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अब 20 तारीख का करिए इंतजार, लॉकडाउन में ये छूट देगी मोदी सरकार

लॉकडाउन में छूट देने के दबाव के बावजूद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसकी अवधि बढ़ाने का फैसला किया। इस फैसले के पीछे कई कारण हैं। एक वजह तो यही है कि कोरोना वायरस से प्रभावित जिलों की संख्या पिछले एक सप्ताह में लगभग 30 पर्सेंट बढ़कर 370 पर पहुंच गई। वहीं एक्सपर्ट्स की यह राय है कि 40 दिनों के लॉकडाउन से वायरस पर नियंत्रण करने में काफी मदद मिलेगी।

इस बार के लॉकडाउन में थोड़ा सा फर्क रहेगा। लॉकडाउन के पहले चरण के पीछे कहीं न कहीं पीएम मोदी का ‘जान है तो जहान है’ मंत्र था तो लॉकडाउन 2.0 में ‘जान भी जहान भी’ पर फोकस है। आइए समझते हैं कि लॉकडाउन में ढील की बढ़ती मांग के बावजूद इसे क्यों बढ़ाना पड़ा। पीएम ने ऐलान किया है कि 20 अप्रैल से कम जोखिम वाले इलाकों में रियायतें दी जाएंगी लेकिन छूट वाले इन इलाकों को तय कैसे किया जाएगा और वहां किस तरह की छूट दी जाएगी? किन जगहों पर छूट की गुंजाइश है और कहां पर नहीं? सबसे पहले समझते हैं कि लॉकडाउन को बढ़ाने का फैसला क्यों करना पड़ा।

क्यों बढ़ाना पड़ा लॉकडाउन?
लॉकडाउन के अच्छे नतीजे मिले, जिसकी तस्दीक खुद केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने यह कहकर की कि अगर बंदिशें नहीं होतीं तो अब तक देश में कोरोना वायरस संक्रमण के 8 लाख के करीब केस होते। लॉकडाउन को बढ़ाने की वजह हॉटस्पॉट्स की तादाद का बढ़ना और कुछ जगहों पर इसका सख्ती से पालन नहीं होना है।

एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, ‘कुछ ऐसे जिले हैं जो पिछले सप्ताह तक हॉटस्पॉट नहीं थे, लेकिन अब वे हॉटस्पॉट बन गए हैं। वायरस से प्रभावित जिलों की संख्या बढ़कर लगभग 370 हो गई है। ऐसे जिलों को 20 अप्रैल से राहत मिलेगी जो हॉटस्पॉट नहीं हैं और जिनके ऐसा बने की आशंका नहीं है।’

कुछ जगहों पर लॉकडाउन का नहीं हुआ कड़ाई से पालन
दरअसल कोरोना वायरस के संक्रमण की कड़ी को तोड़ने के लिए हॉटस्पॉट्स जरूरी है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन ने पिछले सप्ताह कहा था कि एक्सपर्ट्स ने कोरोना वायरस को फैलने से रोकने के लिए कम से कम 4 सप्ताह की जरूरत बताई है। हेल्थ मिनिस्ट्री का कहना है कि अगर एक क्षेत्र में 28 दिनों तक वायरस का कोई नया मामला नहीं होता तो इसके फैलने की कड़ी टूट जाएगी।

इसके अलावा प्रधानमंत्री कार्यालय को ऐसी रिपोर्ट्स भी मिली थीं कि पूरे देश में लॉकडाउन को एक समान अनुशासन से लागू नहीं किया जा रहा। लॉकडाउन के दौरान भी पश्चिम बंगाल में धार्मिक जमावड़े होने देने, बाजारों में किसी तरह की बंदिश नहीं लगाए जाने को लेकर केंद्र को सूबे के डीजीपी और चीफ सेक्रटरी को कड़ी फटकार तक लगानी पड़ी।


विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भी लॉकडाउन बढ़ाने का दिया था सुझाव

विश्व स्वास्थ्य संगठन भी देशों को लॉकडाउन खत्म न करने को लेकर आगाह करता रहा है। कोरोना वायरस से बुरी तरह प्रभावित इटली और फ्रांस जैसे देशों ने 40 दिन से अधिक का लॉकडाउन किया है। फ्रांस में लॉकडाउन को बढ़ाकर 11 मई तक और इटली में 3 मई तक कर दिया गया है। हालांकि, डेनमार्क और स्पेन में लॉकडाउन खत्म कर दिया गया है।

