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SAARC बैठक का मेजबान बनना चाहता था पाकिस्तान, मालदीव ने उसके सपनों पर तेल छिड़ककर लगा दी आग

यदि आपको लग रहा हो कि सार्क के सदस्य देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक में पाकिस्तानी विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने कश्मीर का मुद्दा क्यों नहीं उठाया, तो उसके पीछे दो प्रमुख वजह थी। एक तो वह सऊदी अरब और रूस से पंगा मोल लेकर अपने देश को और कंगाली की ओर नहीं धकेलना चाहते थे, और दूसरा वह सार्क के चार वर्षों से रद्द पड़े सम्मेलन को पाकिस्तान में कराने के लिए आतुर थे, लेकिन मालदीव ने इन अरमानों पर ज़बरदस्त पानी फेर दिया है।

हाल ही में विदेश मंत्रियों की बैठक में अपने स्वभाव के इतर शाह महमूद कुरैशी ने आपसी समन्वय बढ़ाने पर ज़ोर दिया। आउटलुक की रिपोर्ट के अनुसार, “ शाह महमूद कुरैशी  ने कहा कि COVID 19 के विरुद्ध हमारी लड़ाई तभी सफल होगी जब पूरा क्षेत्र [दक्षिण एशिया] इस वायरस पर सफलतापूर्वक लगाम लगाएगा। इसीलिए इस दिशा में सार्क के सदस्य देशों के स्वास्थ्य मंत्रियों का आयोजन भी होगा।’’ इसके साथ ही पाकिस्तान के विदेश मंत्री ने ये आशा भी जताई कि जल्द ही सार्क का वर्षों से स्थगित सम्मेलन इस्लामाबाद में सफलतापूर्वक आयोजित होगा।

बता दें कि सार्क का अंतिम सम्मेलन 2016 में इस्लामाबाद में होनी तय थी, लेकिन उरी के कायराना हमले के पश्चात भारत ने इस सम्मेलन का सम्पूर्ण बहिष्कार किया, जिसमें सार्क के लगभग आधे से अधिक सदस्यों ने भारत का साथ दिया। तब से 4 वर्ष हो चुके हैं, लेकिन सार्क का सम्मेलन अभी तक नहीं हुआ।

लांकि,पाकिस्तान के अरमानों को पंख लगे, इससे पहले ही मालदीव ने पाकिस्तान को ज़मीन पे पटकते हुए कहा कि अभी का समय सार्क का सम्मेलन कराने के लिए अनुकूल नहीं है। डीएनए की रिपोर्ट के अनुसार, “मालदीव के विदेश मंत्री अब्दुल्ला शाहिद ने कहा है कि मालदीव को अभी नहीं लगता है कि यह समय पाकिस्तान के SAARC समिट की मेजबानी करने का है। बैठक में कई देशों ने माना कि अभी यह मौका नहीं है कि इवेंट के समय पर चर्चा की जाए। इसलिए पाकिस्तान की मेजबानी का प्रस्ताव सहमति नहीं बन पाने के कारण गिर गया।”

इससे मालदीव ने ना केवल पाकिस्तान के सार्क सम्मेलन की मेजबानी के ख्वाबों को ज़बरदस्त दुलत्ती लगाई, अपितु भारत से अपनी मित्रता का भी मान रखा। जब से भारत ने मालदीव को चीन के मायाजाल से सफलतापूर्वक बाहर निकाला, मालदीव भारत के प्रति अपनी मित्रता को निभाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उदाहरण के लिए जब मई माह में ओआईसी की बैठक में पाकिस्तान ने कश्मीर का मुद्दा उठाने का प्रयास किया, तो सबकी आशाओं के विपरीत मालदीव ने ना केवल भारत का पक्ष लिया, अपितु पाकिस्तान को इस्लाम के नाम पर राजनीति करने के लिए बुरी तरह हड़काया।

टीएफ़आई पोस्ट द्वारा प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, “दरअसल, ऑर्गनाइजेशन ऑफ इस्लामिक कोऑपरेशन (ओआईसी) की वर्चुअल मीटिंग हो रही थी। इसमें पाकिस्तान ने फिर से अपना पुराना राग अलापते हुए भारत के खिलाफ अपने प्रोपोगेंडा को आगे बढ़ाते हुए आरोप लगाया कि भारत में इस्लामोफोबिया फैलाया जा रहा है। परंतु भारत द्वारा लगातार की जा रही मदद की लाज रखते हुए मालदीव ने पाकिस्तान को झटका देते हुए पाकिस्तान की साजिश को न सिर्फ नाकाम कर दिया बल्कि उसे आईना भी दिखाया। मालदीव ने स्पष्ट कहा कि सोशल मीडिया पर अलग-थलग पड़े समूह और लोग जो बातें कह रहे हैं उनको भारत जैसे विशाल देश के 130 करोड़ लोगों की भावना नहीं कहा जा सकता।”

सच कहें तो पाकिस्तान की किस्मत इस समय बहुत खराब है। एक ओर पूरी दुनिया उससे नाता तोड़ रही है, दूसरी ओर उसपर एफ़एटीएफ़ द्वारा ब्लैकलिस्ट होने का खतरा लगातार बना हुआ है, और मालदीव ने उसके हाथों से सार्क सम्मेलन की मेजबानी का अवसर भी छीन लिया है। इसी को कहते हैं, गरीबी में आटा गीला होना।

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