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धर्मांतरण विरोधी कानून के खिलाफ थे जो सिख नेता, वो आज कश्मीर में इसे लागू करने की कर रहे मांग

कश्मीर में कथित तौर पर दो सिख लड़कियों का अपहरण कर उन्हें इस्लाम में परिवर्तित करने का मामला सामने आया है। इनमें से एक लड़की की शादी मुस्लिम लड़के से कर दी गई थी जो अभी भी लापता है। इन दोनों मामले के सामने आने के बाद सिख नेता जबरन धर्मांतरण के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं और जल्द से जल्द जबरन धर्मांतरण विरोधी कानून लाने की बात कर है।

हैरानी की बात यह है जिन नेताओं ने उत्तर प्रदेश में लागू हुए Anti-Conversion law (जबरन धर्मांतरण विरोधी कानून ) का मजाक उड़ाया था और हिन्दू धर्म को कमजोर धर्म कह कर संबोधित किया था, अब वो भी Anti-Conversion law की मांग कर रहे हैं और प्रदर्शन में सबसे आगे हैं।

दरअसल, बडगाम जिले की एक 18 वर्षीय सिख लड़की को बहला-फुसलाकर जबरन इस्लाम में परिवर्तित कर दिया गया था। वहीं एक अन्य मामला श्रीनगर के महजूर नगर की एक लड़की का है जो अपने मुस्लिम दोस्त के एक समारोह में शामिल हुई थी। रिपोर्ट के अनुसार, उसकी शादी एक मुस्लिम लड़के से हुई थी जो समारोह में शामिल हुआ था। हालांकि, लड़की नाबालिग नहीं थी, पर वह अभी भी लापता है।

इसी पर शिरोमणि अकाली दल के नेता मनजिंदर सिंह सिरसा ने ट्वीट कर मुफ्ती सहित कश्मीर के स्थानीय राजनीतिक नेताओं से सिख समुदाय के समर्थन में आने का अनुरोध किया है। साथ ही उन्होंने उत्तर प्रदेश का उदाहरण देते हुए जम्मू-कश्मीर में जबरन धर्मांतरण विरोधी कानून पारित करने की भी मांग की।

सिरसा ने सरकार से कानून लागु करने की लगाई गुहार

घाटी में चल रहे विरोध प्रदर्शनों में शामिल होते हुए सिरसा ने कहा, “मैं श्रीनगर में स्थानीय सिख समुदाय के साथ जबरन निकाह और सिख बेटियों के धर्मांतरण के खिलाफ विरोध प्रदर्शन में शामिल हो रहा हूं, जो अलग-अलग धर्म के बुजुर्गों से शादी करने के लिए मजबूर हैं। मैं भारत सरकार से घाटी में इस तरह के निकाह के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने का आग्रह करता हूं।“

जबरन धर्मांतरण विरोधी कानून की मांग कर रहे प्रदर्शनकारियों के वीडियो को साझा करते हुए, सिरसा ने ट्वीट किया, “जम्मू और कश्मीर के स्थानीय सिख समुदाय ने अमित शाह से जम्मू-कश्मीर में भी एक मजबूत कानून (उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश की तरह) लाने की मांग की जिसमें सिख अल्पसंख्यक लड़कियों के इन जबरन निकाहों को रोकने के लिए माता-पिता की अनुमति आवश्यक होगी।”

कुछ दिनों पहले जबरन धर्मांतरण विरोधी कानून का उड़ाया था मजाक

सिरसा ने मीडिया से बातचीत के दौरान यह भी कहा कि सिख समुदाय को इस बात का अंदाजा नहीं था कि इस तरह से उनके भाईचारे का बदला लिया जाएगा जहां उनकी बेटियों का अपहरण किया जा रहा है और अन्य धर्मों के बुजुर्ग पुरुषों से जबरन शादी कराई जा रही है।

बता दें कि जब योगी आदित्यनाथ सरकार ने उत्तर प्रदेश में जबरन धर्मांतरण विरोधी कानून लागू किया था तब सिरसा ने उसी जबरन धर्मांतरण विरोधी कानून का मजाक उड़ाया था। इस साल जनवरी में, सिरसा ने कृषि कानूनों के खिलाफ ‘किसान’ विरोध प्रदर्शन में भाग लेते हुए, कहा था, “आपका धर्म (हिंदू धर्म) इतना कमजोर कैसे है कि वे अपने धर्म को बचाने के लिए कानून की मदद चाहिए?”

सिरसा ने कहा था कि, “इस तरह का धर्म होना ही अपने आप में एक पाप है। इसका मतलब है कि आपके धर्म में खामियां हैं। आपको अपने धर्म के इन दोषों को दूर करना चाहिए। जो धर्मगुरु हैं, उनमें खामियां हैं, उन्हें दूर करें।” यह विडम्बना ही है कि आज सिरसा स्वयं इसकी मांग कर रहे हैं। जिस तरह से प्रदर्शन जोर पकड़ता जा रहा है, उसे देखते हुए यह समझा जा सकता है कि “लव जिहाद” एक खतरनाक समस्या बन चुका है। इसके लिए अब केन्द्रीय स्तर पर एक कानून की आवश्यकता है।

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