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IPL 2020 का सबसे बड़ा सवाल- रोहित को कॉपी क्यों कर रहे हैं कोहली ?

साल 2013 में विराट कोहली को रॉयल चैलेंजर्स की कप्तानी मिली क्योंकि न्यूज़ीलैंड के डेनियल विटोरी कप्तानी में कुछ ख़ास नहीं कर पा रहे थे। मुंबई इंडियंस की कप्तानी उस साल ऑस्ट्रेलिया के रिकी पॉन्टिंग के हाथों में थी। विश्व कप विजेता पॉन्टिंग को क्रिकेट इतिहास के महानतम कप्तानों में गिनते हैं। लेकिन उस समय वह बल्लेबाज़ के तौर पर जूझ रहे थे। बहुत सोच-समझकर उन्होंने उसी सीज़न में लीग के बीच में ही रोहित शर्मा को अपना उत्तराधिकारी घोषित कर दिया।

पॉन्टिंग ने यह फैसला ड्रेसिंग रूम में बेहद नज़दीक से रोहित को देखने के बाद लिया था। 2015 में ऑस्ट्रेलिया में हुए वर्ल्ड कप के दौरान मुझे कई बार पॉन्टिंग से बात करने का मौक़ा मिला। उस वक़्त मैं जिस टीवी चैनल से जुड़ा था, वह उसके लिए एक्सपर्ट की भूमिका निभा रहे थे। एक शाम मेलबर्न में अपने घर के ठीक पीछे समुद्र तट पर बातचीत के दौरान उन्होंने बताया कि वह रोहित की एग्रेसिव सोच के मुरीद हैं। इसलिए उन्हें कप्तानी छोड़ने में कोई हिचकिचाहट नहीं हुई। उनका यह फैसला सही साबित हुआ। अपनी कप्तानी के पहले ही साल में रोहित ने मुंबई इंडियंस को चैंपियन बनवा दिया। इसके बाद 2015, 2017 और 2019 में भी उन्होंने अपनी टीम को आईपीएल ट्रोफी दिलाई।

उसी दौर में 7 साल तक कप्तानी करते हुए कोहली एक बार भी बैंगलोर को चैंपियन नहीं बना पाए, जबकि 2015 से तो वह टीम इंडिया की कप्तानी की ज़िम्मेदारी (टेस्ट क्रिकेट में ) भी ले चुके थे। कोहली बल्लेबाज़ के तौर पर रोहित के बहुत बड़े प्रशंसक रहे हैं और सार्वजनिक तौर पर उन्हें ख़ुद से बेहतर बल्लेबाज़ भी बता चुके हैं। लेकिन कप्तानी के मामले में कभी कोहली ने रोहित की काबिलियत का लोहा नहीं माना।

वजह शायद यह होगी कि अगर वह ऐसा करते तो भविष्य में टीम इंडिया की कप्तानी के लिए रोहित का दावा मज़बूत होता और वह कोहली के लिए चुनौती बन जाते। यूं भी जब-जब कोहली ने टीम इंडिया के लिए खेलने की बजाए आराम करने का फैसला किया तो रोहित ने सफ़ेद गेंद वाले क्रिकेट में कभी सिंगर निधास ट्रोफी जीत ली तो कभी एशिया कप। कई बार यह चर्चा तक हुई कि सफ़ेद गेंद के क्रिकेट में रोहित को टीम इंडिया की कप्तानी दे देनी चाहिए।

इन सबके बीच शायद कोहली यह सोचते रहे होंगे कि आख़िर वह कौन-सी बात है, जिसके चलते आईपीएल में रोहित को हर दूसरे साल ट्रॉफी मिल जाती है और वह हाथ मलते रह जाते हैं। कोहली को लगता था कि वह सिर्फ अपने बल्ले के दम पर ख़िताब जीत सकते हैं। 2016 में वह इस सोच को पूरा करने के बेहद क़रीब भी आए, जब उनकी टीम फाइनल में पहुंची। लेकिन ट्रोफी तक पहुंचने की आख़िरी सीढ़ी वह नहीं चढ़ पाए। फाइनल में टीम हार गई।

कई बार बल्लेबाज़ मैच की तस्वीर बदल देता है, लेकिन अगर आपको लगातार अच्छा करना हो तो टीम में बढ़िया गेंदबाज़ होने चाहिए। इन गेंदबाज़ों की बदौलत ही कोई टीम बार-बार टूर्नामेंट जीतती है। रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर के पास कोहली और एबी डीविलियर्स जैसे महानतम बल्लेबाज़ हैं। इसके बावजूद टीम हमेशा निराश करती आई है। पहले तो इस टीम में क्रिस गेल से लेकर युवराज सिंह जैसे कई दिग्गज बल्लेबाज़ रह चुके हैं, लेकिन वे भी ट्रोफी नहीं दिला पाए।

