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US को केवल चुनावी प्रणाली बदलने की जरूरत नहीं, बल्कि बिहार से बहुत कुछ सीखना भी चाहिए

दुनिया के दो एकदम विभिन्न भाग इस बार चुनाव के लिए आगे आए। एक ओर था दुनिया का सबसे समृद्ध और शक्तिशाली देश, यूनाइटेड स्टेटस ऑफ अमेरिका, तो दूसरी ओर था भारत का राज्य बिहार। लेकिन जिस प्रकार से दोनों राज्यों में चुनाव सम्पन्न हुए, उससे स्पष्ट दिखता है कि क्यों अमेरिका की चुनावी प्रक्रिया में व्यापक बदलाव की आवश्यकता है।

एक तरफ दो अहम गठबंधनों और अनेकों उम्मीदवारों के बीच हुए बिहार के विधानसभा चुनाव में करीब 30 से 35 राउन्ड तक मतगणना हुई, और उसके बावजूद 4 करोड़ वोट की मतगणना के साथ एक ही दिन में बिहार का परिणाम निकल आया, और वो भी तब, जब वुहान वायरस के कारण वोटों की गिनती काफी धीमी गति से हो रही थी।

वहीं दूसरी ओर यदि इसकी तुलना अमेरिका के राष्ट्रपति चुनाव से की जाए, तो पता चलता है कि 3 नवंबर को सम्पन्न हुए चुनाव के बाद आज तक सही परिणाम निकल के नहीं आया है। वहाँ की पक्षपाती मीडिया ने पहले ही जो बाइडेन के पक्ष में निर्णय सुना दिया हो, परंतु वोटों में धांधली के कारण इस चुनाव को निष्पक्ष कतई नहीं कहा जा सकता।

परंतु इसमें हैरानी की कोई बात नहीं है, क्योंकि यही बात 2000 में भी हो चुकी है। जब रिपब्लिकन उम्मीदवार जॉर्ज वॉकर बुश और डेमोक्रेट उम्मीदवार एवं पूर्व उपराष्ट्रपति अल गोर के बीच चुनावी दंगल हुआ था, तब भी वोटों की धांधली का प्रश्न उठा था। तब भी मीडिया ने कुछ समय के लिए अल गोर को ही अमेरिका का राष्ट्रपति माना था, लेकिन अंत में जॉर्ज बुश की विजय हुई, और वे अमेरिका के राष्ट्रपति बने।

अब अगर बिहार के चुनाव और अमेरिका के चुनाव की तुलना करे, तो इतना तो स्पष्ट है कि अमेरिका के चुनावी प्रक्रिया में व्यापक बदलाव की आवश्यकता है। 4 करोड़ लोगों के मत गिनना कोई हंसी मज़ाक का खेल नहीं है, लेकिन बिहार ने यह सफलतापूर्वक करके दिखाया। अमेरिका आज भी यह निर्णय नहीं कर पा रहा है कि उनका राष्ट्रपति कौन होगा, क्योंकि लगभग 15 करोड़ वोटों की गिनती होने के बाद भी अभी तक चुनाव का स्पष्ट परिणाम नहीं निकल पाया है।

लेकिन ऐसी समस्या भारत मे कभी उत्पन्न नहीं हुई। पिछले वर्ष सम्पन्न हुए संसदीय चुनाव में कई चरणों में 61 करोड़ से भी अधिक वोट डाले गए, लेकिन चुनाव परिणाम पर किसी को कोई संदेह नहीं हुआ, और एक ही दिन में परिणाम भी चुनाव आयोग ने निष्पक्ष तरह से घोषित किया।

तो अब प्रश्न ये उठता है – अमेरिका की चुनाव प्रक्रिया में गलत क्या है? जो जॉर्ज बुश के साथ हुआ, वो आज फिर से हो रहा है। मिशिगन हो, जॉर्जिया हो, विस्कॉन्सिन हो, या फिर पेन्सिलवेनिया, कई ऐसे राज्य हैं, जहां पर वैध और अवैध वोट, दोनों ही गिने जाने के आरोप लगाए जा रहे हैं। अब स्थिति यह हो गई है कि इस चुनाव के विरुद्ध अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट में अपील दाखिल की गई है, और जॉर्जिया में पुनः मतगणना करने की प्रक्रिया को भी मंजूरी दी गई है।

अब समय आ चुका है कि अमेरिका भी अपनी मतगणना की प्रणाली में व्यापक बदलाव करे, ताकि जो सवाल उसके लोकतंत्र पर उठे हैं, वो बार-बार न उठे। इस दिशा में भारत के बिहार ने एक अहम सीख भी अमेरिका सहित पूरी दुनिया को दी है, कि चुनाव कैसे कराए जाने चाहिए।

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