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पंजाब के मेडिकल कॉलेज को 80 वेंटीलेटर भेजी केंद्र सरकार, इनमें से 71 खराब निकले

चंडीगढ़. कोरोना महामारी के बीच अव्यवस्थाओं का आलम बरकरार है। ऑक्सीजन को लेकर हर तरफ मारामारी मची हुई है, वहीं हाल ही में पंजाब के फरीदकोट से भी एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां गुरु गोविंद सिंह मेडिकल कॉलेज अस्पताल में केंद्र सरकार की तरफ से भेजे गए 80 वेंटीलेटर में से सिर्फ 9 ही ठीक हैं। 71 में कोई न कोई तकनीकी खराबी है। हालांकि इन्हें ठीक करने का काम युद्धस्तर पर जारी है, लेकिन सवाल खड़ा होता है कि कोरोना महामारी को हराने के दावे ऐसे में किस तरह से सिर चढ़ पाएंगे।

मिली जानकारी के अनुसार फरीदकोट स्थित गुरु गोविंद सिंह मेडिकल कॉलेज अस्पताल (GGSMCH) में इस वक्त 310 कोविड पैशेंट उपचाराधीन हैं। इससे पहले भी यहां 39 वेंटीलेटर उपलब्ध थे और इनमें से 37 ही काम कर रहे हैं। जरूरत पड़ने पर बीते दिनों केंद्र सरकार की तरफ से 80 वेंटीलेटर मुहैया करवाए गए हैं। AgVa हेल्थकेयर द्वारा मैन्युफैक्चर किए गए ये वेंटीलेटर प्रधानमंत्री राहत कोष की मार्फत आए हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि इनमें से 71 वेंटीलेटर तकनीकी रूप से खराब हैं। ऐसे में हालात बेहद गंभीर हो चले हैं।

एनेस्थेटिस्ट और गहन देखभाल करने वाले डॉक्टरों ने कहा कि वो केंद्र द्वारा भेजे गए वेंटिलेटर पर भरोसा नहीं करते। ये जरूरत मुश्किल से एक-दो घंटा ही काम कर पाते हैं। वेंटिलेटर का मुख्य कार्य विभिन्न स्तरों पर ऑक्सीजन प्रदान करना है क्योंकि हर मरीज की ऑक्सीजन की आवश्यकता अलग-अलग होती है। इन वेंटिलेटर का उपयोग करने के आधे घंटे के भीतर दबाव गिर जाता है। एक विशेषज्ञ डॉक्टश्र की मानें तो इन वेंटिलेटर का उपयोग करते समय किसी भी समस्या से बचने के लिए रोगी के पास रहना एक चुनौती है, जो वर्तमान परिस्थितियों में वास्तव में कठिन है।

मेडिकल कॉलेज के प्रशासन की तरफ से संज्ञान में लाए जाने के बाद मंगलवार को पंजाब सरकार के मुख्य सचिव ने वेंटीलेटर्स की मरम्मत के लिए मंजूरी दी और इसके बाद बुधवार को एक विशेष टीम यहां पहुंचकर वेंटीलेटर्स को ठीक करने में जुट गई है। इस बारे में बाबा फरीद यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज के उपकुलपति डॉ. राज बहादुर ने बताया कि प्रधानमंत्री राहत कोष से उपलब्ध करवाए गए वेंटीलेटर की क्वालिटी बेहद घटिया है। इस मामले को लेकर वह अपनी बात रख चुके हैं। इन्हें ठीक किए बिना मरीज पर इस्तेमाल नहीं किया जा सकता।

डॉ. राज बहादुर का कहना है कि वह इन वेंटीलेटर्स को उपलब्ध करवाने वाली एजेंसी के साथ दीर्घकालिक व्यापक अनुरक्षण अनुबंध चाहते हैं। साथ ही उन्होंने कहा कि तमाम परेशानियों के बावजूद अस्पताल में डॉक्टर और पैरामेडिकल स्टाफ मरीजों की देखभाल में किसी तरह की कोई कोताही नहीं बरत रहे।

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