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रोहिंग्याओं को मुर्गियों, बत्तखों और कबूतरों के साथ जहाजों पर लादा बांग्लादेश, मरने को सुनसान द्वीप भेजा!

रोहिंग्या मुसलमान विश्व परिदृश्य में सुर्खियों पर बने रहते हैं. म्यामार से निर्वासित हुए रोहिंग्या मुसलमान भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश में शरण लिए हुए हैं. इसमें बांग्लादेश में सबसे ज्यादा रोहिंग्या मुसलमान शरण लिए हुए हैं. यहां इनकी संख्या करीब 11 लाख है. अब इन शरणार्थियों को बांग्ला देश एक ऐसे द्वीप में भेज रहा है, जो सिर्फ दो दशक पहले अस्तित्व में आया था और यहां बड़े चक्रवाती तूफान आते रहते हैं. सरकार के इस कदम पर मानवाधिकर संगठन सवाल खड़े कर रहे हैं.

बांग्लादेश की सरकार म्यामार से भागकर आए लाखों रोहिंग्या मुसलमानों को एक नई जगह पर भेज रही है. शरणार्थी रोहिंग्या मुसलमानों के दूसरे जत्थे को बंगाल की खाड़ी में एक निचले द्वीप पर भेज दिया है. रहने के लिहाज से ये खतरनाक जगह है. मानवाधिकार संगठन इसका विरोध कर रहे है. इनका कहना है कि इस नए द्वीप पर तूफान का खतरा है और ऐसे में जीना मुश्किल हो जाएगा.

उधर संयुक्त राष्ट्र ने साफ किया है कि रोहिंग्याओं के स्थानांतरण के पीछे उसका हाथ नहीं है, क्योंकि कहा जा रहा था कि बांग्लादेश ने इसके लिए संयुक्त राष्ट्र संघ से अनुमति ले ली है. संयुक्त राष्ट्र संघ ने सरकार से आग्रह किया है कि किसी भी शरणार्थी को जबरन उस भसान चार द्वीप पर न भेजा जाए, जिसका 20 साल पहले ही उदय हुआ है.

यहां एक लाख रोहिन्याओं को बसाया जाएगा. (फोटो: सोशल मीडिया)

बांग्लादेश की नौसेना ने पांच जहाजों के जरिये 1,804 रोहिंग्याओं को उनकी मुर्गी, बतखों और कबूतरों के साथ इस द्वीप पर पहुंचाया. कोरोना महामारी को देखते हुए सभी शरणार्थियों को यात्रा के दौरान मास्क के साथ जीवन रक्षक जैकेट पहनाया गया था.

आपको बता दें कि इससे पहले म्यांमार में हिंसा के कारण वहां से भागे 1,642 शरणार्थियों के पहले जत्थे को चार दिसंबर को शरणार्थी शिविरों से इस निर्जन द्वीप पर भेजा गया था. रोहिंग्या म्यामांर के जातीय अल्पसंख्यक समुदाय हैं और वे 25 अगस्त, 2017 से यहां अपना घर-बार छोड़कर शरण लिए हुए हैं. शुरुआती ना-नुकुर के बाद बांग्लादेश ने उन्हें मानवीय आधार पर शरण दी थी.

आपको बता दें कि बांग्लादेश ने दक्षिणपूर्व कॉक्स बाजार के घने शरणार्थी शिविरों में रह रहे 11 लाख रोहिंग्याओं में से 100,000 शरणार्थियों को इन खतरनाक द्वीपों में भेजने की योजना बनाई है. बांग्लादेश ने कहा है कि रोहिंग्याओं को ठहराने के लिए इस द्वीप पर सुविधाओं के निर्माण पर 35 करोड़ अमेरिकी डॉलर खर्च किए गए हैं.

सहायता एजेंसियों और मानवाधिकार संगठनों ने रोहिंग्याओं को इस द्वीप पर भेजने पर कड़ी आपत्ति जताई है. कहा गया है कि रोहिंग्याओं को जिस जगह भेजा जा रहा है वहां चक्रवात और जलवायु परिवर्तन की वजह से जीवन खतरे में रहेगा.  बताया जा रहा है कि यहां बड़े चक्रवाती तूफान आते रहते हैं.

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