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‘मुफ्त राशन’ स्कीम: 2022 में जिन 7 राज्यों में चुनाव, वहां की 20 करोड़ आबादी को सरकारी सौगात

7 जून को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के 80 करोड़ जरूरतमंदों को दिवाली तक मुफ्त राशन देने की घोषणा की थी। साल 2020 में भी केंद्र सरकार ने अप्रैल से नवंबर, यानी 10 महीने तक मुफ्त राशन बांटा था। इस साल भी मई से नवंबर यानी 9 महीने तक गरीबों को मुफ्त राशन मिलता रहेगा। बुधवार को ही पीएम मोदी की अध्यक्षता में कैबिनेट ने मुफ्त राशन स्कीम को जुलाई से नवंबर यानी पांच महीने तक बढ़ाने का अप्रूवल भी दे दिया है। वहीं लाभार्थियों की संख्या भी अब 80 करोड़ से बढ़कर 81.35 करोड़ हो गई है।

सरकारी आंकड़ों पर यकीन करें तो जिन लोगों को मुफ्त राशन बांटा जा रहा है, उनमें सबसे बड़ी संख्या में उत्तरप्रदेश के लोग हैं, जहां अगले साल चुनाव भी हैं। सरकार का दावा है कि उत्तर प्रदेश की करीब 20 करोड़ पॉपुलेशन में से 15.21 करोड़ पॉपुलेशन यानी करीब 76% इस स्कीम के दायरे में आ रही है।

यानी इतनी आबादी को सरकार हर महीने 5 किलो गेहूं या चावल दे रही है, लेकिन वास्तव में कितने लोगों को मुफ्त राशन मिल रहा है, इसका कोई आधिकारिक आंकड़ा अब तक सामने नहीं आया है।

वहीं साल 2022 में UP के साथ ही जिन 6 राज्यों (उत्तराखंड, गोवा, गुजरात, मणिपुर, पंजाब, हिमाचल प्रदेश) में चुनाव होना है, वहां कुल मिलाकर 20 करोड़ से ज्यादा जरूरतमंदों को दिवाली तक मुफ्त राशन मिलता रहेगा। UP के बाद स्कीम के दायरे में आने वालों में सबसे ज्यादा संख्या गुजरात 3.82 करोड़, फिर पंजाब 1.41 करोड़, उत्तराखंड 61.94 लाख, हिमाचल प्रदेश 28.64 लाख,मणिपुर 24.67 लाख और गोवा 5.32 लाख की है।

सरकार मुफ्त राशन प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना (PM-GKAY) स्कीम के तहत दे रही है। इसमें गरीबी रेखा में आने वालों के अलावा ऐसे लोग भी शामिल हैं, जिनकी माली हालत कोविड ने खराब कर दी है। ऐसे लोगों को प्रायोरिटी हाउसहोल्ड (PHH) कैटेगरी में रखा गया है और स्थानीय स्तर पर वैरिफिकेशन के बाद इन्हें स्कीम में शामिल किया जा रहा है।

कौन हैं 80 करोड़ लोग..जिन्हें मुफ्त राशन मिल रहा, समझिए

अंत्योदय अन्न योजना में जिन लोगों को शामिल किया गया है, उनका ये क्राइटेरिया है (ग्रामीण क्षेत्र के लिए)

  • बेघर परिवार और बिना आश्रय के परिवार।
  • बेसहारा परिवार जो मुख्य रूप से जीवित रहने के लिए भिक्षा पर निर्भर हैं।
  • कानूनी रूप से रिहा हुए बंधुआ मजदूर।
  • केवल एक कमरे में रहने वाले परिवार। जिनके कमरे की दीवार, छत कच्ची हो।
  • नाबालिग पर आश्रित परिवार।
  • ऐसे सभी घर जिनमें 15 से 59 साल की उम्र के बीच का कोई वयस्क सदस्य नहीं है। 60 साल या इससे ज्यादा उम्र के लोगों पर ही घर आश्रित हैं। जिनके पास निर्वाह का कोई जरिया नहीं है।
  • विकलांग सदस्य पर आश्रित परिवार। जहां कोई वयस्क निर्वाह के लिए नहीं है।
  • भूमिहीन परिवार, जो मजदूरी से जीवन-यापन करते हैं।
  • विधवा या एकल महिला पर आश्रित परिवार।
  • ऐसे परिवार जिनमें 25 वर्ष से अधिक का कोई साक्षर नहीं है।

शहरी क्षेत्र के लिए ये क्राइटेरिया है

  • ऐसे लोग जो बेघर हैं। जो सड़क किनारे, फुटपाथ, फ्लाईओवर, सीढ़ियों के आसपास, मंदिरों, रेलवे प्लेटफॉर्म जैसी जगहों पर रहने को मजबूर हैं।
  • जिनके घर की छत और दीवारें प्लास्टिक की पन्नी से बनी हैं।
  • जिनके घर में केवल एक कमरा है, जिसकी दीवारें घास, छप्पर, बांस आदि से बनी हैं।
  • जिनके घर में आय का कोई भी स्त्रोत नहीं है।
  • ऐसे लोग जो मजदूरी या इधर-उधर घरेलू काम करके जीवन-यापन करने पर मजबूर हैं।
  • ऐसे परिवार जिनके मुखिया दिहाड़ी करके घर चलाते हैं या उनकी कोई निश्चित आय नहीं है।
  • ऐसे परिवार जिनमें कमाई करने वाला कोई वयस्क नहीं है, जो नाबालिगों पर आश्रित हैं।
  • विकलांग सदस्य पर आश्रित परिवार।
  • विधवा या एकल महिला पर आश्रित परिवार।

(इन्हीं मापदंडों के आधार पर सरकार ने देश के 28 राज्य और 8 केंद्रशासित प्रदेश यानी कुल 36 राज्यों से जरूरतमंदों का आंकड़ा जुटाया है। 19 नवंबर 2020 को जारी किए गए आंकड़ों के अनुसार पूरे देश में ऐसे लोगों की संख्या 80.61 करोड़ है।)

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