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इस खूबसूरत हसीना को क्यों ढूंढ रहा है तालिबान? जानिए- क्या है इसके पीछे की कहानी

नाम है गुल अफरोज ऐबतेकर(Gulafroz Ebtekar) अफगानिस्तान (Afghanistan) की इकलौती ऐसी महिला जिसने पुलिस अकादमी से मास्टर डिग्री के साथ ग्रेजुएशन किया, और अफगानिस्तान में अशरफ गनी की सरकार के दौरान टॉप पुलिस ऑफिसर पद पर रहीं। जब तक ये अपने पद पर रही तब तक उनके नाम से ही अपराधियों के पसीने छूट जाया करते थे, नाम सुनते ही क्रिमिनल कांपने लगते थे, लेकिन आज आलम ये है कि जान बचाने के लिए दर दर की ठोकरे खा रही हैं।

कोई नहीं कर रहा है गुलअफरोज ऐबतेकर की मदद

काबुल एयरपोर्ट के बाहर तालिबान उन्हें पकड़ने में कामयाब भी हो गया था और तालिबानी लड़ाकों ने वहां उनकी पिटाई भी की थी, लेकिन वो वहां से बच निकलने में कामयबाब रहीं। और तब से ही तालिबान (Taliban) उन्हें पागलों की तरह ढूंढ रहा है। ऐबतेकर ने अफगानिस्तान से निकलने के लिए अमेरिका (America) सहित कई देशों की एम्बेसी से गुहार लगाई थी, लेकिन किसी ने उनकी मदद नहीं की।

मुश्किल में हैं गुलअफरोज ऐबतेकर

रिपोर्ट के मुताबिक गुलअफरोज ऐबतेकर अफगानिस्तान के गृह मंत्रालय के आपराधिक जांच विभाग की डिप्टी चीफ थीं, उन्हें अफगान महिलाओं के लिए प्रेरणा समझा जाता है, लेकिन आज उनके लिए अपनी जान बचाना भी मुश्किल हो गया है।

‘मैंने कई देशों की एम्बेसी से मुझे और मेरे परिवार को बचाने की गुहार लगे थी। मैं पांच दिनों तक हवाईअड्डे के रिफ्यूजी कैंप में रही। मुझे पूरी उम्मीद थी कि अमेरिकी मदद करेंगे, लेकिन उन्होंने भी आखिरी वक्त पर धोखा दिया, अब मेरे पास बाहर निकलने का कोई रास्ता नहीं है। यदि तालिबान ने मुझे पकड़ लिया, तो वो मार डालेंगे। जब मैंने एयरपोर्ट पर अमेरिकी सैनिकों को देखा तो राहत की सांस ली, मुझे लगा कि अब हम सुरक्षित हैं, लेकिन कुछ ही दिनों में मुझे अपनी गलती का अहसास हो गया। मैंने टूटी-फूटी अंग्रेजी में यूएस सैनिकों को समझाया कि मेरी जान को खतरा है, मैंने उन्हें अपना पासपोर्ट, पुलिस ID और पुलिस सर्टिफिकेट भी दिखाया, मगर उन्होंने कोई मदद नहीं की।’

– गुलअफरोज ऐबतेकर

 

क्या है लेडी कॉप गुलअफरोज ऐबतेकर की कहानी?

गुलअफरोज ने कुछ वक्त तक रूस में भी पढ़ाई की थी, इसलिए उन्होंने मदद के लिए रूसी दूतावास का दरवाजा खटखटाया, लेकिन वहां भी निराशा हाथ लगी। एयरपोर्ट से वापस लौटने पर गुलअफरोज की मां ने उन्हें बताया कि तालिबानी उन्हें ढूंढते हुए यहां आए थे। तालिबान लगातार उन पर नौकरी छोड़ने का दबाव डाल रहा था। अफगानिस्तान पर कब्जे से पहले भी उसने गुलअफरोज को कई बार चेतावनी दी थी, तालिबान ने उन्हें पत्र लिखकर कहा था कि पुलिस की नौकरी महिलाओं के लिए नहीं है, इसलिए उन्हें तुरंत नौकरी छोड़ देनी चाहिए। लेकिन गुलअफरोज ने उसकी चेतावनियों को नजरअंदाज कर दिया, अब जब तालिबान सत्ता में है, तो गुलअफरोज की जान पर बन आई है।

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