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स्कूटर वाले नेताजी: जवानी तक बनाते रहे पंचर, अब मोदी कैबिनेट में मिनिस्टर

भोपाल/टीकमगढ़। अब तक के भारतीय इतिहास में एक चाय बनाने वाले नरेंद्र मोदी ने प्रधानमंत्री बनकर इतिहास रचा था, लेकिन मोदी कैबिनेट में ही बुधवार शाम को एक ऐसे शख्स मंत्री पद संभाल लिए, जिन्होंने बचपन से ही अपने पिता के साथ साइकिल के पंक्चर भी बनाए थे। सागर के पूर्व और टीकमगढ़ के मौजूदा सांसद डॉ. वीरेंद्र कुमार अपनी सादगी और सीधेपन के लिये न सिर्फ अपने जिले, अपने सूबे बल्कि देशभर में जाने जाते हैं। सांसद होने के बावजूद वो बजाज के पुराने हरे रंग के स्कूटर पर सफेद कुर्ता पजामा पहने शहर की गलियों में यूं ही घूमते नजर आ जाते हैं। यही लोगों से उनके संपर्क का तरीका भी है। जो देश के अन्य नेताओं से उनकी एक अलग पहचान बनाता है।

आइये वीरेंद्र कुमार के बारे में वो बातें जानते हैं, जो उन्हें देश के दूसरे नेताओं से अलग पहचान दिलाती हैं-

– वीरेंद्र कुमार का जन्म 27 फरवरी 1954 में सागर में हुआ था। उनकी पत्नी कमल खटीक गृहिणी हैं। उनका एक बेटा और बेटी है।
– वे संघ, अभाविप, विहिप और भाजपा में विभिन्न पदों पर रह चुके हैं।
– सागर संसदीय सीट से 1996 में 11वीं लोकसभा का चुनाव उन्होंने पहली बार जीता था। उसके बाद 12वीं, 13वीं और 14वीं लोकसभा में सागर से प्रतिनिधित्व किया।
– लोकसभा सीट के नए परिसीमन के बाद टीकमगढ़ लोकसभा सीट पर भी जीत का सिलसिला जारी रहा। अब 15 वीं और 16 वीं लोकसभा में वे इसी सीट से प्रतिनिधित्व कर रहे हैं।
– सागर के कलेक्ट्रेट परिसर में उन्होंने जनता दरबार की शुरुआत की और इसी से उन्हें प्रसिद्धि मिली। प्रदेश के वनमंत्री गौरीशंकर शेजवार उनके जीजा हैं।

17वीं लोकसभा के प्रोटेम स्‍पीकर बनाए गए भाजपा सांसद डॉ. वीरेंद्र कुमार खटीक  - डाइनामाइट न्यूज़

– वीरेंद्र खटीक ने 5वीं से लेकर सागर यूनिवर्सिटी में पढ़ाई के दौरान भी उन्होंने साइकिल रिपेयरिंग का काम किया।
– वे बताते है कि दुकान पर शुरुआत में वो लापरवाही से काम करते थे। कई बार दुकान में पंचर सुधारने के दौरान पिता की डांट भी खानी पड़ती थी।
– पंचर सुधारने के काम को में ध्यान से नहीं करता था तो पिताजी उन्हें अच्छी तरह से पंचर बनाना सिखाते थे।
– धीरे-धीरे पंचर बनाने से लेकर रिपेयरिंग के सारे काम उन्हें आने लगे तो फिर उन्होंने दुकान की जिम्मेदारी संभाल ली थी।
– पंक्चर सुधारने से लेकर केंद्रीय मंत्री बनने तक का उनका सफर राजनीति में एक मिसाल के तौर पर देखा जा रहा है।

– वीरेंद्र खटीक की एक और पहचान है, वो है उनका सालों पुराना स्कूटर।
– वीरेंद्र खटीक जब सागर सांसद थे, तो वो अकसर अपने पुराने स्कूटर पर ही घूमते नजर आते थे। उनकी यही सादगी उनकी पहचान बन गई है।
– वो सागर सांसद रहे हो या फिर मौजूदा टीकमगढ सांसद उनका स्कूटर अब भी अधिकतर उनके सांथ रहता है।
– कई कार्यक्रमों में स्कूटर से ही पहुंचते हैं, जबकि कार का इस्तेमाल दूर जाने के लिए ही किया करते हैं।

– वीरेंद्र कुमार टीकमगढ़ से छठी बार सांसद चुने गए हैं। अभी संसद की स्टैंडिंग कमेटी के सदस्य हैं।
– जेपी आंदोलन के दौरान 16 महीने जेल काट चुके हैं। दलित समुदाय से आते हैं। अर्थशास्त्र में एमए और चाइल्ड लेबर में पीएचडी की है।

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