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अंदर की बात: शिवसेना को BMC खोने का हो गया आभास, इसीलिए वो जा रही BJP के पास!

महाराष्ट्र में पिछले काफी समय से सियासी हलचल मची हुई है। ताजा खबरों के अनुसार, शिवसेना नेता संजय राउत ने भारतीय जनता पार्टी का दामन थामने के संकेत दिए हैं। दरअसल, हाल ही में शिवसेना नेता संजय राउत और मुंबई भाजपा के पूर्व अध्यक्ष आशीष शेलर के बीच मुलाक़ात हुई है। इसपर सफाई देते हुए संजय राउत ने सांकेतिक भाषा में कहा कि, “महाराष्ट्र की राजनीति भारत-पाक जैसी नहीं है।”

दरअसल, जब शिवसेना नेता संजय राउत और भाजपा नेता आशीष शेलर के मिलने की चर्चाएं तेज हो गई, तो ऐसे में संजय राउत ने अपनी चुप्पी तोड़ते हुए कहा, “मैं आशीष से सिर्फ सामाजिक कार्यक्रम में मिला हूं। महाराष्ट्र की राजनीति भारत और पाकिस्तान जैसी नहीं है। राजनीतिक मतभेदों के बावजूद, हम मिलकर रहते हैं। जो लोग मुझे पसंद नहीं करते हैं वे कल के विधानसभा सत्र से पहले अफवाहें फैला रहे हैं।”

इसके कुछ देर बाद संजय राउत ने ट्वीट किया, ‘हमारी अफवाह के धुंए वहीं से उठते हैं, जहां हमारे नाम से आग लग जाती है।’

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इस मुलाकात को लेकर भाजपा का भी रुख कुछ साफ नहीं रहा। आशीष शेलर ने तो संजय राउत के साथ किसी बैठक से ही इनकार कर दिया था। हालांकि, विधान परिषद में भाजपा के ही प्रमुख विपक्षी नेता प्रवीण दरेकर ने इस मुलाकात को ‘सद्भावना भेंट’ बताकर अपना पक्ष स्पष्ट कर दिया था।

शिवसेना की ओर से भाजपा को लुभाने की यह प्रयास पहली बार नहीं था। इससे पहले ऐसी कोशिश शिवसेना नेता प्रताप सरनाइक ने मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को पत्र लिखकर की थी। प्रताप ने अपने पत्र में मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को नसीहत देते हुए लिखा था कि, “हम आप पर और आपके नेतृत्व पर पूरा भरोसा करते हैं, लेकिन कांग्रेस और राकांपा हमारी पार्टी को कमजोर करने की कोशिश में जुटे हैं। मेरा मानना है कि अगर आप पीएम मोदी के करीब जाते हैं, तो बेहतर होगा। अगर हम एक बार फिर साथ आ गए तो यह पार्टी और कार्यकर्ताओं के लिए फायदेमंद होगा।”

गौरतलब है कि बृहन्मुंबई म्युनिसिपल कॉरपोरेशन के चुनाव फरवरी 2022 में होने वाले है। ऐसे में कांग्रेस ने बीएमसी नगर निगम चुनाव अकेले लड़ने का फैसला लिया है। वहीं, हाल ही में एनसीपी सुप्रीमो शरद पवार द्वारा आयोजित बैठक में शिवसेना के नेताओं ने भी हिस्सा नहीं लिया था। इससे यह स्पष्ट होता है कि महाविकास अघाडी सरकार में सब कुछ ठीक नहीं है। ऐसी परिस्थिति में शिवसेना के पास एक ही रास्ता बचता है। वह यह है कि- भाजपा के साथ गठबंधन कर ले। बता दें कि साल 2017 बीएमसी नगर निगम चुनाव में भाजपा ने बड़ी बढ़त हासिल करते हुए 82 सीटों पर जीत दर्ज की थी।

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