लॉकडाउन रहेगा या हटेगा, स्थानीय प्रशासन बताएगा
स्थानीय प्रशासन कोविड19 पर कंट्रोल का जमीनी जायजा लेकर जो रिपोर्ट देगा उसी के आधार पर देशभर में आर्थिक गतिविधियां धीरे-धीरे शुरू की जाएंगी। ईटी को यह बात मामले के जानकार सूत्रों ने बताई है। अर्थव्यवस्था से जुड़े अहम मंत्रालय इस दलील के साथ कृषि क्षेत्र के अलावा बड़ी संख्या में लोगों को रोजगार देने वाले दूसरे क्षेत्रों को खोलने के पक्ष में हैं कि यह देशवासियों के हित में जरूरी है। कौन सी आर्थिक गतिविधियां 21 अप्रैल से शुरू की जा सकती हैं, इसका ब्योरा सरकार बुधवार को जारी कर सकती है, लेकिन देशभर में लागू लॉकडाउन 3 मई तक जारी रहेगा।

इलाकों को संक्रमण के स्तर के हिसाब से तीन कैटिगरी
लाल, पीला और हरा में बांटा जाएगा। इन कैटेगरी के आधार पर डिपार्टमेंट फॉर प्रमोशन ऑफ इंडस्ट्री एंड इंटरनल ट्रेड (DPIIT) के अलावा MSME, एग्रीकल्चर और फूड प्रोसेसिंग मिनिस्ट्री की तरफ से सुझाई गई कुछ गतिविधियों को चलाने की इजाजत दी जाएगी। जैसे गोवा ने मंगलवार को कहा कि वह ग्रीन जोन में आता है क्योंकि उसके यहां संक्रमण का कोई मामला नहीं आया है। इसलिए वह अपनी सीमाओं पर कड़ी निगरानी रखते हुए लॉकडाउन धीरे-धीरे हटा सकता है।

ग्रामीण क्षेत्रों में शुरू हो सकती हैं इकनॉमिक ऐक्टिविटीज
प्रधानमंत्री मोदी को हेल्थ और होम मिनिस्ट्रीज और इकनॉमी से जुड़ी मिनिस्ट्रीज की प्रतिकूल राय के बीच एक संतुलन बनाना पड़ रहा है। हेल्थ और होम मिनिस्ट्रीज अप्रैल के अंत तक पूरी तरह लॉकडाउन चाहती थीं, जबकि फाइनेंस और कॉमर्स ऐंड इंडस्ट्रीज मिनिस्ट्रीज ने इकनॉमिक एक्टिविटी को दोबारा शुरू करने की जरूरत बताई थी। एक अधिकारी ने बताया, ‘अधिकतर ग्रीन डिस्ट्रिक्ट्स ग्रामीण क्षेत्रों में हैं। इन जिलों में MSME इंडस्ट्री और सरकार के कंस्ट्रक्शन प्रोजेक्ट्स 20 अप्रैल के बाद शुरू हो सकते हैं। इससे श्रमिकों को राहत मिलेगी। सरकार अभी कृषि क्षेत्र को खोलने पर ध्यान दे रही है क्योंकि इसमें पहले सुधार होगा और इससे देश की इकनॉमी की गति बढ़ सकती है।’

दिल्ली-एनसीआर, मुंबई जैसी जगहों में छूट की संभावना कम
दिल्ली-एनसीआर, मुंबई, पुणे, इंदौर और अन्य राज्यों की राजधानियों में 3 मई तक पूरी तरह लॉकडाउन रह सकता है। वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि सभी बड़ी इंडस्ट्रीज शहरों में हैं और इस वजह से उन्हें 3 मई तक कोई राहत मिलनी मुश्किल है।

छूट वाले इलाकों के लिए होंगे सख्त नियम
कुछ इंडस्ट्री सेक्टर को खोलने को लेकर नीति आयोग के अलावा वित्त, वाणिज्य एवं उद्योग, स्वास्थ्य और गृह मंत्रालय की कई दौर की बैठक हो चुकी है। विस्तृत दिशा-निर्देश गृह मंत्रालय और स्वास्थ्य मंत्रालय की तरफ से जारी किए जाएंगे, जिसमें लॉकडाउन को धीरे-धीरे खत्म करने की रणनीति और तौर-तरीकों के बारे में बताया जाएगा। जिन कंपनियों को परमिटेड जोन में ऐक्टिविटी चलाने की इजाजत दी जाएगी, उनको सख्त नियमों का पालन करना पड़ेगा।

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