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बसंत पंचमी सरस्वती पूजा पर बने ये 6 शुभ योग, बना रहे आज के दिन को और खास

गुरुवार, 30 जनवरी को माघ मास शुक्ल पक्ष की पंचमी है, इस तिथि  वसंत पंचमी मनाई जाती है। ये दिन देवी सरस्वती के प्राकट्य दिवस के रूप में मनाया जाता है। इसे वागीश्वरी जयंती और श्रीपंचमी भी कहा जाता है। ज्योतिषाचार्य  के अनुसार बसंत पंचमी पर दोपहर 1.30 बजे से सर्वार्थ सिद्धि का योग भी रहेगा। मंगल स्वराशि वृश्चिक में, गुरु स्वराशि धनु में, शनि स्वराशि मकर में, शुक्र मित्र राशि कुंभ में, राहु-केतु भी मित्र राशि में रहेंगे। ग्रहों के योगों में वसंत पंचमी का आना शुभ फलों में वृद्धि में करने वाला है।

175 साल पहले बना था ऐसा योग

2020 से पहले वसंत पंचमी पर ग्रहों का ऐसा योग 175 वर्ष पहले 1845 को बना था। उस समय मंगल स्वराशि वृश्चिक में, शनि स्वराशि मकर में और गुरु भी स्वराशि में था, गुरु उस समय मीन राशि में था। साथ ही, इस बार सर्वार्थ सिद्धि योग भी बना है।

विद्यार्थियों के लिए शुभ दिन है वसंत पंचमी

शिक्षा से संबंधित काम करने वाले और विद्यार्थियों के लिए ये वसंत पंचमी बहुत ही श्रेष्ठ फल देने वाली है, इस योग में विद्यार्थियों को कोई नई विद्या का सीखना शुरू करना चाहिए। पं. शर्मा के अनुसार वसंत पंचमी पर शुरू की गई नई विद्या से जल्दी ज्ञान मिलता है और उस का उपयोग हम जीवन में कर पाते हैं।

प्राचीन काल में आद्यशक्ति ने स्वयं को पांच भागों में बांटा था

जब ब्रह्माजी ने इस सृष्टि की रचना की, उस समय देवी मां यानी आद्यशक्ति ने स्वयं को पांच भागों में विभाजित किया था। ये पांच भाग यानी स्वरूप हैं राधा, पद्मा, सावित्रि, दुर्गा और सरस्वती। ये शक्तियां भगवान श्रीकृष्ण के विभिन्न अंगों से प्रकट हुई थी। उस समय भगवान के कंठ से प्रकट होने वाली देवी ही सरस्वती थीं। भगवती सरस्वती सत्तवगुण संपन्ना हैं। इनके अनेक नाम हैं। देवी को वाक, वाणी, गिरा, गी:, भाषा, शारदा, वाचा, धीश्वरी, वाग्देवी आदि कई नामों से जाना जाता है।

सार्वजनिक स्थानों पर नहीं किया जाता देवी का पूजन

देवी सरस्वती का पूजन कभी भी सार्वजनिक स्थानों पर में नहीं किया जाता है। देवी की देवी दुर्गा की पूजा की जाती है। शास्त्रों में वाग्देवी का पूजन यानी अराधना व्यक्तिगत रूप से ही करने का विधान बताया गया है। देवी भागवत के अनुसार श्रीं ह्रीं सरसवत्यै स्वाहा। इस अष्टाक्षर मंत्र से देवी का पूजन करना चाहिए। देवी सरस्वती की उत्पत्ति सत्वगुण से हुई है। इसीलिए वे श्वेत वस्त्र धारण करती हैं और उनके पूजन में सफेद वस्तुओं का ही प्रयोग करना चाहिए। इसी दिन से छोटे बच्चों का विद्याध्यन शुरू कराना चाहिए।

सभी ऋषियों ने प्रसन्न किया है देवी सरस्वती को

देवी भागवत और ब्रह्मवैवर्तपुराण के अनुसार सभी ऋषियों ने देवी सरस्वती को प्रसन्न किया था। प्रसन्न होकर देवी ने ऋषियों को वाक्सिद्धि प्रदान की। देवी की प्रसन्नता की वजह से ही ऋषियों ने कई ग्रंथों की रचना की। महाकवि कालिदास ने सरस्वती मां के काली स्वरूप में उपासना की थी। इसके बाद कालिदास से विश्वकवि के रूप प्रसिद्ध हुए। तुलसीदासजी ने भी देवी सरस्वती और गंगा को एक समान पापहारिणी और अविवेक हारिणी बताया था।

देवी सरस्वती की प्रसन्नता के बाद ही महालक्ष्मी प्रसन्न होती हैं

देवी सरस्वती विद्या की देवी है और विद्या को सभी प्रकार के धनों में श्रेष्ठ माना गया है। विद्या से ही अमृतपान किया जा सकता है। जिस व्यक्ति पर देवी सरस्वती प्रसन्न होती हैं, उसे महालक्ष्मी की भी प्रसन्नता मिल जाती है। विद्या से ही धन अर्जन किया जा सकता है। इसीलिए सभी प्रकार की भौतिक सुख-सुविधाओं और धन की प्राप्ति विद्या प्राप्त करने के बाद ही होती है।

कैसे मिलेगा बुद्धि का वरदान

– इस दिन सरस्वती पूजा का विशेष महत्व है

– इस दिन मां सरस्वती के समक्ष नील सरस्वती स्तोत्र का पाठ करना चाहिए

– इससे मूर्ख से मूर्ख व्यक्ति भी बुद्धिमान हो जाता है

– इस दिन मां सरस्वती की पूजा से ज्ञान का वरदान मिलता है

क्यों खास है वसंत पंचमी? 

वर्ष के कुछ विशेष शुभ काल में से एक होने के कारण इसे “अबूझ मुहूर्त” भी कहा जाता है.

– इसमे विवाह, निर्माण और अन्य शुभ कार्य किए जा सकते हैं

– ऋतुओं के इस संधिकाल में ज्ञान और विज्ञान दोनों का वरदान मिलता है

– संगीत कला और आध्यात्म का आशीर्वाद भी इस काल में लिया जा सकता है

– या शिक्षा की बाधा का योग है तो इस दिन विशेष पूजा करके उसे ठीक किया जा सकता है

बसंत पंचमी पर ग्रह मजबूत करने के 10 उपाय

1. कुंडली में अगर बुध कमजोर हो तो बुद्धि कमजोर हो जाती है ऐसी दशा में मां सरस्वती की उपासना करें

3. बृहस्पति के कमजोर होने पर विद्या प्राप्त करने में बाधा आती है. ऐसे में बसंत पंचमी के दिन पीले वस्त्र धारण करें

4. पीले पुष्प और पीले फलों से मां की उपासना करें

5. अगर शुक्र कमजोर हो तो मन की चंचलता भी होती है

6. करियर का चुनाव भी नहीं हो पाता है

7. ऐसी दशा में आज के दिन मां की उपासना करें

8. सफेद फूलों से मां की उपासना करना लाभदायक होता है

पूजा विधि

सुबह स्नान करके पीले या सफेद वस्त्र धारण करें।
मां सरस्वती की मूर्ति या चित्र उत्तर-पूर्व दिशा में स्थापित करें।
मां सरस्वती को सफेद चंदन, पीले और सफेद फूल अर्पित करें।
उनका ध्यान कर ऊं ऐं सरस्वत्यै नम: मंत्र का 108 बार जाप करें।

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