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आशा का नीला रंग : ‘100 साल पुरानी मिथिलन ब्लू दवा से खत्म होगा कोरोना का हर स्ट्रेन!’

भावनगर : अभी तक कोरोना महामारी को जड़ से खत्म करने वाली कोई दवा नहीं बन सकी है। इसके चलते वैकल्पिक दवाओं का ही उपयोग किया जा रहा है। वहीं, गुजरात के भावनगर शहर के फेमस चेस्ट फिजिशियन डॉ. दीपक गोलवालकर और डॉ. जगदीप काकडिया का दावा है कि आमतौर पर मलेरिया में उपयोग होने वाली मिथिलन ब्लू से भी कोरोना की गंभीरता को कम किया जा सकता है।

इतना ही नहीं, डॉ. काकडिया का यह भी कहना है कि वे इस दवा के रोजाना मात्र 5 ml डोज से अब तक 3 हजार से ज्यादा कोरोना मरीजों को स्वस्थ कर चुके हैं। इसी बारे में मीडिया ने डॉ. काकडिया से इस दवा के बारे में जानने की कोशिश की है कि मिथिनल ब्लू क्या है और कोरोना में किस तरह फायदेमंद है?

मिथिलीन ब्लू: एक पुरानी और असरकारक दवा है
– डॉ. काकडिया बताते हैं कि मिथिलीन ब्लू वास्तव में मिथाइलथिओनिनियम क्लोराइड नाम की दवा है।
– इस दवा का उपयोग करीब 100 सालों से होता आ रहा है। इसे दुनिया की पहली सिंथेटिक ड्रग भी माना जाता है।
– मिथिलीन ब्लू कार्बन कंपाउंड से बनी दवा है।
– क्लोरोक्वीन से पहले मलेरिया के इलाज में इसी का उपयोग किया जाता था। 1950 के दशक में जब दुनिया भर मलेरिया ने कोहराम मचा रखा था, तब इसी दवा ने लाखों जानें बचाई थीं।

कोरोना में किस तरह उपयोगी

भावनगर के पल्मोनोलॉजिस्ट डॉ. दीपक गोलवालकर चार दशकों से फेफड़ों की बीमारियों और विभिन्न संक्रमणों का इलाज कर रहे हैं। गोलवालकर का दावा है कि उन्होंने कोरोना संक्रमण में मिथाइलीन ब्लू का सफल प्रयोग किया है। वे पिछले साल से ही कोरोना संक्रमण मरीजों के इलाज के लिए मेथिलीन ब्लू के उपयोग कर रहे हैं। इस दवा से अब तक वे 3000 से अधिक मरीजों को ठीक कर चुके हैं। इसी के चलते अब डॉ. गोलवालकर व उनकी टीम कोरोना संक्रमण रोकने के लिए मरीजों को यह मुफ्त में उपलब्ध करवा रहे हैं।

कोरोना के स्ट्रेन बदलने पर भी कारगर
डॉ. जयदीप काकडिया कोरोना के उपचार से संबंधित विश्व स्तरीय कई शोधों से से जुड़े हुए हैं और वे मिथिलीन ब्लू को एक उपयोगी औषधि मानते हैं। आमतौर पर, रेमेडेसिविर जैसी दवाएं वायरस के डीएनए या प्रोटीन के साथ मिलकर वायरस को कमजोर करती है। लेकिन, जब वायरस के स्ट्रेन बदलते हैं तो ये दवाएं भी असरकाराक काम नहीं कर पातीं। जबकि, मेथिलीन ब्लू हर तरह के वायरस का ऑक्सिडाइजिंग एलिमेंट है। यानी की वायरस के विघटन को ही खत्म कर देती है। इसलिए वायरस के स्ट्रेन बदलने पर भी मिथिलीन ब्लू उस स्ट्रेन की जगह लेकर उसे खत्म कर देती है।

डॉ. जयदीप काकडिया बताते हैं कि यह दवा संक्रमण को बढ़ने से रोकती है। व्यस्क आयु के व्यक्ति रोज सुबह 5 एमएल मिथिलीन ब्लू का सेवन कर सकने के अलावा रात को सोने से पहले नाक में इसकी दो बूंदे डाल लें तो यह संक्रमण को फैलने से रोक देती है।

रोजाना कर रहे हैं सैकड़ों मरीजों का इलाज

डॉ. जयदीप काकडिया बताते हैं कि उन्होंने डॉ. गोलवालकर के साथ मिथिलीन ब्लू के कोरोना वायरस पर असर के कई प्रयोग किए हैं। अपने एक प्रयोग के बारे में में काकडिया बताते हैं कि हमने कई कोरोना
संक्रमितों के नाक के दोनों छिद्रों से स्वेब लिए। दाएं छिद्र के स्वेज में पांच मिनट तक मिथिलीन ब्लू मिलाकर टेस्ट किया। वहीं, नाक के बाएं छिद्र से लिए स्वेब का आरटी पीसीआर टेस्ट करवाया। हमने
आश्चर्यजनक रूप से पाया कि मिथिलीन ब्लू वाले स्वेब की रिपोर्ट निगेटिव आई, जबकि दूसरी की पॉजीटिव आई। इस तरह हमने मिथिलीन ब्लू के असर की समीक्षा की। इसके बाद ही उन्होंने मरीजों को यह दवा देनी शुरू की है। काकडिया कहते हैं कि वे पिछले एक साल से रोजाना सैकड़ों कोरोना मरीजों का इलाज करते आ रहे हैं। इसके बावजूद वे अब तक संक्रमित नहीं हुए हैं।

दवा कैसे ली जाती है और कौन ले सकता है?
कोरोना वायरस एक ऐसा वायरस है जो श्वसन तंत्र यानी कि मुंह या नाक के जरिए शरीर में प्रवेश करता है। इसी के चलते मिथिलीन ब्लू के सेवन का तरीका यह है कि आधा चम्मच सिरप जीभ के नीचे से लिया
जाए। मिथिलीन ब्लू सीधे ब्लड से मिल जाता और इसी के चलते बहुत तेजी से वायरस तक पहुंचकर उसका मुकाबला करने लगता है। इसके अलावा रात के समय इसकी दो बूंदे नाक में डालने से भी यह तेजी से असर करता है।

स्वस्थ व्यक्ति भी कर सकता है उपयोग

एक स्वस्थ व्यक्ति भी संक्रमण से बचने के लिए मेथिलीन ब्लू का उपयोग कर सकता है। इसका किसी तरह का साइड इफेक्ट नहीं।

अगर दवा कारगर है तो मान्यता क्यों नहीं?
इस बारे में डॉ. जयदीप काकडिया का कहना है कि इसके सफल प्रयोग के बाद भी अब तक केंद्र सरकार के स्वास्थ्य मंत्रालय और AIIMS द्वारा इसे कोविड-19 के आईसीयू प्रोटोकॉल ड्रग्ज के रूप में मान्यता नहीं
दी है। लेकिन, कोई भी डॉक्टर अपने अनुभव के आधार पर क्लीनिकल प्रैक्टिस में मिथिलीन ब्लू प्रिस्क्राइब करे तो वह गैर-कानूनी नहीं है। वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन (WHO) भी इसे उपयोगी बिना साइड इफेक्ट वाली दवा के रूप में स्वीकार करता है। हालांकि, इसे मान्यता नहीं मिली है। इसीलिए कोरोना मरीज डॉक्टर की सलाह के अनुसार ही दवा लें।

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