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WHO ने नक्शे में J&K और लद्दाख को भारत से अलग दिखाया, क्या कोई एक्शन लेगी मोदी सरकार?

पिछले कुछ वक्त से दुनिया की कई संस्थाओं और संगंठनों ने भारत के खिलाफ प्रतिक्रिया दिखाते हुए. कभी कश्मीर तो कभी लद्दाख को भारत के नक़्शे से बाहर दिखाया हैं. अब इसमें चाहे विकिपीडिआ की बात हो या फिर यूनाइटेड अरब अमीरात की. इनकी ऐसी हरकतों के बाद भारत ने कड़ी प्रतिक्रिया दिखाते हुए एक्शन लिया था. जिसके बाद उन्होंने माफी मांगते हुए अपनी गलती पर अफ़सोस व्यक्त किया था. लेकिन एक बार फिर विश्व की एक जानी मानी संस्था ने भारत पर निशाना साधते हुए कश्मीर और लदाख को भारत के नक़्शे से बाहर दिखाया हैं. और ये संस्था कोई और नहीं बल्कि World Health Organisation (WHO) हैं.

दरअसल WHO ने अपने एक नक्शे में जम्मू और कश्मीर के साथ लद्दाख को भारत से अलग दर्शाया है. यह कलर कोडेड मैप डब्ल्यूएचओ की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध है. भारतीय हिस्सा इसमें नीले रंग से दिखाया गया है, जबकि जम्मू और कश्मीर व लद्दाख को ग्रे कलर से चिह्नित किया गया है. वैश्विक संस्था के इस मैप को लेकर ब्रिटेन में भारतीय प्रवासियों में खासा नाराजगी देखने को मिली है.

मैप में देश के दो नए केंद्र शासित प्रदेशों को ग्रे रंग से दिखाया गया है, जबकि भारत अलग नीले रंग वाले हिस्से में नजर आ रहा है. वहीं, अक्साई चिन का विवादित हिस्सा ग्रे रंग से दिखाया गया है, जिस पर नीले रंग की पट्टियां/धारियां हैं.

यह नक्शा WHO की ‘Covid-19 Scenario Dashboard’ में उपलब्ध है, जो कि देश के हिसाब से बताता है कि किस मुल्क में वैश्विक महामारी कोरोना वायरस के कितने पुष्ट मामले हैं और उससे कितनी मौतें हुई हैं. हालांकि, मैप पर पनपे विवाद को लेकर WHO ने साफ किया है कि वह United Nation के दिशा-निर्देशों का पालन करता है और उसी हिसाब से मैप्स को पढ़ता, समझता और देखता है.

दरअसल, लंदन में रहने वाले आईटी कंसल्टेंट पंकज की नजर इस मैप पर सबसे पहले पड़ी. उनके मुताबिक, किसी WhatsApp ग्रुप पर इसे शेयर किया गया था. उन्होंने अंग्रेजी अखबार ‘Times of India’ को बताया, “जम्मू कश्मीर और लद्दाख को दूसरे रंग के साथ देखकर मैं हैरान रह गया था. तो इसके साथ उन्होंने इन सब के पीछे चीन का हाथ बताया हैं, और इसकी वजह उन्होंने बताई हैं कि WHO चीन काफी मोटी फंडिंग देता है. तो हो सकता हैं कि चीन के दबाव में आकर WHO ने ये किया हो”

इसके बाद पंकज ने कहा कि “मैं हैरत में पड़ गया था कि डब्ल्यूएचओ जैसी बड़ी संस्थान भी ऐसा कर सकती है. मुझे मालूम है कि चीन डब्ल्यूएचओ को मोटा फंड देता है और पाकिस्तान को चीन से कर्ज मिलता है. मुझे लगता है कि इसके पीछे चीन है, क्योंकि WHO पर चीन का काफी अधिक असर दिखता है.”

तो वहीं प्रवासी समूह Reach India (UK) में सोशल मीडिया हेड नंदिनी सिंह भी इस मामले में WHO पर भड़कीं. अखबार को उन्होंने बताया- कोरोना के लिए भारत ने जो किया दुनिया भर में पीपीई किट्स की सप्लाई और संभावित वैक्सीन, उसके लिए शुक्रिया अदा करने के बजाय वह इंडिया को ही नुकसान पहुंचाने की कोशिश कर रहा है. उसे इसके लिए माफी मांगनी चाहिए और अपनी गलती को सुधारना चाहिए.

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