अब थक-हारकर कोहली इस आईपीएल में रोहित का स्टाइल कॉपी कर रहे हैं। देर से ही सही उन्हें इसका अहसास हो गया है कि धुरंधर बल्लेबाज़ों के साथ विविधता वाली सटीक गेंदबाज़ी से काम बन सकता है। मुंबई इंडियंस के साथ गेंदबाज़ी में कभी ऐसी दिक्क़त नहीं रही। इस साल भी उसके पास न सिर्फ बेमिसाल जसप्रीत बुमरा बल्कि उनका साथ देने के लिए बाएं हाथ के ट्रेंट बोल्ट जैसे शानदार गेंदबाज़ हैं।

ऑस्ट्रेलिया के जेम्स पैटिंसन, नेथन कुल्टर-नायल भी दुनिया के उम्दा तेज़ गेंदबाज़ों में शामिल हैं तो स्पिन डिपार्टमेंट में किफ़ायती राहुल चाहर और सदाबहार क्रुणाल पंड्या हैं। गेंदबाज़ी में मुंबई की ताक़त का अंदाज़ा इसी बात से लगाया जा सकता है कि रोहित ने हार्दिक पंड्या को बॉल नहीं थमाई। और तो और पोलार्ड का भी हर मैच में रोहित पूरे चार ओवर इस्तेमाल नहीं करते।

2013 में रोहित ने हरभजन सिंह, मिचेल जॉनसन और लसिथ मलिंगा की तिकड़ी के बूते ट्रोफी अपने नाम की तो 2015 में ऑस्ट्रेलियाई जॉनसन की जगह न्यूज़ीलैंड के मिचेल मैक्लिनाघन, 2017 में बुमरा-मैक्लिनाघन की जोड़ी ही टीम को तीसरी बार चैंपियन बनाने के लिए काफी साबित हुई। रोहित ने न सिर्फ चार बार आईपीएल जीतकर भारतीय इतिहास के महानतम कप्तान महेंद्र सिंह धोनी को पीछे छोड़ दिया बल्कि यह भी जता दिया कि उनके पास इसके लिए सटीक फॉर्म्युला है।

रोहित शर्मा के इस प्रयोग को पूरी दुनिया के अलग-अलग टी-20 टूर्नामेंट में भी आज़माया जा रहा है। 2017 में whiteballanalytics.com ने एक सर्वे किया। इसमें दुनियाभर के तमाम टी-20 टूर्नामेंट के साथ वनडे क्रिकेट और टी20 वर्ल्ड चैंपियन टीमों की जीत पर अध्ययन किया गया। इससे पता चला कि क़रीब 54 फ़ीसदी टूर्नामेंट जीतने वाली टीमों के पास नंबर वन टॉप क्लास के गेंदबाज़ थे। सिर्फ 21 प्रतिशत चैंपियन टीमों के पास नंबर वन बैटिंग यूनिट थी। यानी गेंदबाज़ों पर भरोसा करने का रोहित का फॉर्म्युला कोहली के बल्लेबाज़ी पर ज़ोर देने वाले तरीक़े से कई गुणा बेहतर था।

कोहली ने भी मुंबई इंडियंस के इस तरीक़े को अपनाया है। इस साल अगर उनकी टीम ने बेहतरीन उम्मीदें जगाई हैं तो इसके लिए बल्लेबाज़ी नहीं बल्कि युजवेंद्र चहल, वॉशिंगटन सुंदर जैसे पावर-प्ले के बेहतरीन गेंदबाज़ हैं। साथ ही क्रिस मॉरिस और नवदीप सैनी जैसे तेज़ गेंदबाज़ भी, जो डेथ ओवर्स की समस्या को सुलझा सकते हैं। बल्लेबाज़ी क्रम में डीविलियर्स को छोड़ दिया जाए तो किसी ने भी ऐसा हैरतअंगेज खेल नहीं दिखाया है।

अब तक इस सीज़न के टॉप 10 बल्लेबाज़ों में रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर के कोहली ही शामिल हैं। लेकिन सबसे ज़्यादा असर डालने वाले गेंदबाज़ों की लिस्ट में बैंगलोर के मॉरिस और सुंदर टॉप-4 में शुमार हैं। चहल भी इसमें 13वें नंबर पर हैं। क्या अच्छे गेंदबाज़ों की मदद से कोहली इस साल ट्रोफी अपने नाम कर पाएंगे? इस सवाल का जवाब अभी देना ठीक नहीं होगा, लेकिन पॉइंट्स टेबल में कई मौक़ों पर कोहली की टीम ने मुंबई इंडियंस को टॉप पोज़िशन से पीछे तो धकेला ही है।

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