Wednesday , October 28 2020
Breaking News
Home / ख़बर / 92 साल के ये बुजुर्ग लाए अदालत में ‘संजीवनी’, कौन हैं कलियुग के ये ‘रामदूत’ ?

92 साल के ये बुजुर्ग लाए अदालत में ‘संजीवनी’, कौन हैं कलियुग के ये ‘रामदूत’ ?

अयोध्या में बाबरी मस्ज़िद और राम जन्मभूमि मंदिर की विवादित 2.77 एकड़ ज़मीन को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई पूरी हो चुकी है। सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायमूर्ति रंजन गोगोई के नेतृत्व वाली 5 जजों जस्टिस एस.ए. बोबड़े, जस्टिस डी.वाई. चंद्रचूड़, जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस एस.ए. नज़ीर की संविधान पीठ ने विवादित ज़मीन पर बाबरी मस्ज़िद और राम जन्मभूमि मंदिर से जुड़ी दोनों पक्षों की दलीलें सुनी, जो 40 दिन चलीं। हालाँकि अभी पीठ ने कोई फैसला नहीं दिया है और फैसला सुरक्षित रखा है। अभी पीठ दोनों पक्षों की दलीलों पर आम सहमति बनाने के लिये आपस में चर्चा कर रही है। पाँचों जजों की कोशिश है कि फैसला बहुमत से नहीं बल्कि आम सहमति से हो तो ज्यादा अच्छा रहेगा। अदालत का फैसला आने से पहले कानूनी विशेषज्ञ दलीलों के आधार पर अपने-अपने कयास लगाने में जुटे हैं। अधिकांश विशेषज्ञों का अनुमान है कि अदालत का फैसला भगवान राम के मंदिर के पक्ष में आने की उम्मीद है।

इसमें कोई दो मत नहीं कि सुप्रीम कोर्ट के सबसे वयोवृद्ध और अनुभवी वकील के. परासरण ने राम जन्मभूमि से जुड़े साक्ष्यों को मजबूती के साथ शीर्ष अदालत के समक्ष रखा है। यदि अदालत का फैसला राम लला के पक्ष में आता है तो इसका सीधा अर्थ यह होगा कि हिंदू पक्ष की ओर से के. परासरण द्वारा अदालत में पेश किये गये अकाट्य साक्ष्य ही राम लला के लिये ‘संजीवनी’ बनेंगे। जैसे हनुमान रातों रात लंका से हिमालय आये थे और यहाँ से संजीवनी बूटी वाला पर्वत उठा कर लंका ले गये थे तथा अपने भाई लक्ष्मण के लिये विलाप कर रहे भगवान राम को संजीवनी बूटी लाकर संतुष्ट किया था, वैसे ही के. परासरण भी सुनवाई के अंतिम दिन ब्रिटेन की लाइब्रेरी में रखे ई. स. 1810 के एक नक्शे को खोज कर अदालत के समक्ष ले आये थे, जिसे एक पूर्व आईपीएस अधिकारी किशोर कुणाल ने अयोध्या में राम मंदिर पर लिखी अपनी पुस्तक ‘अयोध्या रीविजिटेड’ में राम मंदिर के अस्तित्व के पक्ष में प्रकाशित किया था। इससे पहले भी परासरण ने अयोध्या में विवादित भूमि पर ढहाये गये बाबरी मस्ज़िद के ढाँचे के नीचे राम मंदिर के अवशेष मौजूद होने के पक्ष में सर्वोच्च अदालत के समक्ष कई ठोस और अकाट्य साक्ष्य प्रस्तुत किये हैं, जिनका प्रति वादी मुस्लिम पक्ष के वकील के पास कोई तोड़ नहीं था। आइये जानते हैं कौन हैं वे रामदूत हनुमान ?

भारत के न्यायिक इतिहास की अनूठी घटना

सामान्यतः जब कोर्ट में कोई मामला जाता है तो वादी और प्रतिवादी दो पक्ष होते हैं। दोनों पक्षों के वकील अदालत में अपना-अपना पक्ष रखते हैं और न्यायाधीश के समक्ष दोनों की ओर से दलीलें, सबूत और गवाह पेश किये जाते हैं, परंतु देश के न्यायिक इतिहास में यह पहली बार देखने को मिल रहा है, जहाँ वादी प्रत्यक्ष स्वरूप में उपस्थित नहीं है और उसकी ओर से एक 92 वर्ष के वयोवृद्ध एडवोकेट सुप्रीम कोर्ट में अप्रत्यक्ष व्यक्ति की पैरवी कर रहे हैं। वह अप्रत्यक्ष व्यक्ति हैं भगवान श्री राम और उनके रामदूत हैं सुप्रीम कोर्ट में उनकी पेरोकारी करने वाले वयोवृद्ध एडवोकेट परासरन (PARASARAN)। दोनों दूत एक ही नामाराशि के हैं। हनुमानजी को पवनसुत और पवनपुत्र भी कहते हैं, वहीं वयोवृद्ध पेरोकार एडवोकेट का नाम भी परासरन है।

कौन हैं कलियुग के रामदूत ?

92 वर्षीय वयोवृद्ध सीनियर एडवोकेट परासरन का जन्म 1927 को तमिलनाडु के श्रीरंगम में हुआ था। उनके पिता का नाम केसवा अयंगर था और वह मद्रास हाईकोर्ट तथा सुप्रीम कोर्ट के वकील थे। परासरन के तीन बेटे हैं – मोहन, सतीश और बालाजी। तीनों बेटे भी पेशे से वकील हैं। परासरन ने 1958 से सुप्रीम कोर्ट में अपनी प्रैक्टिस शुरू की। आपातकाल के दौरान वह तमिलनाडु के एडवोकेट जनरल थे और 1980 में देश के सॉलिसिटर जनरल नियुक्त किये गये थे। 1983 से 1989 तक उन्होंने भारत के अटॉर्नी जनरल के रूप में काम किया। वह 1970 के दशक से ही खासे लोकप्रिय रहे हैं। हिंदू धर्मग्रंथों पर उनकी खासी पकड़ है। यूपीए-2 के कार्यकाल में वह कुछ समय के लिये सोलिसिटर जनरल थे। 92 वर्ष के अत्यंत वयोवृद्ध परासरन 2016 से कोर्ट में बहुत कम दिखते हैं, परंतु वर्तमान में वह दो बड़े केसों के चलते एक बार फिर सुर्खियों में आये हैं। पहले सबरीमाला और अब अयोध्या केस।

loading...
loading...

Check Also

वीडियो : Youtuber ने ब्रांड-न्यू Mercedes को लगा दी आग, वजह कर देगी हैरान !

एक रूसी यूट्यूबर ने अपनी 1 करोड़ की मर्सिडीज कार जला दी। उनके इस कारनामे ...