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CAA हिंसा पर UP पुलिस का दावा- 57 जवानों को लगी गोली..पड़ताल में मिला सिर्फ एक!

पिछले साल 20 दिसंबर को CAA का विरोध उत्तर प्रदेश में हिंसक हो गया था. यूपी के अलग-अलग जिलों में प्रदर्शन के दौरान 21 लोगों की मौत हुई. ज्यादातर लोगों की मौत गोली लगने से हुई. यूपी पुलिस का कहना है कि प्रदर्शनकारियों ने भी पुलिस पर गोलियां चलाई थीं. पुलिस ने यह भी दावा किया है कि इन प्रदर्शनों के दौरान 300 पुलिसकर्मी घायल हुए, इनमें से 57 पुलिस वाले गोली लगने से घायल हुए हैं. लेकिन मीडिया पड़ताल में ये बात झूठी पाई जा रही है.

दरअसल एनडीटीवी के पड़ताल में पाया गया कि पूरे प्रदेश में सिर्फ एक पुलिस वाले को गोली लगी है. इसके साथ ही इस मीडिया ने दावा किया है कि पुलिस विभाग की तरफ से कथित पीड़ितों का नाम नहीं बताया जा रहा है. सिर्फ जिलेवार लिस्ट जारी की जा रही है. अब सवाल उठ रहे हैं कि 57 पुलिस वालों के गोली लगने का दावा किस आधार पर किया गया है ?

दूसरी तरफ प्रदर्शनकारियों की तरफ से दावा किया जा रहा है कि पुलिस ने उनपर गोलियां चलाई हैं, जिसमें कई लोग ना सिर्फ घायल हुए हैं बल्कि 20 से ज्यादा लोगों की जान चली गई है. प्रदर्शनकारियों के इस दावे की सच्चाई को तमाम वीडियो में देखा भी जा सकता है. ऐसे में लोग कह रहे हैं कि खुद को फंसता हुआ देख यूपी पुलिस ने विक्टिम कार्ड खेला है.

माना जा रहा है कि पुलिस विभाग ने यह दावा इसलिए किया है कि वो संदेश दे सके कि प्रदर्शनकारी बेहद हिंसक थे, वो पुलिस वालों पर गोलियां चला रहे थे इसलिए आत्मरक्षा में उन्होंने गोलियां चलाई. जबकि हकीकत तो ये है कि सीएए के विरोध में हो रहे प्रदर्शन पर पुलिस का रवैया बराबर से  उग्र रहा है.

यहां तक कि एक आरोप के मुताबिक मुजफ्फरनगर के एक मदरसे के बच्चों के साथ यौन उत्पीड़न भी हुआ है. खबरों के मुताबिक इन बच्चों को लॉकअप में डालकर बुरी तरह से मारा पीटा गया, जबरदस्ती जय श्रीराम के नारे लगवाए गए और उनके गुप्तांगों में डंडे डालकर प्रताड़ित किया गया.

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