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US की तो बात छोड़िए.. भारत-तुर्की से ही करोड़ों कमाई ट्रंप, फिर कैसे 10 साल नहीं दिया इनकम टैक्‍स?

वॉशिंगटन
अमेरिकी मीडिया में आई एक खबर ने नवंबर में होने वाले अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव की बहस को नया मोड़ दे दिया है। न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि 2016-17 में राष्ट्रपति बनने के बाद डोनाल्‍ड ट्रंप ने कार्यकाल के पहले साल में टैक्स के तौर पर महज 750 डॉलर (करीब 55,311 रुपये) का पेमेंट किया। खबर में यह भी दावा किया गया कि अरबपति बिजनेसमैन ट्रंप और उनकी कंपनियों ने भारत में 2017 के दौरान ही 1,45,400 अमेरिकी डॉलर (1.07 करोड़ रुपये) की रकम टैक्स के रूप में चुकाई। यही नहीं ट्रंप ने पिछले 15 वर्षों में से 10 वर्षों तक कोई टैक्स अदा ही नहीं किया।

वहीं ट्रंप ने इस खुलासे को फेक न्यूज (गलत खबर) करार दिया है। असल में द न्यूयॉर्क टाइम्स की रविवार को छपी खबर के मुताबिक, ट्रंप ने जिस वर्ष राष्ट्रपति चुनाव जीता उस वर्ष 750 अमेरिकी डॉलर संघीय आयकर के तौर पर अदा किए। अखबार ने उनके बीते 20 सालों के टैक्स भुगतान के आंकड़ों के विश्लेषण के बाद यह जानकारी दी। यह खुलासा ऐसे समय हुआ है, जब मंगलवार को राष्ट्रपति पद के उम्मीदवारों के बीच बहस (प्रेजिडेंशियल डिबेट) होनी है और कुछ हफ्तों बाद ही 3 नवंबर को राष्ट्रपति पद के लिए ट्रंप को डेमोक्रेटिक जो बाइडेन के साथ मुकाबला करना है। आइए जानते हैं क‍ि कैसे ट्रंप अपने टैक्‍स बचाने में कामयाब रहे…..

‘कमाई से ज्यादा कंगाली दिखाई’
खबर में कहा गया कि ट्रंप ने पिछले 15 वर्षों में से 10 वर्षों तक कोई टैक्स अदा ही नहीं किया क्योंकि ट्रंप ने दिखाया कि इस दौरान कमाई से कहीं ज्यादा उन्हें नुकसान हुआ था। खबर के मुताबिक, आईआरएस (आंतरिक राजस्व सेवा) को दी जाने वाली ट्रंप की रिपोर्ट उन्हें एक कारोबारी के तौर पर दिखाती है जो प्रतिवर्ष लाखों डॉलर लेता है और भारी नुकसान की बात करता है जिससे वह टैक्स देने से खुद को बचा सके। अब बढ़ती वित्तीय चुनौतियों के साथ आंकड़े दिखाते हैं कि वह उन कारोबार से अधिक से अधिक धन कमाने पर निर्भर हैं जो उन्हें ज्यादा संभावना से भरे नजर आते हैं। हालांकि इससे अक्सर राष्ट्रपति के तौर पर उनके हितों का प्रत्यक्ष टकराव होता दिखता है।

खबर में खुलासा किया गया है कि वाइट हाउस में अपने पहले दो सालों के दौरान ट्रंप को विदेशों से कुल 7.3 करोड़ अमेरिकी डॉलर का रेवेन्यू मिला, जिनमें से अधिकतर स्कॉटलैंड और आयरलैंड में उनकी गोल्फ संपत्तियों से हुई आय है। फिलीपींस, भारत और तुर्की में लाइसेंसी देने संबंधी सौदों से भी उन्हें क्रमश: 30 लाख, 23 लाख और 10 लाख अमेरिकी डॉलर का राजस्व मिला। खबर के मुताबिक, उन्होंने अपने कई विदेशी उपक्रमों के बदले भी टैक्स का भुगतान किया।

वर्ष 2017 में राष्ट्रपति ने अमेरिकी सरकार को महज 750 अमेरिकी डॉलर का भुगतान किया जबकि इसी दौरान उन्होंने या उनकी कंपनियों ने पनामा में 15,598 अमेरिकी डॉलर, भारत में 1,45,400 अमेरिकी डॉलर और फिलीपींस में 1,56,824 अमेरिकी डॉलर टैक्स के तौर पर चुकाए। इस बीच वाइट हाउस के एक प्रवक्ता ने रविवार को न्यूयॉर्क टाइम्स की खबर को ‘बिल्कुल गलत खबर’ करार देते हुए दावा किया कि मीडिया घराने ने पहले भी यही चीज करने की कोशिश की थी।

टैक्स को हमेशा राज ही रखा ट्रंप ने
कानून के तहत अमेरिकी राष्ट्रपति को अपनी व्यक्तिगत आय का विवरण जारी करने की आवश्यकता नहीं होती है, लेकिन पूर्व राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन के बाद से सभी ने इसे सार्वजनिक किया है। अपने आयकर भुगतान को बेहद गोपनीय रखने वाले ट्रंप आधुनिक समय में एकमात्र राष्ट्रपति हैं जो इन्हें सार्वजनिक नहीं करते। ट्रंप ने वास्तव में उनके आयकर रिटर्न की जानकारी चाहने वालों को अदालत में चुनौती दी थी।

इनमें अमेरिकी सदन भी शामिल है जो संसदीय निगरानी के हिस्से के तौर पर ट्रंप के आयकर रिटर्न से जुड़ी जानकारी चाहता था। न्यूयॉर्क टाइम्स की खोजी खबर के मुताबिक ट्रंप ने टैक्स से जुड़े विवरण को गोपनीय रखने के लिए काफी लंबी लड़ाई लड़ी है जो उनके पूर्व में अमेरिकी जनता के सामने दिए उस बयान से मूल रूप से अलग है जिसमें उन्होंने डिटेल्स देने की बात कही थी। उधर इस पूरे मामले में ट्रंप ने कहा, ‘मैंने टैक्स अदा किया है। …आप मेरा टैक्स रिटर्न आते ही इसे देखेंगे। फिलहाल इसका अभी आकलन चल रहा है… मैंने टैक्स के तौर पर काफी रकम का भुगतान किया है।’

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