ा गया था।

अधिकतर मॉब लीचिंग के मामलों में वीडियो वायरल होते है जिनमे हत्या करने वाले को साफ तौर पर पहचाना जा सकता है लेकिन फिर भी उनके खिलाफ 302 के आधार पर मामला दर्ज नहीं होता है। जब जनता मॉब लीचिंग जैसे मुद्दों पर सरकार से कार्यवाही की बात करती है। तो सरकार कहती है कि हमारे पास पर्याप्त कानून है लेकिन ऐसी हिंसा दिन प्रति दिन बढ़ती जा रही है। ऐसे में कैसे लगेगी इन पर रोक ?

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