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महाराष्ट्र में कोरोना: इन 7 आंकड़ों ने बढ़ाई सरकार की चिंता, अलग से एक्शन की तैयारी शुरू

महाराष्ट्र में पॉजिटिविटी रेट घटकर 0.15 फीसदी पर आने के बावजूद रायगढ़, रत्नागिरी, सिंधुदुर्ग, सातारा, सांगली, कोल्हापुर और हिंगोली, इन सात जिलों में कोरोना संक्रमण बढ़ने से मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे चिंतित हैं। मुख्यमंत्री ने बुधवार को कोरोना महामारी की राज्य में स्थिति पर एक समीक्षा बैठक की। जिसमें स्वास्थ्य मंत्री राजेश टोपे, मुख्य सचिव सिताराम कुंटे, स्वास्थ्य विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. प्रदीप व्यास, टास्क फोर्स के डॉ.संजय ओक और डॉ.शशांक जोशी सहित कई लोग उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री ने इस बैठक में राज्य के सात जिलों में कोरोना संक्रमण बढ़ने पर चिंता व्यक्त करते हुए टेस्टिंग और वैक्सीनेसन बढ़ाने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि कोरोना महामारी की दूसरी लहर अभी तक पूरी तरह से समाप्त नहीं हुई है, इसलिए लॉकडाउन जैसी लगाई गई पाबंदियों से जल्दबाजी में जिला प्रशासन ढील न दें। उन्होंने कोरोना के खिलाफ जारी जंग में किसी भी प्रकार की कोताही न बरतने की हिदायत देते हुए संभावित तीसरी लहर का मुकाबला करने के लिए तैयार रहने का आदेश दिया है। इसके लिए जिला स्तर पर ऑक्सीजन, ICU बेड्स बढ़ाने और फील्ड अस्पतालों की सुविधाओं का नियोजन अभी से करने का निर्देश दिया।

स्वास्थ्य विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. प्रदीप व्यास ने बताया कि रत्नागिरी में पहली लहर के वक्त सर्वाधिक 3,074 पेशेंट थे, जबकि दूसरी लहर में यह संख्या 5,600 हो गई। इसी प्रकार सिंधुदुर्गा में पहली लहर के वक्त 1,346 मरीज थे, जबकि इस वक्त 5,500, हिंगोली में पहली लहर में 660 थे जबकि दूसरी लहर में 675 पेशेंट हैं।

महाराष्ट्र रोजाना तीन हजार मीट्रिक टन ऑक्सीजन उत्पादन के लक्ष्य से अब भी दूर

कोरोना की दूसरी लहर के वक्त महाराष्ट्र सहित देश के लगभग सभी राज्यों में मेडिकल ऑक्सीजन की किल्लत महसूस हुई। जिसकी वजह से महाराष्ट्र ने कोरोना की तीसरी लहर आने से पहले अपनी ऑक्सीजन उत्पादन क्षमता को बढ़ाकर तीन हजार मीट्रिक टन करने का लक्ष्य रहा है। परंतु इस वक्त राज्य में सिर्फ 1,300 मीट्रिक टन ही ऑक्सीजन का प्रोडक्शन हो रहा है। जिसकी वजह से महाराष्ट्र में प्रति दिन उत्पादन हो रहे ऑक्सीजन और डिमांड के बीच 600 मीट्रिक टन की कमी देखी जा रही है। हालांकि महाराष्ट्र के लिए राहत की बात यह है कि उद्योग विभाग को करीब 57 औद्योगिक घटक ने 898 मीट्रिक टन प्रतिदिन ऑक्सीजन उत्पादन करने का प्रस्ताव दिया है।

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