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चीनियों की ‘जांबाजी’ की कहानी, अपनी पोस्ट छोड़ जब भाग गए ड्रैगन के सिपाही

लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल यानी सीमारेखा पर भारत के साथ तनाव के बीच चीन का पूरा इंफॉर्मेशन सिस्टम यह दिखाने की कोशिश कर रहा है कि उसकी पीपल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) कितनी अडवांस है। उसके पास आगे की टेक्नॉलजी है और कैसे वह युद्ध का अभ्यास कर रही है। लेकिन एक हक़ीक़त वह भी है, जो चीनी सेना चाह कर भी नहीं भुला सकती। 2016 में साऊथ सूडान में जब हिंसा का दौर चल रहा था, तब यूएन पीसकीपिंग मिशन में गए चीनी सैनिक अपनी पोस्ट से भाग खड़े हुए। उन्हें वहां नागरिकों और राहतकर्मियों की सिक्योरिटी की जिम्मेदारी दी गई थी, जिसमें वे पूरी तरह असफल हुए।

साऊथ सूडान में 2016 में प्रेजिडेंट सलवा कीर और उनके पूर्व वाइस प्रेजिडेंट रीक मेचर के बीच शांति समझौता टूट गया। इसके बाद शुरू हुआ दोनों के समर्थकों के बीच जबरदस्त हिंसा का दौर। जुलाई में देश की राजधानी जुबा में हाहाकार होने लगा। बड़ी संख्या में आम लोग मारे गए। संयुक्त राष्ट्र की पीसकीपिंग फोर्स भी वहां थी। उसका काम लोगों को सुरक्षा देने के साथ ही राहतकर्मियों की भी रक्षा करना था। लेकिन हालात बेकाबू रहे और यूएन पीसकीपिंग मिशन कुछ ख़ास नहीं कर पाया। जहां वह तैनात रही, वहां भी खून बहा। कारण जानने के लिए जांच का फैसला हुआ

23 अगस्त 2016 को यूनाइटेड नैशंस के सेक्रेटरी जनरल ने एक रिटायर्ड मेजर जनरल की अगुवाई में स्वतंत्र जांच शुरू कराई। इन्हें जांच करनी थी कि यूएन मिशन इन साउथ सूडान (UNMISS) हेडक्वॉर्टर और उसके आसपास हिंसा कैसे हुई। यह हिंसा यूनहाउस पर हुई थी यानी हेडक्वॉर्टर पर और उसके पास ही बनी दो प्रोटेक्शन ऑफ सिविलियंस (पीओसी) साइट पर, जिसमें 27 हजार से ज्यादा लोग रह रहे थे।

टीम को एक टेरेन कैंप पर हुए हमले की भी जांच करनी थी, जो एक प्राइवेट कंपाउंड में बना था। इसमें संयुक्त राष्ट्र के कर्मचारियों, राहतकर्मियों और लोकल स्टाफ के साथ मारपीट हुई, रेप हुआ और लूटपाट की गई। जांच में चौंकाने वाली बात पता चली। महाशक्ति बनने का दम भरने वाले चीन के सैनिक अपनी जिम्मेदारी में पूरी तरह असफल साबित हुए। दूसरों की सुरक्षा तो दूर वे अपने हथियार और ज़रूरी साजो-सामान भी छोड़कर भाग खड़े हुए।

जांच रिपोर्ट में कहा गया कि कम से कम दो ऐसी घटनाएं हुईं, जिसमें चीनी बटालियन ने अपनी डिफेंसिव पोजिशन छोड़ दी। चीनी सैनिकों को नागरिकों की ढाल बनना था, लेकिन वे अपनी जान बचाकर भाग निकले। ये वाकया 10 और 11 जुलाई का है। चीनियों पर सिविलियन साइट नंबर-1 का जिम्मा था।

पीसकीपिंग फोर्स में चीन के अलावा इथयोपिया, नेपाल और भारत के भी सैनिक थे। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि पीसकीपिंग फोर्स एक संयुक्त कमांड के तहत ऑपरेट नहीं कर रही थी। सबको अलग अलग विरोधाभाषी ऑर्डर मिल रहे थे।

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