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पाकिस्तानी ने 9 करोड़ के लिए रचा ‘मौत’ का प्लान, लेकिन पकड़ा दी एक ‘वॉयस कॉल’

ब्रिटेन में एक पाकिस्तानी व्यक्ति को अपनी मौत का नाटक कर बीमा कंपनी से करोड़ों रुपए ठगने की कोशिश में सजा हुई। यदि क्लेम दिया जाता तो 39 साल के सैय्यद बुखारी के परिवार को 9 करोड़ रुपए मिलते। यह खुलासा लंदन सिटी पुलिस की इंश्योरेंस फ्रॉड एन्फोर्समेंट डिपार्टमेंट की जांच के बाद हो सका। दरअसल, सैय्यद बुखारी ने क्लेम के लिए 19 दिसंबर बीमा कंपनी को ईमेल कर अपनी मौत की जानकारी दी। फिर पत्नी की आवाज में बताया कि मौत हार्ट अटैक से कराची में हुई।

इसके बाद बीमा कंपनी ने क्लेम का वेरिफिकेशन शुरू कराया। इसकी जिम्मेदारी लंदन सिटी पुलिस की इंश्योरेंस फ्रॉड एन्फोर्समेंट डिपार्टमेंट के अधिकारी माइक मॉन्कटन को सौंपी गई। जांच के दौरान पुलिस ने उन व्यक्तियों से भी संपर्क किया, जिनके बारे में बुखारी ने फोन पर रिफ्रेंस दिया था।

वॉइस कॉल से खुला राज
जब फोन पर क्लेम करने वाली वॉइस की जांच की गई, तब पता चला कि शिकायत करने वाली आवाज महिला की नहीं बल्कि बुखारी की है। इसके बुखारी को लंदन क्राउन कोर्ट में पेश किया गया। कोर्ट ने गुरुवार को सुनवाई के दौरान बुखारी को 5 साल 7 महीने की सजा सुनाई। मॉन्कटन के मुताबिक, मामले में न केवल बुखारी बल्कि उसकी पत्नी को भी रुपयों के लिए साजिश रचने का आरोपी बनाया गया है। हालांकि, पत्नी ने कहा,पति द्वारा किए गए अपराध के बारे में उसे कोई जानकारी नहीं थी।

ऐसे चली जांच 

बीमा कंपनी ने तीन स्तर पर बुखारी के दावे का वेरिफिकेशन कराया, सबसे पहले क्लेम फाइल में लगाए गए मेडिकल सर्टिफिकेट, डेथ सर्टिफिकेट की जांच की गई। इसमें मेडिकल सर्टिफिकेट में मौजूद फिंगरप्रिंट में तीन अंगुलियों के निशान ही बुखारी के थे। इसके बाद जांच टीम ने पाकिस्तान जाकर कराची में पड़ताल की। यहां जिस कब्रिस्तान में बुखारी को दफनाए जाने का दावा किया गया था, वहां के रजिस्टर में इसका कोई रिकॉर्ड नहीं मिला।

फिर जांचकर्ता यूनियन काउंसिल के ऑफिस में गए, जहां से डेथ सर्टिफिकेट जारी किया गया था। यहां रजिस्टर में बुखारी का नाम था, लेकिन इसके साथ पहचान पत्र और मेडिकल सर्टिफिकेट का आईडी नंबर जैसी दूसरी जरूरी जानकारी मैच नहीं कर रही थी। इसके बाद जांचकर्ता मेडिकल सर्टिफिकेट का वेरिफिकेशन करने के लिए अस्पताल के पते पर पहुंचे, तो वहां कोई अस्पताल ही नहीं था। पास के अन्य डॉक्टर ने बताया, उन्होंने सर्टिफिकेट में दिए गए अस्पताल का कभी नाम नहीं सुना है।

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