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UP, MP के बाद अब गुजरात में ‘लव जिहाद’ पर कानून, जानिए पांच बड़ी बातें

गांधीनगर
गुजरात सरकार गुजरात धार्मिक स्‍वतंत्रता ऐक्‍ट, 2003 में कुछ संशोधन करना चाहती है। इसके लिए 1 अप्रैल को विधानसभा में इसे बहस और वोटिंग के लिए पेश किया जाना है। इन संशोधनों का मकसद राज्‍य में ‘लव जिहाद’ की घटनाओं पर रोक लगाना बताया गया है। आइए देखते हैं कि इस संशोधन विधेयक की कौन सी बातें अहम हैं:

बहलाने-फुसलाने की नई वजहें जोड़ी गईं
किसी को बहलाने-फुसलाने के लिए ये बातें जोड़ी गई हैं। इनके मुताबिक, ‘बेहतर लाइफस्‍टाइल, दैवीय आशीर्वाद’ के बहाने धर्म परिवर्तन के लिए उकसाना अब इस ऐक्‍ट के तहत दंडनीय अपराध होगा।

शादी धर्मांतरण का औजार!
इन संशोधनों में शादी के जरिए जबरन धर्मांतरण, या ऐसी शादी में सहायता करने को निषिद्ध घोषित किया गया है।

‘घर वापसी’ पर रोक नहीं
इस विधेयक में यह भी प्रस्‍ताव रखा गया है कि अगर कोई व्‍यक्ति फिर से अपने या अपने पूर्वजों के धर्म में लौटता है तो उस पर यह ऐक्‍ट लागू नहीं होगा।

इनको भी FIR दर्ज कराने का अधिकार
इस विधेयक में नया सेक्‍शन 3ए जोड़ने का प्रस्‍ताव रखा गया है। इसके तहत धर्मांतरित व्‍यक्ति के माता-पिता, भाई, बहन या उसके रक्‍त संबंधियों, शादी या गोद लेने के जरिए बने रिश्‍तेदारों को इस मामले में एफआईआर दर्ज कराने का अधिकार होगा।

अगर कोई व्‍यक्ति प्रेम और शादी के बहाने किसी का धर्म परिवर्तन कराने में मदद करता है तो वह भी समान रूप से दोषी होगा।

यह है सजा का प्रावधान
संशोधित प्रावधानों के तहत किसी व्‍यक्ति के जबरन धर्म परिवर्तन में दोषी पाए जाने पर न्‍यूनतम 3 से 5 साल तक की सजा की व्‍यवस्‍था है। अगर महिला, नाबालिग या एससी/एसटी का धर्म परिवर्तन हुआ हो तो दोषी को 4 से 7 साल तक की सजा दी जाएगी। अगर कोई संगठन इस काम में शामिल हुआ तो उसके सदस्‍यों को 10 साल तक की सजा और सब पर 5-5 लाख रुपयों का जुर्माना लगेगा। इसके अलावा संगठन को सरकारी मदद के लिए अयोग्‍य घोषित कर दिया जाएगा।

यूपी में न्‍यूनतम सजा 1 से 5 साल है, उसी तरह अगर महिला, नाबालिग या एससी/एसटी का धर्म परिवर्तन हुआ हो तो दोषी को 2 से 10 साल तक की सजा हो सकती है। एमपी में भी न्‍यूनतम सजा 1 से 5 साल है। यूपी की तरह ही एमपी में भी अगर महिला, नाबालिग या एससी/एसटी का धर्म परिवर्तन हुआ हो तो दोषी को 2 से 10 साल तक की सजा हो सकती है। हिमाचल प्रदेश में न्‍यूनतम सजा तो 1 से 5 साल ही है लेकिन महिला, नाबालिग या एससी/एसटी के केस में केवल 2 से 7 साल तक की सजा की बात कही गई है।

राज्‍यों में जबरन धर्म परिवर्तन पर सजा

राज्‍य आम केस में महिला, नाबालिग, एससी/एसटी के केस में
गुजरात 3 से 5 साल 4 से 7 साल
एमपी 1 से 5 साल 2 से 10 साल
हिमाचल प्रदेश 1 से 5 साल 2 से 7 साल
यूपी 1 से 5 साल 2 से 10 साल

 

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