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OMG : 92 बार लड़ चुका है चुनाव, अब 93वीं बार किस्मत आजमाने उतर रहा है ये बुजुर्ग

चुनाव का खुमार पुरे देश में चढ़ा हुआ है. बंगाल, असम केरल हर जगह चुनाव की चर्चा है तो वहीं यूपी में भी जिला पंचायत चुनाव होने हैं. प्रत्याशी भी तैयारियों में लगे हुए हैं. और एक से एक बढ़कर एक प्रत्याशी सामने आ रहे हैं. जी हाँ उत्तर प्रदेश के आगरा से जिला पंचायत चुनाव में नामांकन के आखिरी दिन ऐसा ही एक दिलचस्प प्रत्याशी सामने आया. जिसके बारे में सुनकर आप हैरान रह जाएंगे. क्यूंकि इन जनाब की जितनी उम्र है उससे ज्यादा बार तो ये चुनाव लड़ चुके हैं. जी हाँ एक दो बार नहीं ये शख्स बल्कि 92 बार चुनाव लड़ चुका है. जी हाँ 92 बार. आप इस शख्स को देख लीजिये, यह हैं आगरा के खेरागढ़ के नगला दूल्हे गांव के निवासी नाम है हसनुराम अंबेडकरी. सन 1947 में इनका जन्म हुआ था. और अब हसनुराम 74 साल के हो चुके हैं. हैरान करने वाली बात यही है कि अंबेडकरी 74 साल की उम्र में 92 चुनाव लड़ चुके हैं.

सबसे पहले इन्होने सन 1985 में चुनाव लड़ा था. पहला चुनाव विधायकी के पद के लिए था. लेकिन अंबेडकरी हार गए, हार तो मिली लेकिन हौंसला नहीं टूटा. इसके बाद तो चुनाव लड़ना उनके लिए मानो एक पैसन बन गया हो. यही वजह है कि उन्होंने ग्राम प्रधान से लेकर वो तमाम चुनाव लड़े जो उनके सामने आए. अंबेडकरी ने ग्राम पंचायत सदस्य का चुनाव हो या विधायक, सांसद हो या राष्ट्रपति का चुनाव, हर किसी में नामांकन दाखिल किया है.

एक न्यूज़ चैनल से बात चित करते हुए हसनुराम ने कहा कि वह चुनाव जीतने के लिए नहीं हारने के लिए लड़ते हैं. ये बात हैरान करने वाली लगती है लेकिन हसनूराम के हौंसले के बारे में आपकी क्या राय है ये कमेंट बॉक्स में जरूर बताए. खैर आगे बढ़ते हैं. अंबेडकरी इस बार जिला पंचायत के वार्ड 31 से सदस्य के रूप में चुनाव लड़ने के लिए मैदान में उतरे हैं. चुनाव के लिए उन्होंने अपना नामांकन दाखिल किया है. न्यूज़ चैनल से बातचीत करते हुए अंबेडकरी ने अपने जीवन के बारे में छोटी सी झलक दी. उन्होंने कहा कि अगर जिंदा रहा तो 2022 का विधानसभा चुनाव भी लड़ लूंगा.

आपको बता दें कि हसनूराम पेशे से मनरेगा मजदूर है. हसनुराम का कहना है कि वो जो भी पैसा कमाते हैं, उसमें से आधा समाजसेवा पर खर्च कर देते हैं. हसनुराम के मुताबिक उनका उद्देश्य यही है कि वे चुनाव हारते रहें जिससे लोगों के बीच में ही हमेशा रहें. हसनुराम ने मजाकिया लहजे में कहा कि वो चुनाव जीत गए तो लोगों को पहचान भी नहीं पाएंगे. हसनुराम ने बताया कि फतेहपुर सीकरी लोकसभा सीट से भी चुनाव लड़ा था और करीब 4200 वोट पाए थे.

अब इस बारे में चुनाव में वो जीतेंगे या नहीं ये तो जनता बताएंगी लेकिन इतनी हार के बाद भी उनका हौसला नहीं डगमगाया है. और यही चीज लोकतंत्र को जीवित रखती है. जिसे जीत या हार से कोई मतलब नहीं, समाज सेवा ही उसके जीवन का लक्ष्य है.

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