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मेट्रोपॉलिटन कोर्ट ने भी जमातियों को बताया बेकसूर, जज बोले- कोरोना फैलने में इनका कोई दोष नहीं

दिल्ली के निजामुद्दीन मरकज एक कार्यक्रम में शामिल होने आए तब्लीगी जमात के विदेशी सदस्यों पर जानबूझकर कोरोनावायरस का प्रसार करने के आरोप लगाए गए थे। जिसके चलते उन्हें गिरफ्तार किया गया था। मुंबई की एक अदालत ने अब इंडोनेशिया के 12 नागरिकों को इस अपराधिक मामले से आरोप मुक्त कर दिया है।

मेट्रोपॉलिटन मैजिस्ट्रेट जी वाई घुले ने इंडोनेशिया के 12 नागरिकों को आरोप मुक्त किया है। जिन्हें दिल्ली की निजामुद्दीन मरकज के कार्यक्रम में शामिल होने के बाद मुंबई की यात्रा के दौरान हिरासत में लिया गया था।

कोर्ट का कहना है कि उन्होंने कोरोना संक्रमण को फैलाने के लिए लापरवाही से काम नहीं किया। न ही उन्होंने अधिकारियों के आदेशों की अवहेलना की। यह जानकारी उनके वकील इशरत खान ने भी दी है।

गौरतलब है कि हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने तब्लीगी जमात मामले पर मोदी सरकार को फटकार भी लगाई है। सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि इस मामले में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार का सबसे ज्यादा दुरुपयोग किया गया है।

न्यूज़ चैनलों पर जानबूझकर तबलीगी जमात के सदस्यों को बदनाम किया गया। उन्हें कोरोना संक्रमण फैलाने का जिम्मेदार ठहराया गया।

इससे पहले इस मामले में मुंबई हाई कोर्ट की औरंगाबाद बेंच ने भी तबलीगी जमात इयों के खिलाफ दायर एफआईआर को खारिज कर दिया था। कोर्ट का कहना था कि तबलीगी जमात के विदेशी सदस्यों को बलि का बकरा बनाने के लिए चुना गया था।

दरअसल दिल्ली के निजामुद्दीन मरकज में जब तबलीगी जमात के सदस्य कोरोना पॉजिटिव पाए गए थे। उसके बाद देशभर में इस तरह के हालात बना दिए गए थे कि जैसे भारत में कोरोनावायरस तबलीगी जमात की वजह से ही फैला हो।

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