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प्रभावशाली वैक्सीन है Bharat Biotech की Covaxin, लेकिन सिर्फ अमेरिकी Pfizer मांग रही ‘लिबरल’ लॉबी

भारत में कुछ लोग आज भी पश्चिमी मानसिकता की गुलामी कर रहे हैं। जी हाँ, हम भारत की लिबरल जमात की बात कर रहे हैं। ये लोग मानते हैं की दुर्भाग्यवश इनका शरीर भारत में रह गया है, वरना ये लोग मानसिक रूप से लंदन, न्यूयॉर्क, लॉस एजेंलिस में रहते हैं। हर बात में भारत को कमतर समझने और विदेशों का गुणगान करने की आदत से मजबूर ये लोग तथ्यों को नकारते हुए भारत बायोटेक की वैक्सीन को, फाइजर से कमतर दिखाना चाह रहे हैं। भारत में फाइजर के लिए Lobbying करने वालों की सूचि लम्बी है। यही लोग अब भारत में रहकर भारत की वैक्सीन Covaxin को कमतर दिखाने का प्रयास कर रहे हैं।

भारत बायोटेक की वैक्सीन भारत में ही नहीं बल्कि, दुनियाभर में चर्चा का केंद्र बन गई है। ऐसा इसलिए क्योंकि भारत बायोटेक ने हाल ही में मीडिया को बताया था की उनकी वैक्सीन कोरोना के लगभग सभी वेरियंट के विरुद्ध प्रभावी है। किन्तु यह दावा अकेले भारत बायोटेक का नहीं है।

हाल ही में वाइट हाउस के मुख्य चिकित्सा सलाहकार और अमेरिका के प्रमुख महामारी व संक्रामक रोगों के विशेषज्ञ एंथोनी फॉची ने भारत बायोटेक द्वारा विकसित वैक्सीन Covaxin  को लेकर बताया था की रिसर्च बताती है की “Covaxin कोरोना के घातक वेरिएंट B.1.617 के विरुद्ध भी प्रभावी साबित हुई है।” पत्रकार वार्ता में उन्होंने बताया, “यह एक ऐसा पहलु है जिसपर हम अब भी रोज नया डेटा देख रहे हैं। हाल ही में, मैं भारत में ठीक हुए ऐसे लोगों का डाटा देख रहा था, जिन्हें Covaxin लग चुकी थी और  उनके Convalescent sera ( कोरोना से ठीक हो चुके लोगों का ब्लड सीरम )  देखने पर मैंने पाया की भारतीय वैक्सीन घातक वेरिएंट B.1.617 को भी समाप्त कर रही है।”

दुनियाभर की वैक्सीन पर शोध करने वाली ब्रिटिश संस्था क्लिनिकल ट्रायल अरीना ने भी अपनी एक रिपोर्ट में बताया है की “भारतीय वैक्सीन लोगों को कोरोना के विरुद्ध 78 प्रतिशत सुरक्षा देती है। अर्थात, इस वैक्सीन के दोनों डोज लेने के बाद इसकी संभावना बहुत कम रह जाती है की आप कोरोना की चपेट में आएंगे और अगर दुर्भाग्य से आप इसकी चपेट में आ भी गए तो आपका बचना शत प्रतिशत तय है। Covaxin लेने के बाद एक भी ऐसा मामला नहीं आया है जब रोगी को हॉस्पिटल जाना पड़ा हो। ये वैक्सीन इस गंभीर बीमारी से आपकी 100 प्रतिशत रक्षा करेगी।”

यही कारण है की भारत बायोटेक को अपने प्रोडक्ट पर इतना विशवास है की उसने यह दावा किया था की इसके इस्तेमाल के बाद अगर कैसा भी साइड इफ़ेक्ट आता है तो वह मुआवजा देने को तैयार हैं। ऐसा ऐलान करने वाली भारत बायोटेक एकमात्र वैक्सीन निर्माता है।

इसके विपरीत फाइजर की बात करें तो फाइजर के शुरूआती ट्रायल से ही लोगों के मरने की खबरें आ रही है। नॉर्वे में इसके उपयोग से 23 लोगों की मृत्यु हुई थी। साथ ही फाइजर से मरने वालों को किसी भी प्रकार का मुआवजा नहीं मिलता है। उलटा फाइजर ने कई देशों में यह प्रयास किया है की उसे कानूनी कार्रवाई से भी मुक्त कर दिया जाए। अमेरिका में तो वह लॉसूट से मुक्त है ही लैटिन अमेरिका के कई छोटे देशों में भी यही किया गया है। यहाँ तक की ब्राजील और अर्जेंटीना से मिलिट्री बेस, बैंक रेवेन्यू आदि को Liability के रूप में रखने को बोला गया था। अर्थात, इन देशों के कोई व्यक्ति वैक्सीन के कारण मरता है तो उसका भुगतान यहाँ की सरकारें करेंगी, न की कंपनी और सरकार का रेवेन्यू ही समझौते की जमानत था।

साफ है की भारतीय Covaxin के सामने फाइजर कहीं नहीं टिकती है, लेकिन जैसा की पहले ही बताया गया भारत की लिबरल जमात का दिमाग अमेरिका में जीता है और वहां फाइजर की वैक्सीन ही इस्तेमाल हो रही है। ऐसे में बेचारे लिबरल्स कैसे भारत बायोटेक की वैक्सीन लगवा सकते हैं। एक मई से भारत में सभी वयस्कों के लिए टीकाकरण शुरू हो रहा है। आप कोवाक्सिन और कोविशील्ड, दोनों में जो भी उपलब्ध हो, उसे लगवाएं। दोनों ही वैक्सीन अत्यंत कारगर हैं। वैक्सीनेशन की प्रक्रिया जितनी जल्दी पूरी होगी, भारत वुहान वायरस को उतना जल्दी पराजित कर सकेगा।

 

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