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अजनबियों की जान है बचाना, रोज़ा रखकर डोनेट किया प्लाज्मा, वाह डॉक्टर तौसीफ़ वाह

कोरोना संक्रमण को लेकर भले ही देशभर में मुसलमानों को संदिग्ध बना दिया गया हो, लेकिन हकीकत ये है कि मुसलमान देश से कोरोना को मिटाने के लिए हर मुमकिन कोशिश करता नज़र आ रहा है। वो कोरोना संक्रमित मरीजों की जान बचाने के लिए अपना ख़ून देने से भी पीछे नहीं हट रहा।

दरअसल, लखनऊ के केजीएमयू अस्पताल के एक रेजिडेंट डॉक्टर हैं तौसीफ़ खान, जो हाल ही में कोरोना संक्रमण से ठीक हुए हैं। वो एक कोरोना पॉज़िटिव मरीज़ का इलाज करने की वजह से संक्रमित हो गए थे। स्वस्थ होने के बाद वो एक बार फिर से कोरोना के ख़िलाफ़ जंग में जुट गए हैं। वो अब प्लाजमा थेरेपी के ज़रिए कोरोना संक्रमित मरीजों का इलाज करेंगे। इसके लिए उन्होंने शनिवार को खुद अपना खून दान किया।

उनके खून की ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन विभाग में जांच हो रही है। जिसके बाद सब कुछ ठीक पाए जाने पर डॉक्टर खान के शरीर से प्लाजमा लिया जाएगा, जो कोरोना से संक्रमित कम से कम दो गंभीर मरीजों के इलाज में काम आएगा। डॉक्टर खान ने इस नेक काम के लिए शनिवार का दिन इसलिए चुना क्योंकि इसी दिन से रमज़ान शुरू हुए हैं और उन्होंने इस नेक काम को रोज़ा रखकर अंजाम दिया।

डॉक्टर खान ने कहा कि मुकद्दस माह रमजान में उनको नेक काम करने का मौका ऊपर वाले ने बतौर फ़र्ज़ अता फरमाया है। किसी की ज़िंदगी बचाने से बड़ा और नेक काम कुछ नहीं हो सकता है। रोज़े के पहले दिन प्लाजमा डोनेट करने से बेहद ख़ुश हूं। इस्लाम मे इस बात का ज़िक्र है कि सेहतमंद व्यक्ति दुसरे की जान बचाने के लिए प्लाज्मा या रक्तदान कर सकता है।

बता दें कि कोरोना संक्रमित मरीजों के इलाज के लिए किंग जार्ज केजीएमयू में प्लाज्मा थेरेपी की प्रक्रिया शनिवार से शुरू हो गई है। बताया जा रहा है कि प्लाजमा थेरेपी से लोगों की जान बचाई जा सकती है। इससे लोगों में काफी उत्साह है।

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